हरदोई के अस्पताल में लगी भीषण आग, नवजातों को गठरी में बांधकर बचाया, बाल-बाल…
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हरदोई के कीर्ति कृष्णा अस्पताल में आग लगने से अफरा-तफरी मच गई. अस्पताल में मौजूद 100 लोगों, जिनमें कई नवजात शामिल थे, को सुरक्षित निकाला गया. फायर ब्रिगेड की देरी के बावजूद बड़ा हादसा टल गया.
बेसमेंट से उठे धुएं ने मचाई तबाही
प्रत्यक्षदर्शियों और अस्पताल कर्मियों के अनुसार, आग बेसमेंट से उठे धुएं के साथ फैलनी शुरू हुई. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया. मरीजों और स्टाफ को सीढ़ियों की मदद से सुरक्षित बाहर निकाला गया. नवजात शिशुओं को गठरियों में बांधकर और साड़ियों में लपेटकर नीचे लाया गया. सड़क पर मौजूद लोग, अस्पताल कर्मी और प्रशासनिक अधिकारी मिलकर बच्चों और मरीजों को सुरक्षित निकालने में जुट गए.
हुसैनपुर सहोरा निवासी पीड़िता नन्हीं देवी ने बताया कि वह डेढ़ बजे एक माह के बच्चे को लेकर अस्पताल आई थी. जैसे ही उन्हें आग की जानकारी मिली, उन्होंने बच्चे को गोद में उठाया और फर्स्ट फ्लोर से नीचे लगी अस्थायी सीढ़ी के जरिए बाहर निकल आईं. यह दृश्य अस्पताल के बाहर खड़े लोगों के दिलों को दहला देने वाला था.
बैटरी ब्लास्ट या शॉर्ट सर्किट बना हादसे की वजह
अस्पताल संचालक डॉ. सी. के. गुप्ता की पत्नी अपर्णा गुप्ता ने बताया कि वह जब अपने कार्यालय में कार्य कर रही थीं, तभी पूरे परिसर में धुआं भर गया. प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बेसमेंट में बैटरी ब्लास्ट या शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगी. हालांकि, आग के कारणों की सटीक पुष्टि अभी नहीं हो सकी है.
घटना की सूचना मिलने के लगभग आधे घंटे बाद फायर बिग्रेड और पुलिस की दो गाड़ियां मौके पर पहुंची. सीएफओ महेश ने बताया कि आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया है और कोई जनहानि नहीं हुई है. सभी मरीजों को सुरक्षित निकालकर नजदीकी अस्पतालों में शिफ्ट किया गया है, खासतौर पर ऑक्सीजन पर निर्भर बच्चों को विशेष सतर्कता के साथ दूसरी जगह भर्ती कराया गया.
प्रशासन की लापरवाही पर उठे सवाल
हालांकि स्थानीय लोगों और अस्पताल स्टाफ की तत्परता से एक बड़ा हादसा टल गया, लेकिन यह घटना प्रशासनिक तैयारियों और अस्पताल में सुरक्षा उपायों की पोल खोलती नजर आई. समय पर दमकल की टीम पहुंचती तो स्थिति और जल्दी नियंत्रण में आ सकती थी. यह घटना एक बार फिर से निजी अस्पतालों में फायर सेफ्टी मानकों की अनदेखी पर गंभीर सवाल खड़े करती है.