NEET UG 2026: मऊ के जैश वर्मा ने पहले अटेम्प्ट में रचा इतिहास, AIR 574 हासिल
Last Updated:
मऊ के सेक्रेड हार्ट स्कूल के छात्र जैश वर्मा ने NEET UG 2026 में पहले ही प्रयास में 668 अंक हासिल कर ऑल इंडिया रैंक 574 प्राप्त की. उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय नियमित 6 से 7 घंटे की पढ़ाई, परिवार और शिक्षकों के सहयोग तथा लगातार आत्मविश्वास बनाए रखने को दिया. अब उनका लक्ष्य MBBS के बाद MS कर न्यूरोलॉजी के क्षेत्र में डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा करना है.
राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा NEET (UG) का रिजल्ट घोषित हो गया है. इसमें मऊ के सेक्रेड हार्ट स्कूल के छात्र जैश वर्मा ने पहले ही प्रयास में परीक्षा पास कर शानदार सफलता हासिल की है. उन्होंने 668 अंक प्राप्त किए और ऑल इंडिया रैंक (AIR) 574 हासिल की. आइए जानते हैं कि पहले ही प्रयास में सफलता पाने वाले जैश वर्मा ने अपनी तैयारी और सफलता का क्या राज बताया.
शुरू से था डॉक्टर बनने का सपना
लोकल 18 से बातचीत में जैश वर्मा ने बताया कि उनकी शुरुआती पढ़ाई सेक्रेड हार्ट स्कूल से हुई और इंटरमीडिएट तक की शिक्षा भी उन्होंने वहीं से पूरी की. उन्होंने पहली बार NEET की परीक्षा दी और पहले ही प्रयास में 668 अंक हासिल कर ऑल इंडिया रैंक 574 प्राप्त की.
जैश ने बताया कि बचपन से ही उन्होंने देखा कि समाज में लोगों को अस्पतालों में बेहतर सुविधाएं नहीं मिल पातीं. तभी से उनका सपना डॉक्टर बनने का था. अब NEET क्वालिफाई करने के बाद वह MBBS करेंगे और इसके बाद एमएस (MS) की पढ़ाई करना चाहते हैं. उनकी रुचि न्यूरोलॉजी के क्षेत्र में काम करने की है और भविष्य में इसी क्षेत्र में बेहतर योगदान देना चाहते हैं.
रोज 6 से 7 घंटे की पढ़ाई से मिली सफलता
जैश ने बताया कि NEET की तैयारी के दौरान वह रोजाना 6 से 7 घंटे पढ़ाई करते थे. उनका कहना है कि इस सफलता के पीछे उनके शिक्षकों और पूरे परिवार का बड़ा योगदान है. जब भी उनका आत्मविश्वास कमजोर पड़ता था, परिवार के लोग उन्हें प्रेरित करते थे और कहते थे कि मेहनत जारी रखो, सफलता जरूर मिलेगी. इसी हौसले और लगातार मेहनत के दम पर उन्होंने पहले ही प्रयास में परीक्षा पास कर ली.
कम अंक आने पर नहीं हारी हिम्मत
उन्होंने बताया कि तैयारी के दौरान सबसे बड़ी चुनौती मॉक टेस्ट में कम अंक आना था. जब किसी टेस्ट में उम्मीद से कम नंबर आते थे, तो दोबारा उसी स्तर तक पहुंचना आसान नहीं होता था. लेकिन उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी, अपनी गलतियों पर काम किया और लगातार मेहनत करते रहे. यही निरंतर प्रयास उनकी सफलता की सबसे बड़ी वजह बना.
रेगुलर तैयारी बनी सफलता का कुंज
जैश ने बताया कि स्कूल में छुट्टियां मिल जाती थीं, लेकिन NEET की तैयारी के दौरान छुट्टी जैसा कोई विकल्प नहीं था. नियमित पढ़ाई करनी पड़ती थी, जिससे मानसिक दबाव भी रहता था. हालांकि परिवार और शिक्षकों के सहयोग से उन्होंने इस दबाव को संभाला और अपनी तैयारी जारी रखी.
उन्होंने कहा कि शुरुआत में उन्हें खुद भी भरोसा नहीं था कि वे पहले ही प्रयास में परीक्षा पास कर पाएंगे. लेकिन जब शुरुआती टेस्ट में अच्छे अंक आने लगे, तो उनका आत्मविश्वास बढ़ा. इसके बाद उन्होंने और अधिक मेहनत की, मोबाइल से दूरी बनाई, घर के अनावश्यक माहौल से खुद को अलग रखा और पूरी तरह पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित किया और आज यह सफलता हाथ लगी. अब आगे और मेहनत से पढ़ाई करनी है और डॉक्टर बन के लोगों की सेवा करनी है.
About the Author
विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें