यहां नटखट कान्हा ने चुरा लिए थे गोपियों के वस्त्र, पेड़ की शाखाओं से दिए थे बांध, फिर दिया था खास संदेश

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यहां नटखट कान्हा ने चुरा लिए थे गोपियों के वस्त्र, पेड़ की शाखाओं से दिए थे बांध, फिर दिया था खास संदेश


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UP News: वृंदावन के कण-कण में कृष्ण विधमान हैं. यहां हर ओर वश कृष्ण का ही नाम और उनकी लीलाओं के प्रमाण दिखाई देते है. कृष्ण ने अपनी ज्यादातर लीलाएं पतित पावनी यमुना के किनारे ही की हैं.

मथुरा: वृंदावन द्वापर कल से ही श्रीकृष्ण की लीलाओं को अपने अंदर समेटे हुए हैं. यहां के कण-कण में कृष्ण का नाम और पत्ते-पत्ते पर कृष्ण लीलाओं का बखान आपको देखने को मिल जाएगा. भगवान श्री कृष्ण की एक ऐसी लीला जो आज भी द्वापर कल से जीवंत है. यहां इस लीला के दर्शन कर श्रद्धालु अपने आप को धन्य करते हैं. कहा जाता है कि यमुना महारानी भगवान कृष्ण की पटरानी हैं. पटरानी ने अपने प्रभु से एक विनती की और उस विनती को सुन भगवान कृष्ण ने पटरानी यमुना महारानी को द्वापर में लीला के जरिए पवित्र किया था.

वृंदावन के कण-कण में कृष्ण विधमान हैं. यहां हर ओर वश कृष्ण का ही नाम और उनकी लीलाओं के प्रमाण दिखाई देते है. कृष्ण ने अपनी ज्यादातर लीलाएं पतित पावनी यमुना के किनारे ही की हैं. यहां यमुना के एक घाट पर ही कृष्ण ने गोपियों संग चीर हरण लीला की थी. कृष्ण ने यमुना में स्नान कर गोपियों के वस्त्र चुरा कर घाट पर ही स्थित कदम्ब के वृक्ष की शाखाओं पर बांध दिए थे.

तब गोपियों की प्रार्थना पर कृष्ण ने उन्हें यमुना में स्नान करने की मर्यादा का ज्ञान देते हुए वस्त्रदान किये थे. तब से ही घाट का नाम चीर-हरण घाट है. वर्तमान में इसे चीर घाट के नाम से जाना जाता है. कृष्ण की परंपरा का अनुसरण करते हुए आज यहां वस्त्रदान की परंपरा है.

माना जाता है कि वृक्ष की शाख पर बैठे हुए कृष्ण के दर्शन कर शाखा पर चीर बांधने से घर में कभी भी वस्त्र और अन्न की कमी नहीं होती है. यमुना के किनारे स्थिति चीर घाट पर हर दिन श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं. दर्शन कर यमुना महारानी और भगवान श्री कृष्ण के समक्ष अपनी मनोकामना रखते हैं. ऐसा कहा जाता है कि जो भी व्यक्ति सच्चे मन से मनौती मांगता है, उसकी सभी मनोकामना पूर्ण हो जाती हैं. मनोकामना पूर्ण होने के बाद श्रद्धालु अपनी सामर्थ और श्रद्धा के अनुसार दान करते हैं. कदम का यह वृक्ष द्वापर युग से यहां खड़ा हुआ है. द्वापर युग की याद को ताज किए हुए हैं. भले ही इस वृक्ष की शाखाएं सूख गई हों, लेकिन पत्ते हरे-भरे बने हुए हैं.

यमुना में निर्वस्त्र होकर स्नान करती थीं बृज गोपियां
द्वापर युग में ब्रज की गोपियों यमुना में स्नान करती थीं. यमुना में स्नान के दौरान वह अपने सारे वस्त्र उतार देती थीं. यमुना जल में क्लोल करते हुए जीव जंतु जो की मर्यादा की वजह से शर्मसार होते थे. वह यमुना महारानी से अपनी व्यथा को सुनाने लगे. यमुना जी ने श्री कृष्ण से आग्रह किया कि जिस तरह से गोपिया निर्वस्त्र होकर स्नान करती हैं, तो हमें अच्छा नहीं लगता. भगवान कृष्ण ने उन्हें सबक सिखाने के लिए चीर हरण लीला को आयोजित किया.

Kavya Yadav

करीब 2 साल से पत्रकारिता जगत में सक्रिय. स्पोर्ट्स, खासकर क्रिकेट, फुटबॉल और बैडमिंटन में दिलचस्पी. नवंबर 2022 से न्यूज18 हिंदी में स्पोर्ट्स टीम का हिस्सा हूं. इससे पहले वेबसाइट क्रिकट्रैकर में काम किया. संपर्…और पढ़ें

करीब 2 साल से पत्रकारिता जगत में सक्रिय. स्पोर्ट्स, खासकर क्रिकेट, फुटबॉल और बैडमिंटन में दिलचस्पी. नवंबर 2022 से न्यूज18 हिंदी में स्पोर्ट्स टीम का हिस्सा हूं. इससे पहले वेबसाइट क्रिकट्रैकर में काम किया. संपर्… और पढ़ें

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