इस नस्ल की बकरी का करें पालन, कम खर्च में होती तैयार, नहीं पड़तीं बीमार, किसानों को कर देगी मालामाल

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इस नस्ल की बकरी का करें पालन, कम खर्च में होती तैयार, नहीं पड़तीं बीमार, किसानों को कर देगी मालामाल


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Goat Farming Tips: बकरी पालन किसानों के लिए शुरू से आय का एक अच्छा साधन रहा है. लेकिन इसमें नस्लों का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है. ब्लैक बंगाल, बरबरी, जमुना पारी और सिरोही नस्लें पशु पालकों के लिए बेहद उपयुक्…और पढ़ें

Best Goat Farming Breed: पशुपालन का व्यवसाय लोगों के लिए समृद्धि के द्वार खोल रहा है. लोग पशुपालन करके अपनी आय दोगुनी कर रहे है. बदलते दौर में पढ़े लिखे युवा सी पशुपालन की ओर बढ़ रहे हैं. जिसमें वह गाय भैंस पालन के साथ ही बकरी पालन का काम बड़े स्तर पर कर रहे है. परंतु जानकारी के अभाव में उन्हें कई बार नुकसान का भी सामना करना पड़ता है. ऐसे में बकरी पालन का काम करने वाले किसानों के लिए पशु विशेषज्ञ की यह सलाह जाना बेहद जरूरी है. जिससे उन्हें कम लागत में अच्छा मुनाफा मिल सके.

दरअसल रायबरेली जिले के राजकीय पशु चिकित्सालय शिवगढ़ के प्रभारी पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. इंद्रजीत वर्मा (एमवीएससी वेटनरी) लोकल 18 से बात करते हुए बताते है कि बकरी पालन करने वाले किसान बकरी की उन्नत नस्ल का चयन करें. जिससे उन्हें अच्छा मुनाफा मिले. वह बताते हैं कि बकरी पालन करने वाले किसान बकरी की उन्नत नस्ल में शामिल सिरोही नस्ल की बकरियों का पालन करें. जो बकरी पालन करने वालों के लिए किसी एटीएम मशीन से कम नहीं है.

इस नस्ल की बकरी से लेकर बकरा तक बाजारों में महंगे दामों में आसानी से बिक जाते हैं. साथ ही यह दुग्ध उत्पादन में भी अच्छी नस्ल की बकरी मानी जाती है. वह बताते है कि इस नस्ल की बकरियां मुख्य रूप से राजस्थान मैं पाई जाती है. परंतु अब उत्तर प्रदेश के कई जिलों में इस नस्ल की बकरियों का पालन करके लोग अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं.

ऐसे करे सिरोही नस्ल की बकरी की पहचान
डॉ. इंद्रजीत वर्मा बताते हैं कि सिरोही नस्ल की बकरी आमतौर पर भूरे रंग की होने के साथ ही इनके सींग मुड़े हुए होते हैं, बाल छोटे और मोटे एवं कान चपटे और लटके हुए होते हैं. इनके शरीर पर हल्के गहरे भूरे रंग के धब्बे भी होते हैं. साथ ही सिरोही नस्ल की बकरी प्रतिदिन 2 से 3 लीटर दूध का उत्पादन करती है.

सिरोही नस्ल की बकरियों के दूध व मांस की मांग
आगे की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि इस नस्ल की बकरियां प्रजनन के लिए भी बेहद अच्छी मानी जाती हैं. यह एक बार में एक से दो बच्चों को जन्म देती हैं. साथ ही 6 से 8 महीने में ही यह प्रजनन के लिए तैयार हो जाती है. सिरोही नस्ल की बकरियों के दूध व मांस की मांग बाजारों में अधिक रहती है. जिससे यह आसानी से बाजारों में महंगे दामों में भी बिक जाती हैं. सिरोही नस्ल के बकरे का मांस उच्च गुणवत्ता वाला मांस माना जाता है.

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