Waqf Board- आखिर क्या है वक्फ बोर्ड।क्यूं मचा है देश भर में हाहाकार।
वक्फ बोर्ड क्या है यह कैसे बना
दुनिया में दान की अवधारणा प्राचीन काल से विभिन्न धर्म में चली जा रही है जैसे भागवत गीता के अध्याय 17 के श्लोक व 20 में 21 में पूर्ण ज्ञान राजस्व ज्ञान के बारे में बताया गया है इसी प्रकार इस्लाम में दान को जकात और सदका बोला गया है कुरान शरीफ के अध्याय 2 सूरा अल्लाह बकरा की आयत 215 में इस बारे में बात की गई है सुरह अल इमर की आयत 134 में दान के बारे में उल्लेख किया गया है या सारी चीज वक्फ प्राणी में जुड़ा हुआ है इस्लाम में चैरिटी के साथ-साथ एक और बात का उल्लेख किया गया है जिसके बारे में बहुत बात की गई है जो की निरंतर दान इस्लाम में इस सदका ए जारिया कहा जाता है हजरत अबू कुश की हदीद नंबर 1631 में निरंतर दर अर्थात सदका ए जरिया के बारे में बताया गया है अल्लाह के और ले जाने वाले मार्ग में किया गया दानजी दान का फायदा लोग उसे आदमी के मरने के बाद भी मिलता रहता है यह कभी नहीं रुकता इसलिए जिस व्यक्ति के निदान किया है उसके मरने के बाद भी उसका फल मिलना चाहिए रुकना नहीं चाहिए और इसी अवधारणा को सदका के जरिया भी कहा जाता है या जो वक्फ बोर्ड है या पूरी अवधारणा इसी सतत दान यानी सदका के जरिया पर आधारित है अन्यथा कुरान शरीफ में कहीं भी वक्फ शब्द का सीधे तौर पर उल्लेख नहीं किया गया है वक्फ बोर्ड वक्फ संपत्ति का प्रबंध करने वाला कानूनी निकाय है वक्फ बोर्ड मुस्लिम समाज की जमीनों पर नियंत्रण रखता है।
( वक्फ बोर्ड से जुड़ी खास बातें )
वक्फ बोर्ड अरबी भाषा शब्द वकूफा से बना है जिसका अर्थ है तैरना यानी कि रुकना
वक्फ का नाम होता है अल्लाह के नाम अल्लाह के नाम हो जय गई जमीन
वक्फ बोर्ड इस्लाम धर्म को मानने वाले लोग जो संपत्ति जमीन जायदाद दान करते हैं उसे वक्फ कहा जाता है
वक्फ बोर्ड दान मिली हुई जमीनों का इस्तेमाल इस प्रकार करता है जैसे की मस्जिद मदरसा कब्रिस्तान ईदगाह और मजार जैसी धार्मिक संपत्ति बनावत है और जमीन का प्रबंध करता है
वक्फ बोर्ड गरीब और जरूरतमंदों की मदद भी करता है
कैसे:= 1. वक्फ निशुल्क गरीबों के लिए पढ़ने के लिए स्कूल बनावत है
2. वक्फ शिक्षा का व्यवस्था करता है
3. वक्फने शुल्क कब्रिस्तान बनावत और धार्मिक स्थान बनावत है
देश में कई तरह के वक्फ बोर्ड होते हैं जिसमें से दो है सुन्नी वक्फ बोर्ड सिया वक्फ बोर्ड
जो अब लोग रहते थे जो अरबी बोलते थे तो अरबी में एक शब्द है वाकुफा जिसे अवकफ भी कहा जाता है इसका अर्थ होता है किसी चीज को रोक देना पकड़ना या बांधना तो इस समय लोग क्षेत्र को जमीन जो रोक रहे थे अल्लाह के नाम कर रहे थे तो लोकल के लोग इसे कहने लगे सामान बातचीत में की इस जमीन को वक्त कर दी इसी तरह वक्फ नाम का उत्पन्न हुआ ।
***सदका ए जरिया क्या हैं ***
सदका ए जरिया का मतलब है निरंतर चलने वाला दान जो कभी रुके नहीं या इस्लाम में किए जाने वाले उन कार्यों में से एक है जिसमें आज और परलोक में सब सवाब है या एक दीर्घकालिक और निरंतर सवाब है
( सदका ए जरिया के कुछ उदाहरण )
1.जैसे पेड़ लगाना
2.पानी का कुआं बनवाना
3.मस्जिद बनवाना
4.अस्पताल बनवाना
5.मानसिंह स्वास्थ्य क्लिनिक बनवाना
6.अनाथ बच्चों को शिक्षा देना
7.गरीब और विस्थापित परिवारों को आजीविका प्रशिक्षण देना ।
( सदका ए जरिया से कुछ जुड़ी बातें )
सदका ए जरिया इस्लाम में आस्था का एक अनिवार्य सिद्धांत है सदका ए जरिया करने से अल्लाह से निकटता मिलती है कई लोग अपने मृतक परिजनों की ओर से सदका ए जरिया देते हैं सदका ए जरिया का अर्थ है निरंतर दान करना ।
वक्त बोर्ड में कुल कितनी जमीन शामिल है
वक्फ बोर्ड का वर्तमान संपत्ति का उल्लेख नहीं है वह के पास सितंबर 2024 के मुताबिक भारत में करीब 8.7 लाख संपत्तियां थी इन सब संपत्तियों का क्षेत्रफल करीब 9.4 लाख एकड़ था वक्फ बोर्ड की संपत्तियों का अनुमानित मूल्य 1.2 लाख करोड रुपए था वक्फ बोर्ड भारत देश का सबसे बड़ा भूमि स्वामी है वक्फ बोर्ड के पास रेलवे और सशस्त्र बलों के बाद सबसे ज्यादा जमीन संपत्ति है वक्फ बोर्ड के पास सबसे ज्यादातर जमीन उत्तर प्रदेश में है वक्फ बोर्ड के पास संपत्तियां मस्जिद मदरसा कब्रिस्तान ईदगाह और मजार वगैरह में है ।
