General Knowledge: हर बाघ आदमखोर नहीं होता! 90% लोग इस सच को नहीं जानते…
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General Knowledge: पीलीभीत में वन्यजीवों के हमले में इंसान की मौत पर उन्हें तुरंत आदमखोर घोषित कर दिया जाता है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार बार-बार हमला करने वाले ही आदमखोर होते हैं.
पिंजरे में कैद आदमखोर
हाइलाइट्स
- वन्यजीवों को तुरंत आदमखोर घोषित नहीं किया जाता.
- बार-बार इंसानों पर हमला करने वाले ही आदमखोर होते हैं.
- चोट या विकलांगता के कारण वन्यजीव आदमखोर बन सकते हैं.
पीलीभीत: वन्यजीवों के हमले में किसी इंसान की मौत होने पर अक्सर उसे तुरंत आदमखोर (Man-eater) घोषित कर दिया जाता है. लेकिन हकीकत इससे बिलकुल अलग होती है. कई बार यह हादसा मात्र होता है, जबकि कुछ खास परिस्थितियों में ही जंगली जानवर आदमखोर बनते हैं. क्या आप जानते हैं आखिर कब कोई जंगली जानवर आदमखोर बनता है. आइए जानते हैं.
पीलीभीत और तराई के जिलों में मानव और वन्यजीव संघर्ष कोई नई बात नहीं है. टाइगर रिजर्व के आसपास के इलाकों में बाघ समेत अन्य जानवरों के हमले अक्सर सुर्खियों में रहते हैं. इस बीच ‘आदमखोर’ शब्द भी ज्यादा सुनने और पढ़ने को मिलता है. हालांकि जानकारों के मुताबिक, कोई भी वन्यजीव आदमखोर केवल विशिष्ट कारणों और परिस्थितियों के कारण ही बनता है.
जानिए कब कोई वन्य जीव कहलाता है आदमखोर
वरिष्ठ पत्रकार और वन्यजीव विशेषज्ञ केशव अग्रवाल के अनुसार, आमतौर पर जब किसी वन्यजीव के हमले में इंसान की मौत हो जाती है, तो उसे नरभक्षी (Man-eater) मान लिया जाता है. लेकिन वास्तविकता यह है कि वन महकमे की ओर से ही वन्यजीव को आदमखोर घोषित किया जाता है. पहली बार इंसान पर हमला कर उसका शिकार करना आदमखोर बनने का प्रमाण नहीं होता. यदि कोई वन्यजीव बार-बार इंसानों पर हमला कर उनका शिकार करता है और उनका भक्षण करता है, तब उसे आदमखोर माना जाता है.
आदमखोर बनने के मुख्य कारण
केशव अग्रवाल बताते हैं कि बाघ और तेंदुए के नरभक्षी बनने के सबसे आम कारणों में चोट लगना या शारीरिक विकलांगता प्रमुख हैं. ऐसी स्थिति में वन्यजीव शिकार करने में असमर्थ हो जाता है और इंसान को आसान शिकार समझ कर उस पर हमला करता है. एक बार इंसान का शिकार करने के बाद वह वन्यजीव के लिए सबसे आसान लक्ष्य बन जाता है. इसके अलावा, कई बार बाघ और तेंदुए उम्र बढ़ने पर भी जीवन के अंतिम चरणों में आदमखोर बन जाते हैं.