OPINION: योगी राज में हर रोज 5 एनकाउंटर, फिक्स होगी BJP की हैट्रिक!
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UP Elections 2027: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अब कुछ ही महीने बचे हैं. ऐसे में यूपी सरकार ने पिछले साढ़े नौ साल में हुए एनकाउंटर का डेटा जारी किया है. चुनाव से कुछ महीने पहले इस आंकड़े के सामने आने से इसपर राजनीतिक चर्चाएं होना लाजिमी है. कहा जा रहा है कि सीएम योगी आदित्यनाथ चुनाव से ठीक पहले क्लियर मैसेज देना चाहते हैं कि वह लॉ एंड ऑर्डर पर कोई कंप्रोमाइज करने वाले नहीं हैं. वहीं मुख्य विपक्षी समाजवादी पार्टी लगातार एनकाउंटर पर बुलडोजर कार्रवाई पर सवाल उठाता रहा है. आइए समझने की कोशिश करते हैं कि एनकाउंटर लिस्ट यूपी चुनाव में बीजेपी की जीत फिक्स करेगा या बैकफायर होगा.
उत्तर प्रदेश में साढ़े 9 साल में 17,043 एनकाउंटर हुए हैं.
लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अब कुछ महीने का वक्त बचा है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि सख्त लॉ एंड ऑर्डर को माना जाता है. चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में एनकाउंटर का आंकड़ा सामने आया है. इसमें साफ तौर से दिख रहा है कि 2017 में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के बाद से पूरे उत्तर प्रदेश में हर रोज कम से कम पांच एनकाउंटर हुए हैं. आंकड़ों में बताया गया है कि 2017 से अब तक उत्तर प्रदेश में 17,043 एनकाउंटर हुए हैं. यूपी पुलिस के आंकड़ों में बताया गया है कि एनकाउंटरों में 18 पुलिस वालों की मौत हुई 1,852 घायल हुए.
आइए पहले योगी राज के एनकाउंटरों की कुछ जरूरी बातें जानते हैं-:
- योगी राज में हुए एनकाउंटरों में 289 खूंखार अपराधी ढेर हुए और 11,834 अन्य घायल हुए.
- यूपी पुलिस ने पूरे यूपी में संगठित अपराध और गंभीर अपराधों से निपटने के लिए चलाए गए एक बड़े अभियानों में 34,253 गिरफ्तारियां भी की.
- यूपी पुलिस ने मेरठ जोन में सबसे ज्यादा 4,813 एनकाउंटर हुए, जिसमें 97 नामी बदमाश ढेर किए गए. 3,513 घायल हुए और 8,921 अरेस्ट हुए. इन ऑपरेशनों में 477 पुलिसकर्मी घायल हुए और दो पुलिसकर्मियों की ऑन ड्यूटी मौत हुई.
- एनकाउंटर करने में वाराणसी जोन दूसरे नंबर पर रहा. यहां 1,292 मुठभेड़ों में 29 अपराधियों को मार गिराया गया. वाराणसी जोन में 2,426 अपराधियों को गिरफ़्तार किया गया और 907 घायल हुए. इसके अलावा, 104 पुलिसकर्मी भी घायल हुए. वाराणसी कमिश्नरेट में 146 मुठभेड़ों में 8 मारे गए.
- आगरा जोन 2,494 मुठभेड़ों में 24 अपराधियों को मार गिराकर तीसरे स्थान पर रहा. आगरा जोन में 5,845 अपराधियों को गिरफ़्तार किया गया और 968 घायल हुए. सरकार ने बताया कि इन मुठभेड़ों में कुल 62 पुलिसकर्मी भी घायल हुए. वहीं आगरा कमिश्नरेट में 489 मुठभेड़ों में 10 मारे गए.
- एनकाउंटर के मामले में बरेली जोन चौथे नंबर पर रहा. यहां 2,222 मुठभेड़ों में 21 मारे गए.
- लखनऊ ज़ोन में 971 मुठभेड़ हुए जिसमें 20 मारे गए. वहीं लखनऊ कमिश्नरेट में 147 मुठभेड़ों में 12 मारे गए.
- गाज़ियाबाद कमिश्नरेट में 789 मुठभेड़ों में 18 मारे गए, जो सभी कमिश्नरेट में सबसे ज़्यादा है.
- कानपुर जोन में 791 मुठभेड़ों में 12 मारे गए. वहीं कानपुर कमिश्नरेट में 253 मुठभेड़ों में 4 मारे गए.
- प्रयागराज जोन में 643 मुठभेड़ों में 11 मारे गए. वहीं प्रयागराज कमिश्नरेट में 150 मुठभेड़ों में 6 मारे गए.
- गौतम बुद्ध नगर ज़ोन में 1,144 मुठभेड़ों में 9 मारे गए.
- सीएम योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद गोरखपुर जोन में 699 मुठभेड़ों में 8 मारे गए.
