रुक्मणि का हरण कर इस वृक्ष के नीचे रुके थे भगवान श्री कृष्ण, इस पेड़ की परिक्रमा से होती है लोगों की मनोकामना पूरी
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Moradabad News: मंदिर के पुजारी स्वामी भगवत प्रेरिय ने बताया कि संभल के बेनीपुर कमलपुर गांव में वंश गोपाल तीर्थ मंदिर स्थित है. यहां पर एक कदम का पेड़ मौजूद है. यहां श्री कृष्ण भगवान रुक्मणी का हरण करके आए थे. …और पढ़ें
हाइलाइट्स
- यह मंदिर स्कंद पुराण में गोपाल मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है.
- यहां पर एक कदम का पेड़ मौजूद है.
- पेड़ की परिक्रमा लगाने से मनोकामनाएं होती हैं पूरी.
मुरादाबाद: यूपी के संभल जनपद में श्रीवंश गोपाल धाम मंदिर स्थापित है. इस मंदिर की स्थापना श्री कृष्ण भगवान ने की थी. इस मंदिर के अंदर जो कदम का वृक्ष है वह 5,244 साल पुराना है. पुजारी के मुताबिक इस वृक्ष की परिक्रमा करने से मनोकामना पूरी होती है. इस वृक्ष के नीचे ही श्रीकृष्ण, रुक्मणी का हरण कर ठहरे थे. दूर-दूर तक इस वृक्ष की मान्यता है. लोग यहां पर परिक्रमा कर अपनी अपनी मनोकामना मांगते हैं और भक्तों की मनोकामना यहां पूरी भी होती है.
मंदिर के पुजारी स्वामी भगवत प्रेरिय ने बताया की संभल के बेनीपुर कमलपुर गांव में वंश गोपाल तीर्थ मंदिर स्थित है. यहां पर एक कदम का पेड़ मौजूद है. यहां श्री कृष्ण, रुक्मणी का हरण करके आए थे और इसी पेड़ के नीचे रुके थे. यहां पर मौजूद यह कदम का वृक्ष 5244 वर्ष पुराना है.
उन्होंने बताया कि कृष्ण भगवान, शिव जी के साथ में युद्ध करने गए थे, तो स्वर्ग में रुके थे. फिर कृष्ण भगवान सत्यभामा को लेकर गए थे. तो सत्यभामा ने कहा था कि मेरे को कदम का पेड़ चाहिए या पारिजात का पुष्प चाहिए. उस समय कृष्ण भगवान यहां पर कदम का वृक्ष ले आए थे और इंद्र को वचन दिया था कि जहां-जहां कदम का पेड़ होगा. वहां पर मैं निवास करूंगा. संभल में मौजूद इस मंदिर में जो कदम का पेड़ है इसी पेड़ के नीचे भगवान श्री कृष्ण रुक्मणी का हरण करके लेकर आए थे और इसी पेड़ के नीचे उन्होंने विश्राम किया था.
यह भागवत जी में द्वादश स्कन्द के दूसरे अध्याय में लिखा हुआ है कि रुक्मणी को लेकर भगवान श्री कृष्ण, संभल के इस गांव में आए थे. इसके साथ ही यह मंदिर स्कंद पुराण में गोपाल मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है. यहां पर मौजूद कदम के वृक्ष पर संकल्प लेकर चारों ओर परिक्रमा करने से संतान प्राप्ति से लेकर नौकरी व्यापार सहित सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. दूर-दूर से लोग इस मंदिर में अपनी मनोकामना लेकर आते हैं और इसी कदम के वृक्ष के चारों ओर परिक्रमा कर अपनी मनोकामना मांगते हैं और भक्तों की मनोकामना यहां पर पूरी होती है.