तिल की खेती में कमाल कर देगा ये फार्मूला, बस बुवाई से पहले डालें ये 2 चीजें…
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Agriculture Tips: शाहजहांपुर में किसान खरीफ सीजन की तैयारियों में जुटे हैं. तिल की खेती कम पानी में होती है और इसकी लागत भी कम होती है. डॉ. एन.पी. गुप्ता के अनुसार, तिल का तेल उच्च गुणवत्ता वाला होता है.
हाइलाइट्स
- तिल की बुवाई में सल्फर और जिंक का उपयोग करें.
- सल्फर और जिंक से उत्पादन 30% बढ़ता है.
- तिल के तेल की गुणवत्ता बेहतर होती है.
तिल की फसल क्यों है खास
कृषि विज्ञान केंद्र, नियामतपुर के कृषि विशेषज्ञ डॉ. एन.पी. गुप्ता बताते हैं कि तिल एक ऐसी फसल है जिसे बहुत ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती. मॉनसून के दौरान अगर रुक-रुककर हल्की बारिश हो जाए तो तिल की फसल आसानी से तैयार हो जाती है. इसके अलावा इसकी लागत भी कम होती है, जिससे छोटे किसान भी इसे आसानी से उगा सकते हैं. साथ ही तिल का तेल उच्च गुणवत्ता वाला होता है, जिसकी बाज़ार में अच्छी मांग रहती है.
तिल की अच्छी उपज के लिए बुवाई से पहले खेत की अच्छी तैयारी बेहद जरूरी है. खेत में गहरी जुताई करके मिट्टी को भुरभुरा बना लेना चाहिए. जब क्षेत्र में हल्की नमी हो, तभी खेत की अंतिम जुताई करें. इसके साथ ही उस समय कुछ जरूरी उर्वरकों को भी खेत में डाल देना चाहिए, ताकि फसल की नींव मजबूत हो.
डॉ. गुप्ता के मुताबिक, अंतिम जुताई के समय एक हेक्टेयर खेत में निम्नलिखित उर्वरक डालना चाहिए. जिनमें 40 से 50 किलोग्राम यूरिया, 20 से 25 किलोग्राम पोटाश, और 30 से 40 किलोग्राम फास्फोरस. ये सभी पोषक तत्व तिल की बढ़वार और उत्पादन के लिए जरूरी होते हैं.
तिल की फसल की गुणवत्ता और उत्पादन को बेहतर बनाने के लिए सल्फर और जिंक जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की भी जरूरत होती है. इन दोनों का बुवाई के समय खेत में प्रयोग करने से न सिर्फ पैदावार बढ़ती है बल्कि तिल से निकलने वाला तेल भी ज्यादा और उच्च गुणवत्ता का होता है.