Kanpur News : चीन वाले अपनी जेब में रखेंगे कनपुरिया पर्स, पहनेंगे हमारे जूते-चप्पल, जानें कैसे हुआ कमाल?
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Kanpur Leather New Markets : अमेरिका की ओर से भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने से कानपुर का चमड़ा उद्योग बुरी तरह चरमरा गया है. हजारों छोटे-बड़े कारोबारियों और कारीगरों की कमाई घट गई. उम्मीद की नई किरण चीन से आई है.
तीन माह में होगा शुरू
काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट के पास केंद्र सरकार का पत्र पहुंच गया है. इसके बाद निर्यातकों ने तैयारी शुरू कर दी है. उनका कहना है कि तीन माह के अंदर चीन को निर्यात शुरू कर दिया जाएगा. कानपुर के कारोबारी मानते हैं कि यह मौका उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं है, क्योंकि अमेरिका की सख्ती के बाद उन्हें नए बाजार की तलाश थी. चीन जैसे बड़े देश में सामान भेजने से कारोबार को नई ताकत मिलेगी. निर्यातक संगठन से जुड़े कारोबारी बताते हैं कि चीन में चमड़े के उत्पादों की बड़ी डिमांड है. वहां के लोग स्टाइलिश और मजबूत जूते-चप्पल, बेल्ट और पर्स काफी पसंद करते हैं. कानपुर का चमड़ा पहले से ही अपनी क्वालिटी के लिए मशहूर है. अगर चीन का बाजार खुल गया तो हजारों लोगों को रोजगार भी मिलेगा और उद्योग को नई रफ्तार भी. इससे कारोबारी अमेरिका पर निर्भर नहीं रहेंगे और उनका नुकसान भी कम होगा.
फायदा ही फायदा
कानपुर के वरिष्ठ निर्यातक और काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट के चेयरमैन आरके जालान ने लोकल 18 से विशेष बातचीत में कहा कि अमेरिका की वजह से पिछले कुछ समय से हमारे कारोबार पर बहुत असर पड़ा है. 50 प्रतिशत का टैरिफ लगने से हमारी प्रतिस्पर्धा कम हो गई थी. अब चीन का दरवाजा खुलना हमारे लिए बेहद महत्त्वपूर्ण है. इससे हमें बड़ा बाजार मिलेगा और निर्यात में फिर से तेजी आएगी. कानपुर के जूते, बेल्ट और पर्स चीन में अपनी अलग पहचान बना सकते हैं. विशेषज्ञ मानते हैं कि चीन को निर्यात शुरू होने से केवल बड़े कारोबारी ही नहीं, बल्कि छोटे कारीगर और मजदूर भी फायदा पाएंगे. जूते-चप्पल और बेल्ट बनाने वाले हजारों परिवारों की आय बढ़ेगी. नए ऑर्डर मिलने से फैक्ट्रियां पूरी क्षमता से चलेंगी और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे.
Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें
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