साथ पढ़ेंगे–साथ बढ़ेंगे: कोई पीछे न छूटे, सबको समान अवसर मिले, योगी सरकार की इस पहल ने बच्‍चों के ल‍िए कर दिया कमाल

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साथ पढ़ेंगे–साथ बढ़ेंगे: कोई पीछे न छूटे, सबको समान अवसर मिले, योगी सरकार की इस पहल ने बच्‍चों के ल‍िए कर दिया कमाल


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उत्तर प्रदेश सरकार की योजना ‘साथ पढ़ेंगे, साथ बढ़ेंगे’ अब गांवों में बच्चों की पढ़ाई का तरीका बदल रही है. इस योजना का मकसद है कि हर बच्चा अच्छी शिक्षा पाए और कोई भी पीछे न रह जाए.







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अब ग्रामीण शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव

लखनऊ. उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘साथ पढ़ेंगे, साथ बढ़ेंगे’ अब ग्रामीण शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव का प्रतीक बन चुकी है. इस पहल के तहत छोटे और कम संसाधन वाले स्कूलों को बड़े स्कूलों से जोड़ा गया है, जिससे शिक्षा में वर्षों से मौजूद असमानता को समाप्त करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. पौराणिक श्लोक “संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्” का अर्थ है, साथ चलो, साथ बोलो और एक जैसी सोच रखो. यही भाव इस योजना के मूल में है, कोई भी बच्चा पीछे न छूटे, सबको समान अवसर मिले.

अक्सर छोटे गांवों या दूरस्थ क्षेत्रों में मौजूद स्कूलों में बच्चों की संख्या कम होती है, जिससे शिक्षा का स्तर गिरने लगता है. संसाधनों की कमी, योग्य शिक्षकों का अभाव और छात्रों के बीच प्रतिस्पर्धा की भावना न होने के कारण बच्चे खुद को पीछे समझने लगते हैं. ऐसे में वे या तो पढ़ाई से उदासीन हो जाते हैं या फिर स्कूल छोड़ने का मन बना लेते हैं. लेकिन योगी सरकार की स्कूल पेयरिंग नीति ने इस परिदृश्य को बदल डाला है.

अब 50 से कम बच्चों वाले स्कूलों को बड़े और सुविधायुक्त स्कूलों से जोड़ा गया है. इससे बच्चों को न केवल बेहतर शैक्षिक संसाधन जैसे लैब, लाइब्रेरी, स्मार्ट क्लास जैसी सुविधाएं मिल रही हैं, बल्कि वे एक बड़े समूह में पढ़कर आत्मविश्वास, सहयोग और सामाजिक समझ भी विकसित कर रहे हैं. यह योजना केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता की ओर बढ़ता हुआ कदम है. इस योजना की जड़ें भारतीय संस्कृति में भी गहराई से जुड़ी हैं.

अब स्कूल केवल शिक्षा का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने वाले केंद्र बनते जा रहे हैं. बच्चे स्कूलों से जुड़ाव महसूस कर रहे हैं, और शिक्षकों को भी अधिक सहयोगात्मक और प्रासंगिक वातावरण मिल रहा है. बच्चों की कम संख्या अब कोई बाधा नहीं, बल्कि बड़े स्कूलों की साझेदारी के जरिए यह एक अवसर बन गई है. ‘साथ पढ़ेंगे साथ बढ़ेंगे’अब सिर्फ एक नारा नहीं, एक संस्कृति बन चुका है, ऐसी संस्कृति, जिसमें शिक्षा सबको साथ लेकर चलती है और भविष्य को समृद्ध बनाती है.

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अभिजीत चौहान

न्‍यूज18 हिंदी डिजिटल में कार्यरत. वेब स्‍टोरी और AI आधारित कंटेंट में रूचि. राजनीति, क्राइम, मनोरंजन से जुड़ी खबरों को लिखने में रूचि.

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कोई पीछे न छूटे, सबको समान अवसर मिले, यूपी सरकार ने बच्‍चों के ल‍िए किया कमाल



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