नोएडा: दिल्ली से सटे हाईटेक शहर नोएडा मशहूर ऑटो पार्ट्स निर्माता कंपनी में शनिवार की शाम अचानक भीषण आग लग गई. आग लगने की यह घटना सेक्टर-59 स्थित ‘स्पार्क मिंडा’ की है. यहां आग इतनी भयावह थी कि उसकी लपटें और काले धुएं का गुबार आसमान में करीब 4 किलोमीटर दूर तक साफ दिखाई दे रहा था. जिस वक्त यह हादसा हुआ, उस समय कंपनी के भीतर करीब 500 से 600 कर्मचारी काम कर रहे थे. आग लगने के बाद पूरी फैक्ट्री में भगदड़ और अफरा-तफरी मच गई. सबसे ज्यादा चिंता की बात यह थी कि जिस बिल्डिंग में आग लगी, ठीक उसके सामने सड़क के उस पार एक पेट्रोल पंप भी स्थित है, जिससे बड़े हादसे का खतरा और ज्यादा बढ़ गया था. हालांकि, राहत की बात यह रही कि समय रहते सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया.
शाम को अचानक बजा फायर अलार्म, मच गई भगदड़
प्रत्यक्षदर्शियों और कंपनी के कर्मचारियों के मुताबिक, शनिवार शाम करीब साढ़े छह बजे कंपनी की बिल्डिंग में रोजाना की तरह काम चल रहा था. तभी अचानक फैक्ट्री परिसर में लगे फायर अलार्म जोर-जोर से बजने लगे. अलार्म की आवाज सुनते ही काम कर रहे कर्मचारियों के होश उड़ गए. जब तक कोई कुछ समझ पाता, तब तक ग्राउंड फ्लोर और फर्स्ट फ्लोर से आग की ऊंची लपटें उठने लगीं. फैक्ट्री के अंदर मौजूद 500-600 कर्मचारियों के बीच अपनी जान बचाने के लिए भगदड़ मच गई. लोग चिल्लाते हुए बाहर की तरफ भागने लगे. सुरक्षा गार्ड्स और स्थानीय लोगों ने तुरंत मुस्तैदी दिखाते हुए कर्मचारियों को बाहर निकालने में मदद की और मामले की जानकारी फायर ब्रिगेड और स्थानीय पुलिस को दी.
केमिकल और थिनर ने आग में डाला घी का काम
घटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्य अग्निशमन अधिकारी प्रदीप कुमार चौबे खुद पूरी टीम के साथ मौके पर पहुंचे. सीएफओ प्रदीप चौबे ने बताया कि आग कंपनी के ग्राउंड फ्लोर और फर्स्ट फ्लोर पर लगी थी. चूंकि इस कंपनी में गाड़ियों के टूल पार्ट्स बनाए जाते हैं, इसलिए यहां भारी मात्रा में केमिकल और थिनर का स्टॉक रखा हुआ था. थिनर और केमिकल जैसी ज्वलनशील चीजों के संपर्क में आते ही आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और देखते ही देखते पूरी बिल्डिंग को अपनी चपेट में ले लिया. केमिकल के जलने की वजह से आसमान में घना काला धुआं छा गया, जिससे पूरे सेक्टर में विजिबिलिटी (दृश्यता) बेहद कम हो गई और लोगों को सांस लेने में भी दिक्कत होने लगी.
शुरुआत में पहुंचीं 5 गाड़ियां, बिगड़े हालात तो बुलाई गईं 25 दमकलें
कंट्रोल रूम को सूचना मिलते ही शुरुआत में दमकल की 5 गाड़ियों को मौके पर रवाना किया गया था. लेकिन मौके पर पहुंचते ही दमकलकर्मियों ने देखा कि आग की लपटें बेकाबू हो चुकी हैं और केमिकल की वजह से लगातार फैल रही हैं. स्थिति की गंभीरता और सामने पेट्रोल पंप होने के खतरे को भांपते हुए तुरंत बैकअप मांगा गया. आग पर काबू पाने के लिए एक के बाद एक कुल 25 दमकल की गाड़ियों को काम पर लगाया गया. फायर विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, आग को पूरी तरह से दबाने और बुझाने के लिए ‘लेटेस्ट टेक्नोलॉजी’ और फोम टेंडर्स का इस्तेमाल किया गया. दमकलकर्मियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर फैक्ट्री के अंदर प्रवेश किया और आग को आगे बढ़ने से रोका.
दम घुटने से 5 कर्मचारियों की हालत बिगड़ी, कोई जनहानि नहीं
शुरुआती अफवाहों में यह आशंका जताई जा रही थी कि कंपनी के अंदर कई लोग फंसे हो सकते हैं. इस सूचना से प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए थे और युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया. लेकिन फायर विभाग के जवानों ने थर्मल इमेजिंग और आधुनिक उपकरणों की मदद से अंदर जाकर पूरी जांच की. सीएफओ प्रदीप चौबे ने स्पष्ट किया, ‘हमारी टीमों ने अंदर जाकर पूरी तरह छानबीन कर ली है. राहत की बात यह है कि अंदर कोई भी व्यक्ति फंसा हुआ नहीं है. शुरुआत में 5 कर्मचारी जरूर धुएं की चपेट में आ गए थे, जिससे दम घुटने के कारण उनकी हालत बिगड़ गई थी. उन्हें तुरंत मौके पर बुलाई गई एम्बुलेंस की मदद से अस्पताल भेजा गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई है. इस पूरे हादसे में किसी भी तरह की जनहानि नहीं हुई है.’
आसपास की कंपनियों में अलर्ट, पुलिस ने बनाया सुरक्षा घेरा
हादसे वाली जगह के ठीक सामने पेट्रोल पंप होने और आसपास कई अन्य औद्योगिक इकाइयां होने के कारण पुलिस और प्रशासन बेहद सतर्क नजर आया. एहतियात के तौर पर सेक्टर-59 की आसपास की सभी कंपनियों को तुरंत खाली करा लिया गया और वहां सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई. स्थानीय पुलिस बल ने मौके पर पहुंचकर चारों तरफ एक सुरक्षा घेरा बना दिया ताकि आम लोगों की भीड़ को रोका जा सके और दमकल की गाड़ियों को आने-जाने का रास्ता साफ मिल सके. जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी लगातार मौके पर डटे रहे और स्थिति की निगरानी करते रहे.
शॉर्ट सर्किट की आशंका, जांच के बाद साफ होगी तस्वीर
स्पार्क मिंडा कंपनी में लगी इस भीषण आग की वजह से करोड़ों रुपये के सामान और मशीनरी के जलकर खाक होने का अनुमान लगाया जा रहा है. हालांकि, अभी तक प्रशासन की ओर से नुकसान का कोई आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है. अधिकारियों का कहना है कि पहली प्राथमिकता आग को पूरी तरह से ठंडा करने की है, जिसके बाद ही नुकसान का सही आकलन किया जा सकेगा. वहीं अगर आग लगने के कारणों की बात करें, तो प्राथमिक जांच और अधिकारियों के शुरुआती अनुमान के मुताबिक, यह हादसा ‘शॉर्ट सर्किट’ या किसी तकनीकी खराबी के कारण हुआ हो सकता है. फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और दमकल विभाग का कूलिंग ऑपरेशन जारी है.