Kannauj News: फूलों की खुशबू में छुपा है ‘सोना’, कम खर्च, ज्यादा मुनाफा…जानिए कैसे करें गुलाब की खेती
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Kannauj News: कन्नौज की मिट्टी और मौसम गुलाब की खेती के लिए बहुत अनुकूल हैं. कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, गुलाब की खेती कम लागत में अधिक मुनाफा देती है और किसान इसे स्थानीय उद्योगों से जोड़कर बेहतर लाभ उठा सकते हैं. साथ ही, राष्ट्रीय बागवानी मिशन जैसी सरकारी योजनाओं की मदद से किसानों को सब्सिडी भी मिलती है.
कृषि वैज्ञानिक किसानों को सलाह देते हैं कि गुलाब की खेती को स्थानीय उद्योगों से जोड़कर करें और सरकारी योजनाओं जैसे राष्ट्रीय बागवानी मिशन की सब्सिडी का लाभ जरूर लें. ऐसा करने से किसान पारंपरिक फसलों की तुलना में कई गुना ज्यादा आमदनी हासिल कर सकते हैं.
कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों के अनुसार, गुलाब की खेती के लिए दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त है. जुलाई से सितंबर के बीच पौधारोपण का सही समय होता है. देसी गुलाब, दमस गुलाब और जाफरानी किस्म यहां सबसे अच्छी पैदावार देती हैं. एक हेक्टेयर खेत में करीब 12 से 14 हजार पौधे लगाए जा सकते हैं. कन्नौज के किसान अगर गुलाब की खेती पर ज्यादा ध्यान देंगे तो उन्हें काफी अच्छा मुनाफा मिलेगा.
क्या बोले कृषि वैज्ञानिक
कृषि वैज्ञानिक कमलेश कुमार का कहना है कि पौधों में गोबर की खाद और थोड़ी रासायनिक खाद मिलाकर नियमित सिंचाई करने से 6-7 महीने बाद फूल आना शुरू हो जाते हैं. एक हेक्टेयर में औसतन 8 से 10 टन गुलाब की पंखुड़ियां मिलती हैं. इनका उपयोग गुलकंद, गुलाब जल, इत्र, सूखी पंखुड़ियां और औषधीय उत्पाद बनाने में होता है.
गुलाब की खेती में लागत करीब 60 से 70 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर आती है, जबकि शुद्ध लाभ ढाई से तीन लाख रुपए तक हो सकता है. अगर किसान फूल सीधे इत्र कंपनियों और प्रोसेसिंग यूनिट को बेचें तो और भी ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं.
राहुल गोयल सीनियर पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया 16 साल से ज्यादा का अनुभव है. साल 2011 में पत्रकारिता का सफर शुरू किया. नवभारत टाइम्स, वॉयस ऑफ लखनऊ, दैनिक भास्कर, पत्रिका जैसे संस्थानों में काम करने का अनुभव. सा…और पढ़ें
राहुल गोयल सीनियर पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया 16 साल से ज्यादा का अनुभव है. साल 2011 में पत्रकारिता का सफर शुरू किया. नवभारत टाइम्स, वॉयस ऑफ लखनऊ, दैनिक भास्कर, पत्रिका जैसे संस्थानों में काम करने का अनुभव. सा… और पढ़ें