Ballia News: नवरात्र का भूतों का मेला, अद्भुत और रहस्यमयी अनुभव, जानें मंदिर का रहस्य
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Story of the mysterious temple: उत्तर प्रदेश में हर नवरात्र लगने वाला “भूतों का मेला” अपने रहस्यमयी और अद्भुत अनुभवों के लिए प्रसिद्ध है. यह मेला केवल भव्य उत्सव नहीं, बल्कि भूत-प्रेत बाधा से मुक्ति और आत्मिक शांति का केंद्र माना जाता है. विभिन्न प्रांतों से लोग यहां बाबा की कृपा पाने और मानसिक, शारीरिक परेशानियों से राहत पाने के लिए आते हैं। मेले में अजीबोगरीब घटनाएं देखने को मिलती हैं,
बलिया. झूले-चरखी के मेले आपने कई देखे होंगे, लेकिन उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में हर नवरात्र लगने वाला “भूतों का मेला” अपनी अलग ही पहचान रखता है. यह मेला केवल मनोरंजन का केंद्र नहीं, बल्कि लोगों के अनुसार यह भूत-प्रेत बाधा से मुक्ति दिलाने वाला आध्यात्मिक स्थल भी है. विभिन्न प्रांतों से लोग यहां आते हैं, यह विश्वास लेकर कि बाबा की कृपा से उनके मानसिक और आत्मिक कष्ट दूर होंगे. मेला शुरू होते ही ही अजीबोगरीब दृश्य देखने को मिलते हैं. कई लोग अचानक असामान्य हरकतें करने लगते हैं. महिलाएं बाल खोलकर झूमती हैं और रहस्यमय भाषा में गीत गाती हैं. बताया जाता है कि मृत आत्माओं का साया उनके ऊपर आ जाता है और बाबा की अनुमति से ये आत्माएं शरीर में प्रवेश करती हैं. पुरुष भी इसमें शामिल होते हैं और मृत आत्माओं की पीड़ा और अनुभव साझा करते हैं.
नवका बाबा मंदिर और उसकी पौराणिकता
जिले के मनियर में स्थित नवका बाबा मंदिर इस मेला का केंद्र है. पुजारी श्रीराम उपाध्याय ने बताया, “नौका बाबा ब्राह्मण परिवार के थे, जिनको टोटके के माध्यम से मार दिया गया था. इसके बाद वे ब्रह्म बन गए.” पुजारी ने यह भी बताया कि प्राचीन काल में उनके परिवार में एक तांत्रिक थे, जिनके मार्गदर्शन से बाबा ने यहां स्थान पाया.
भूत प्रेत बाधा से मुक्ति
मेला विशेष रूप से नवरात्र में आयोजित होता है. यहां कोई भी व्यक्ति, जिस पर मृत आत्मा का साया है, बाबा के दरबार में आते ही प्रकट हो जाता है. कहा जाता है कि यहां आने वाले लोग भूत-प्रेत बाधा से राहत पाते हैं. इसके अलावा, कुष्ठ रोग, चर्म रोग और अन्य परेशानियों के लिए भी भक्त यहां बाबा की शरण में आते हैं. गोरखपुर निवासी नीलम ने बताया कि उनके भसुर की मृत्यु के बाद उनकी आत्मा उन्हें परेशान कर रही थी. बाबा के दरबार में आने के बाद उनकी आत्मा नीलम के शरीर में आ गई, और नीलम बाल खोलकर झूमने लगी. पास में बैठे सोखा ने मृत्यु भसुर से निवेदन किया कि वे नीलम के शरीर में प्रवेश न करें. ऐसे कई अनुभवों में महिलाएं तेज आवाज में रोती और अजीब भाषा में गाती हुई नजर आती हैं. पुरुष भी समान अनुभव साझा करते हैं.
मेले का माहौल
मेले का माहौल अत्यंत रहस्यमयी और विचित्र लगता है. हर कोई अपने दर्द और आशा के साथ यहां पहुंचता है. लोग छोटे-छोटे घर बना कर रहते हैं और अपनी जीवनचर्या यहीं करते हैं. यहां किसी अन्य मुद्दे की चर्चा नहीं होती, केवल भूत-प्रेत और आत्मिक मुक्ति को लेकर ही बातचीत होती है. ध्यान दें- उक्त खबर के किसी भी तथ्य की पुष्टि लोकल 18 नहीं करता है.