तमाम एनकाउंटर का पैटर्न एक जैसा
उत्तर प्रदेश में योगी राज में जितने भी एनकाउंटर हुए इनमें से अधिकतर गोलीबारी की घटनाओं का क्रम एक जैसा ही रहा. संदिग्धों ने पुलिस पर गोली चलाई, भागने की कोशिश की और जवाबी गोलीबारी में उनके पैर में गोली लगी.
यूपी में ताबड़तोड़ एनकाउंटर पर हाई कोर्ट कर चुका है कॉमेंट
जनवरी में, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा था कि उत्तर प्रदेश में ऐसी मुठभेड़ें एक आम बात बन गई हैं. इन्हें वरिष्ठ अधिकारियों को खुश करने या आरोपियों को सबक सिखाने के लिए अंजाम दिया जा रहा है. पैर में गोली लगने के बाद अरेस्ट किए गए तीन लोगों की ओर से दायर ज़मानत याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए, जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की बेंच ने कहा, ‘इस कोर्ट के सामने अक्सर ऐसे मामले आते हैं, जहां चोरी जैसे छोटे-मोटे अपराधों में भी पुलिस घटना को पुलिस मुठभेड़ बताकर अंधाधुंध गोलीबारी का सहारा लेती है.’
एनकाउंटर के राजनीतिक मायने क्या?
साल 2017 में उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री का पद संभालने के बाद से ही योगी आदित्यनाथ अपराधियों के प्रति सख्त रवैया अपनाए हुए हैं. वह खुले मंच से लगातार कहते देखे जाते हैं कि उनके राज में अपराधी या तो शांत हो जाएं या अंजाम भुगतने को हमेशा तैयार रहें. उनका मैसेज साफ होता है कि अपराधियों क साथ कोई मुरव्वत नहीं बरता जाएगा. विकास दुबे जैसे खूंखार अपराधी के एनकाउंटर के वक्त भी सीएम योगी ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि अगर कोई पुलिस प्रशासन को चुनौती देने की कोशिश करेगा तो उसका एक ही अंजाम होगा. उन्होंने अपराधियों का मनोबल तोड़ने के लिए उसके घरों पर बुलडोजर की कार्रवाई शुरू की.
लॉ एंड ऑर्डर के मुद्दे पर योगी आदित्यनाथ के इसी स्पष्ट स्टैंड का असर 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में दिख चुका है. मुख्य विपक्षी समाजवादी पार्टी ने जातीय गोलबंदी का जमकर प्रयास किया, लेकिन वह चुनाव में कुछ खास नहीं कर सके. वहीं योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में लगातार दूसरी बार बीजेपी की सरकार बनी. इस जीत के साथ ही देशभर में ब्रॉन्ड योगी जैसे शब्द प्रचलित हुए. आज आलम यह है कि देश के जिस भी बड़े राज्य में बीजेपी की सरकार बनती है तो एनकाउंटर और बुलडोजर की कार्रवाई जैसे प्रयोग होते हुए दिखते हैं.
योगी राज के एनकाउंटर का विरोध कर सवालों के घेरे में विपक्ष
योगी राज में एनकाउंटर और बुलडोजर कार्रवाई पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव लगातार सवाल उठाते रहते हैं. वह तमाम कार्रवाई को लेकर सोशल मीडिया से लेकर अपने बयानों में योगी राज को गुंडाराज तक बताते हैं. लेकिन उत्तर प्रदेश की पिछले साढ़े नौ साल की राजनीति को देखें तो अखिलेश यादव का यह दांव उल्टा ही पड़ता दिखता है. सीएम योगी आदित्यनाथ लगातार आरोप लगाते हैं कि अखिलेश यादव की पूर्व की सरकारों में अपराधियों और माफियाओं की खुली छूट थी. बहन बेटियां खुद को असुरक्षित फील करती थीं.
वहीं कारोबारियों के मन में हमेशा उगाही का खौफ होता था. पूरे प्रदेश में यूपी पुलिस का इकबाल खत्म हो गया था. योगी दावा करते रहे हैं कि उनकी सरकार की तरफ से हुई कार्रवाइयों के बाद हालात सुधरे हैं. ऐसे में राजनीतिक रूप से देखें तो एनकाउंटर और बुलडोजर कार्रवाई पर सवाल उठाकर अखिलेश यादव खुद सवालों के घेरे में दिखते हैं. उत्तर प्रदेश की जनता उन्हें शक की निगाहों से देखती है. नैरेटिव यही है कि अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई का अखिलेश यादव विरोध क्यों कर रहे हैं. लोगों के मन में और खासकर महिलाएं जात-धर्म के ऊपर उठकर सीएम योगी के साथ खड़ी दिखती हैं. उन्हें लगता है कि योगी राज में कम कम अपराधी खौफ में हैं.
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अभिषेक कुमार News18 की डिजिटल टीम में बतौर एसोसिएट एडिटर काम कर रहे हैं. वे यहां बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तसीगढ़, उत्तराखंड की राजनीति, क्राइम समेत तमाम समसामयिक मुद्दों पर लिखते …और पढ़ें