Animal husbandry : 3 घंटा धूप, गुनगुना पानी…फरवरी में मौसम का बदलाव दुधारू पशुओं के लिए घातक, ये ट्रिक बचाएगी
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Animal husbandry : फरवरी का महीना शुरू हो चुका है. इस दौरान तापमान में लगातार परिवर्तन देखा जा रहा है. मौसम में हो रहे इस बदलाव का असर जानवरों की सेहत पर भी देखने को मिल रही है. बदलते मौसम में अपने पशुओं का ध्यान रखने के लिए पालकों को कुछ तरीके जरूर अपनाने चाहिए. लोकल 18 ने इस बारे में आजमगढ़ में पशु चिकित्सक डॉ. राहुल यादव से बात की. डॉ. राहुत बताते हैं कि ये मौसम पशुओं को सर्दी जुकाम, निमोनिया और जोड़ों में दर्द पैदा कर सकता है. मौसम में अचानक होने वाले परिवर्तन से दुधारू पशुओं में दूध उत्पादन कम हो जाता है.
मौसम में लगातार हो रहे परिवर्तन का असर केवल इंसानों पर ही नहीं, बल्कि पशुओं की सेहत पर भी देखने को मिल रहा है. ऐसे में इंसानों के साथ-साथ जानवरों को भी विशेष देखभाल की जरूरत है. बदलते मौसम में जानवरों पर कई तरह के रोगों का खतरा मंडराने लगा है. जरा सी चूक पशुपालकों को भारी पड़ सकती है.

तापमान में अचानक होने वाले परिवर्तन से पशुओं के बीमार होने की संभावना अधिक होती है. दुधारू पशुओं में दूध उत्पादन कम हो जाता है. उन्हें सर्दी, जुकाम और बुखार जैसी समस्याएं घेर लेती हैं. सही इलाज न मिलने पर पशु की जान भी जा सकती है.

लोकल 18 से बात करते हुए आजमगढ़ में पशु चिकित्सक डॉ. राहुल यादव बताते हैं कि ठंड के मौसम में पशुओं को सर्दी जुकाम, निमोनिया और जोड़ों में दर्द जैसी समस्या सबसे अधिक होती है. अचानक होने वाले परिवर्तन का असर भी उनके ऊपर देखने को मिल सकता है. दुधारू पशुओं में दूध उत्पादन कम हो जाता है.
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ऐसे मौसम में पशुओं के रहने की जगह में समय-समय पर बदलाव करना बेहद जरूरी है. उन्हें ठंड से बचाने के लिए उनके रहने की जगह को सूखा बनाए रखना जरूरी है. धूप निकलने के बाद तापमान अधिक हो जाता है, ऐसे में उन्हें छांव भी चाहिए.

दिन में जानवरों को कम से कम 2 से 3 घंटे धूप की जरूरत होती है. पशुओं को दिन के समय में ऐसी जगह पर बांधना चाहिए, जहां पर कम से कम दिन में कुछ घंटे तक अच्छी धूप पहुंचती हो.

उनके खान-पान पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है. ऐसे मौसम में पशुओं को हरा चारा, सूखा भूसा और संतुलित आहार देना चाहिए. दूसरी ओर उनके खाने में कुछ खनिज पदार्थ का मिश्रण भी जरूरी है. इससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है.

इस मौसम में पशुओं को ठंडा पानी बिल्कुल नहीं पिलाना चाहिए. इससे उन्हें सर्दी-जुकाम के साथ बुखार हो सकता है. तापमान में बदलाव के अनुसार कोशिश करें कि पशुओं को ताजा पानी पिलाया जाए या फिर संभव हो तो हल्का गुनगुना पानी पिलाना चाहिए.

इस दौरान दुधारू पशुओं पर विशेष नजर रखनी चाहिए. बीमारी की स्थिति में उनका दूध उत्पादन प्रभावित हो सकता है. गुणवत्ता में भी कमी देखने को मिल सकती है, जिससे पशुपालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है. ऐसे में अगर पशु जरा भी बीमार दिखाई पड़ें तो तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें.