UP के 18 शहरों में दौड़ेंगी 1725 नई AC इलेक्ट्रिक बसें, अपने काम की खबर पढ़ें
लखनऊ/नोएडा : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई यूपी कैबिनेट बैठक में आम जनता की रोजमर्रा की जिंदगी और जेब को सीधी राहत देने वाला बेहद बड़ा फैसला लिया गया है. सरकार ने यूपी के 17 नगर निगमों और नोएडा-ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम को पूरी तरह बदलने के लिए 1725 नई AC इलेक्ट्रिक बसें चलाने की मंजूरी दे दी है. कैबिनेट बैठक के बाद प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि मंत्रियों की परिषद ने कुल 24 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को हरी झंडी दी है. इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा नोएडा, गाजियाबाद जैसे महानगरों और दिल्ली-एनसीआर के कामकाजी लोगों को मिलने जा रहा है.
जेवर एयरपोर्ट जाने वालों की होगी मोटी बचत
यूपी कैबिनेट की यह बैठक और फैसला नोएडा और ग्रेटर नोएडा के निवासियों के लिए सबसे बड़ी खुशखबरी यह है कि इन नई इलेक्ट्रिक बसों के रूट को इस तरह डिजाइन किया गया है कि ये जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Noida International Airport) को सीधे कनेक्ट करेंगी. अभी तक नोएडा, एक्सप्रेस-वे के सेक्टरों या ग्रेटर नोएडा से दिल्ली या जेवर की तरफ जाने के लिए लोगों को महंगे प्राइवेट ऑटो या कैब पर निर्भर रहना पड़ता था. इसमें एक तरफ का किराया ही 800 से 1500 रुपये तक आ जाता है. इन सरकारी AC बसों के शुरू होने से आम आदमी महज कुछ रुपयों के टिकट में आरामदायक सफर करके सीधे जेवर एयरपोर्ट के टर्मिनल तक पहुंच सकेंगे.
किस शहर को मिलेंगी कितनी बसें?
- लखनऊ – 300 नई AC इलेक्ट्रिक बसें
- कानपुर – 300 नई AC इलेक्ट्रिक बसें
- आगरा – 100 नई AC इलेक्ट्रिक बसें
- मेरठ – 100 नई AC इलेक्ट्रिक बसें
- नोएडा, गाजियाबाद और अन्य शहरों में बची हुई बसें आबादी और जरूरत के हिसाब से रूटों पर उतारी जाएंगी.
क्या है GCC मॉडल, जिससे जनता को होगा फायदा?
दरअसल, सरकार इन बसों को ग्रॉस कास्ट कॉन्ट्रैक्ट यानि GCC मॉडल पर चलाने जा रही है. इसके लिए एक डेडिकेटेड संचालन कंपनी भी बना दी गई है. GCC मॉडल का सीधा फायदा यह है कि बसों के रखरखाव, चार्जिंग और ड्राइवरों का जिम्मा प्राइवेट कंपनियों का होगा, लेकिन बसों का रूट, समय और सबसे जरूरी किराया सरकार तय करेगी. इससे बसों की कंडीशन हमेशा अच्छी रहेगी. ये समय पर मिलेंगी और कोई भी कंपनी मनमाना किराया नहीं वसूल पाएगी.
इन 18 शहरों में शुरू हो रही है सेवा
नोएडा और जेवर के अलावा यूपी के जिन शहरों में ये बसें चलेंगी, वे हैं… आगरा, अलीगढ़, अयोध्या, बरेली, फिरोजाबाद, गाजियाबाद, गोरखपुर, झांसी, कानपुर, लखनऊ, मथुरागमन-वृंदावन, मेरठ, मुरादाबाद, प्रयागराज, शाहजहांपुर, सहारनपुर और वाराणसी.
सरकार की इस बस योजना से आम आदमी को क्या सीधा फायदा है?
इससे अब शहर के भीतर या नजदीकी इलाकों में जाने के लिए महंगे ऑटो या कैब पर पैसे खर्च नहीं करने होंगे. आपको बहुत ही कम सरकारी किराए में प्रदूषण-मुक्त, साफ-सुथरी और ठंडी AC बसों में सफर करने को मिलेगा.
क्या यह बसें जेवर एयरपोर्ट के अंदर तक जाएंगी?
कैबिनेट के फैसले के मुताबिक, इन बसों के रूट में जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Noida International Airport) को मुख्य रूप से कवर किया गया है. नोएडा-ग्रेटर नोएडा के अलग-अलग सेक्टरों से यह बसें सीधे एयरपोर्ट पैसेंजर्स को लेकर जाएंगी.
दिल्ली-एनसीआर के किन शहरों को इस योजना में शामिल किया गया है?
दिल्ली-एनसीआर के तहत उत्तर प्रदेश के नोएडा (ग्रेटर नोएडा सहित) और गाजियाबाद को इस योजना में शामिल किया गया है, ताकि यहां की बड़ी कामकाजी आबादी को इसका लाभ मिल सके.
बसों का किराया कौन तय करेगा, क्या ये प्राइवेट बसों की तरह महंगी होंगी?
नहीं, ये महंगी नहीं होंगी. भले ही ये बसें कांट्रैक्ट (GCC मॉडल) पर चलेंगी, लेकिन इनका किराया पूरी तरह से उत्तर प्रदेश सरकार तय करेगी, जो आम आदमी के बजट के किफायती होगा.
ये बसें कब से सड़कों पर दिखने लगेंगी और इनका मैनेजमेंट कौन देखेगा?
कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद बसों की खरीद और रूट तय करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है. इन बसों के सुचारू संचालन के लिए सरकार ने एक विशेष मैनेजमेंट कंपनी का गठन किया है, जो जल्द ही इन बसों को सड़कों पर उतारेगी.