IAS Story: बचपन में पिता की हत्‍या, मां की कैंसर से मौत, दोनों बहनों ने पास की UPSC

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IAS Story: बचपन में पिता की हत्‍या, मां की कैंसर से मौत, दोनों बहनों ने पास की UPSC


UPSC Success Story, IAS Story: उत्तर प्रदेश में इनदिनों ताबड़तोड़ प्रशासनिक फेरबदल किए जा रहे हैं.पिछले दो दिनों में 40 आईएएस अधिकारियों के ट्रांसफर किए गए हैं. बाद में और 24 आईएएस अफसरों के तबादले भी कर दिए गए. इनमें कई चर्चित आईएएस अधिकारियों के नाम शामिल हैं.इन्‍हीं में से एक हैं आईएएस किंजल सिंह. उन्हें परिवहन आयुक्त के पद से हटाकर माध्यमिक शिक्षा विभाग का सचिव बना दिया गया है. उनकी जगह 2010 बैच के आईएएस अधिकारी आशुतोष निरंजन को परिवहन आयुक्त बनाया गया है. आशुतोष निरंजन हाल ही में केंद्र से वापस लौटे हैं.

कौन हैं आईएएस किंजल सिंह?

आईएएस किंजल सिंह यूपी कैडर की तेज तर्रार महिला अधिकारी हैं. उनका जन्म 5 जनवरी 1982 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में हुआ था. वे 2008 बैच की आईएएस हैं और ऑल इंडिया रैंक 25 के साथ चयनित हुईं. उन्होंने बीए, एलएलबी और दर्शनशास्त्र में डिग्री हासिल की है. उनकी गिनती उत्तर प्रदेश के सबसे सक्रिय अफसरों में होती है,लेकिन उनकी सफलता की कहानी आसान नहीं है. वह संघर्ष,दर्द और अटूट हौसले की मिसाल है.

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ढाई महीने की उम्र में पिता की हत्या

किंजल सिंह महज ढाई महीने की थीं जब उनके डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (DSP)पिता केपी सिंह की हत्या कर दी गई. उनके पिता के सहयोगियों ने ही एक फर्जी एनकाउंटर में यह हत्या की थी. कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि किंजल जब मात्र छह महीने की थीं तब 1982 में यह घटना हुई. पिता की हत्या के बाद मां विभा सिंह न्याय की लड़ाई लड़ने लगीं. वे लगातार बलिया से दिल्ली तक सुप्रीम कोर्ट जाती रहीं. पूरे 31 साल तक कोर्ट का चक्कर काटती रहीं, लेकिन पिता को न्याय नहीं मिल सका. इस लंबी लड़ाई के दौरान साल 2004 में किंजल की मां विभा सिंह कैंसर की बीमारी से गुजर गईं.किंजल की एक बहन प्रांजल भी हैं.

UP IAS Transfer List, IAS Kinjal Singh posting details: आईएएस किंजल सिंह कहां कहां रहीं?

मां की मौत के बाद दोनों बहनों ने संभाला मोर्चा

मां के जाने के बाद दोनों बहनों किंजल और प्रांजल ने पिता को न्याय दिलाने का फैसला किया. दोनों ने यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी. साल 2008 में किंजल सिंह दूसरे प्रयास में ऑल इंडिया 25वीं रैंक हासिल करके आईएएस बन गईं. उनकी छोटी बहन प्रांजल सिंह भी यूपीएससी सिविल सर्विसेज परीक्षा में 252वीं रैंक लाकर आईआरएस अधिकारी बन गईं. दोनों बहनों ने हौसले से मुश्किलों को पार किया और न सिर्फ सरकारी नौकरी हासिल की, बल्कि यूपी कैडर में अपनी पहचान भी बनाई. आखिरकार वर्ष 2013 में 31 साल लंबी लड़ाई लड़ने के बाद किंजल के पिता केपी सिंह के हत्यारों समेत 18 आरोपियों को सजा मिली.

महज 7 महीने में हो गया ट्रांसफर

आईएएस किंजल सिंह को 16 सितंबर 2025 को परिवहन आयुक्त बनाया गया था यानी उनकी यह पोस्टिंग सिर्फ सात महीने चली. इस दौरान उन्होंने ओवरलोडिंग के खिलाफ सख्त एक्शन लिया. कई परिवहन अधिकारियों (पीटीओ) और कर्मचारियों को ओवरलोडिंग गिरोह में शामिल होने के आरोप में निलंबित कर दिया लेकिन अब उनकी इस पोस्टिंग को लेकर प्रशासनिक गलियारों में खूब चर्चा है.

तबादले के पीछे मंत्री से अनबन की चर्चा

बताया जा रहा है कि आईएएस किंजल सिंह को हटाने का एक बड़ा कारण परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह के साथ तालमेल की कमी था. विभागीय कामकाज और कई फैसलों पर दोनों के बीच मतभेद हो गए थे. मंत्री बार-बार ओवरलोडिंग रोकने की बात कर रहे थे, लेकिन आयुक्त स्तर पर बड़े पैमाने पर निलंबन के बाद समन्वय नहीं बन पाया. कुछ सूत्रों का कहना है कि यह बदलाव नई ट्रांसफर पॉलिसी लागू होने से पहले किसी बड़े विवाद से बचने के लिए भी किया गया हालांकि कुछ लोग इसे सामान्य प्रशासनिक तबादला मान रहे हैं, लेकिन उनकी छोटी अवधि की पोस्टिंग और माध्यमिक शिक्षा जैसे पद को ‘साइडलाइन’ माना जा रहा है, जिससे बहस तेज हो गई है.

कई पदों पर रहीं किंजल सिंह

किंजल सिंह यूपी कैडर की आईएएस अधिकारी हैं. परिवहन आयुक्त बनने से पहले वे कई महत्वपूर्ण पदों पर रह चुकी हैं. इनमें विशेष सचिव, जिला मजिस्ट्रेट (DM), मुख्य विकास अधिकारी (CDO), संयुक्त मजिस्ट्रेट और चिकित्सा शिक्षा विभाग की महानिदेशक जैसे पद शामिल हैं.उन्होंने बहराइच, लखीमपुर खीरी, सीतापुर और अयोध्या जैसे जिलों में डीएम के रूप में काम किया है. हर जगह उन्होंने अपनी कार्यशैली से चर्चा बटोरी. उनकी पोस्टिंग हमेशा सक्रिय और जनसेवा से जुड़ी रही है.

युवाओं के लिए बनीं मिसाल 

आईएएस किंजल सिंह की कहानी सिर्फ एक अफसर की नहीं, बल्कि एक बेटी की है जिसने बचपन में पिता खोया, मां को कैंसर से गंवाया, फिर भी कभी डगमगाई नहीं. दोनों बहनों ने मिलकर न्याय की लड़ाई लड़ी और देश की सबसे बड़ी परीक्षा UPSC पास करके साबित कर दिया कि मुश्किलें कितनी भी बड़ी हों हौसला हो तो रास्ता निकल ही आता है.अब माध्यमिक शिक्षा विभाग की सचिव के रूप में वे नई जिम्मेदारी संभालेंगी. उनकी यह पोस्टिंग चाहे कितनी भी चर्चा में रही हो, लेकिन उनकी जिंदगी की कहानी हजारों युवाओं के लिए हमेशा मोटिवेशन बनी रहेगी.



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