General Knowledge: कहां है एशिया की सबसे बड़ी लाइब्रेरी? फिल्म ‘सुपर 30’ में भी दिखा था जलवा!

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General Knowledge: कहां है एशिया की सबसे बड़ी लाइब्रेरी? फिल्म ‘सुपर 30’ में भी दिखा था जलवा!


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Asia’s Largest Library : यह सेंट्रल लाइब्रेरी कई मायनों में खास है. यह लाइब्रेरी लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम की तर्ज पर बनाई गई है.हर दिन करीब 5 हजार लोग इस लाइब्रेरी का इस्तेमाल करते है.यहां 12,500 से अधिक पांडुल…और पढ़ें

वाराणसी : आमतौर पर हर स्कूल और शिक्षण संस्थानों में लाइब्रेरी होती है. लेकिन आज हम आपको जिस लाइब्रेरी के बारे में बताने जा रहे हैं वो देश की सबसे बड़ी लाइब्रेरी में से एक है. इस लाइब्रेरी में दुर्लभ किताबों का अनोखा संग्रह है. सर्व विद्या की राजधानी कहे जाने वाले काशी हिंदू विश्वविद्यालय में यह लाइब्रेरी स्थित है. जिसका नाम सयाजी राव गायकवाड़ सेंट्रल लाइब्रेरी है. देश के मशहूर गणितज्ञ आनंद कुमार की लाइफ ‘सुपर 30’ नाम से फिल्म में भी इस लाइब्रेरी को दिखाया गया है.

इस लाइब्रेरी में 16 लाख किताबों का अनूठा संग्रह है. इसके अलावा यहां 1000 साल से अधिक पुरानी कई पांडुलिपियां और ताड़पत्र है. इतना ही नहीं गवर्मेंट डॉक्यूमेंट और शोधपत्र का बड़ा कलेक्शन भी यहां रखा गया है. सेंट्रल लाइब्रेरी के लाइब्रेरियन डी के सिंह ने बताया कि किताबों के संग्रह के आधार पर ये लाइब्रेरी देश की सबसे बड़ी लाइब्रेरी है. यूनिवर्सिटी सिस्टम के हिसाब से पूरे एशिया में इतनी बड़ी लाइब्रेरी कहीं नहीं है. यहां 12,500 से अधिक पांडुलिपियां,13795 जर्नल्स और लाखो पीडियाडिकल्स है.

5 हजार लोग करते हैं रोज इस्तेमाल
बीएचयू की यह सेंट्रल लाइब्रेरी और भी कई मायनों में खास है. यह लाइब्रेरी लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम की तर्ज पर बनाई गई है. इसमें छात्रों के बैठने के लिए राउंड टेबल की व्यवस्था है. हर दिन करीब 5 हजार लोग इस लाइब्रेरी का इस्तेमाल करते हैं. जिसमें शिक्षक, छात्र और रिसर्चर शामिल हैं. इस लाइब्रेरी में अलग-अलग भाषाओं में लिखी लाखों पुस्तकें हैं.

पहले यहां थी बीएचयू की सेंट्रल लाइब्रेरी
जानकारी के मुताबिक, इस लाइब्रेरी की नींव महामना पंडित मदन मोहन मालवीय ने 1917 में रखी थी. उस समय इसका स्थान और स्वरूप बिल्कुल अलग था. 1917 में यह लाइब्रेरी सेंट्रल हिन्दू स्कूल कमच्छा में थी. बाद में इसे बीएचयू कैम्पस के आर्ट फैकल्टी के सेंट्रल हॉल में लाया गया.

यहां से मिला महामना को आइडिया
1931 में महामना पंडित मदनमोहन मालवीय लंदन में आयोजित राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस में शामिल होकर वापस लौटे तो उन्होंने  विश्वविद्यालय में वैसी ही लाइब्रेरी के स्थापना का मन बनाया. जिसके बाद उन्होंने महाराष्ट्र के बड़ौदा के महाराज सयाजीराव गायकवाड़ से इसके लिए मदद मांगी. फिर बीएचयू में लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम लाइब्रेरी की तर्ज पर यह लाइब्रेरी बनकर तैयार हुई.

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