खलीफा अबि सुफियान का क्या मानना था
अभी सुफियान की पहली प्राथमिकता किसी भी तरह आ संगठित निरंतर दान की इस अवधारणा को एक औपचारिक संगठित संरचना प्रदान करना था ताकि मुसलमान को सदका ए जरिया के बारे में कोई ब्रह्म ना रहे तो उस समय क्या था कि फारस या मिस्र का मॉडल पहले से चला आ रहा था उसे आधार बनाकर इस जैसी व्यवस्था विकसित की गई और उसे समय तक वक्फ शब्द भी काफी प्रसिद्ध हो चुका था तो इस पूरी व्यवस्था को वक्फ व्यवस्था वक्फ सिस्टम नाम दिया गया और यह वक्फ व्यवस्था पूरी मानवता के लिए बनाई गई सिर्फ मुसलमान के लिए नहीं लेकिन आगे चलकर यह बदलाव हो गया तो इस पूरी वक्फ प्रणाली को खलीफा अभी सुफियान द्वारा विकसित किया गया था इन्होंने यह किया वक्त के प्रति को लेकर।
अबी सुफियान के कुछ समय बाद जब अब्बू सुफियान जब सत्ता में आए तब क्या हुआ
उन्होंने वक्फ प्रणाली के कानून को परिभाषित किया जिसका पालन हर मुसलमान को दान करते समय करना होगा इसलिए सबसे पहले उन्होंने उसे समय वक्फ की गई संपत्तियों का आधिकारिक रिकॉर्ड बनाना शुरू किया और जब सभी रिकॉर्ड बन गए तो उन्होंने हर क्षेत्र में वक्फ प्रशासन का एक गठन किया उन्हें मतवाली भी कहा जाता है वास्तव में आज भी भारत में वक्त संपत्ति का प्रबंध मतवाली द्वारा किया जाता है इसलिए मतवालियों ने एक क्षेत्र में वक्फ संपत्तियों का रखरखाव शुरू कर दिया रिकॉर्ड बनाए और जो आए हुई उसका रिकॉर्ड बनाया इसके बाद उन्होंने वक्फ सेंट्रल रजिस्ट्री बनाई जिसमें जो संपत्ति वक्फ के अधीन है उसे संपत्ति का मालिक कौन है किस उद्देश्य से दान किया गया है संपत्ति सब कुछ वक्फ केंद्र रजिस्ट्री में रख दिया गया अतः इसे इसकी संरचना की गई तथा इसके नियमों को सभी को स्पष्ट रूप से समझाया गया सबसे पहले जब एक बार कोई संपत्ति वक्त के अधीन हो जाती है तो अल्लाह का उसे पर स्थाई साबित हो जाता है और किसी भी स्थिति में इसका स्वामित्व बदल नहीं सकता जिसने उसे व्यक्ति उसे वक्फ संपत्ति को वक्फ किया है अर्थात दान किया है यदि वह वापस उसका मालिक भी बनना चाहे तो नहीं बन सकता वास्तव में भारत के सुप्रीम कोर्ट में कहा गया है कि एक बार वक्फ हमेशा वक्फ बाद में भ्रम ना हो इसलिए बताया गया कि वक्फ का उपयोग कहां-कहां हो सकता है अगर चाहे तो कोई हिंदू भी अपनी संपत्ति वक्फ कर सकता है । लेकिन उसे पर हिंदू मंदिर चर्च नहीं बन सकता अबू सुफियान ने कुछ इस प्रकार नियमों का बदलाव करा था ।
वक्फ कई प्रकार के होते हैं
1. धार्मिक वक्फ इसका उपयोग धार्मिक चीजों के लिए जैसे मदरसा या फिर मस्जिद के प्रयोग में लिया जाएगा
2. पारिवारिक वक्फ इस वक्त अल औलाद के नाम से की जाने वाली है इसका प्रयोग जैसे वक्फ की गई संपत्ति से कोई आए इनकम बनी है वह उसके परिवार वाले को मिल सकेगी
3. धर्मार्थ वक्फ इसका उद्देश्य सामाजिक कल्याण प्रदान करने के लिए है जैसे अस्पताल भजन विवरण अस्पताल में भोजन का विवरण करना
4. सार्वजनिक अवसरों वक्फ इसका उद्देश्य सार्वजनिक उपयोग के लिए है जैसे सड़क पुल बनवाना
5. शैक्षिक वक्फइसका उद्देश्य ज्ञान की बढ़ावा देने के लिए स्कूल पुस्तकालय छात्रवृत्ति
ऐसे ही कई प्रकार के वक्फ बनाए गए हैं जिनमें से कुछ यह भी है
भारत में सबसे प्रथम वक्फ की गई जमीन कौन सी थी
जब सभी नियम परिभाषित हो गए और वक्फ का एक उचित प्रणाली बनाई गई तो इसके उपयोग अरबी द्वारा बहुत किया गया था और भविष्य में जब ऑटोनोम साम्राज्य की स्थापना हुई वह सब का जब ढांचा तैयार हुआ तब पहली लिखित अभिलेख 912 ई का मिला जिसमें फिलिस्तीन के रामल्लाह शहर के निवासी फाइल अल हाडिन ने एक विश्रामगृह को वक्फ किया था जिसकी मूल्य शर्तें एक पत्थर की पटिया मेंलिखी गई थी ।
सन 1954 में क्या नियम लागू हुआ
भारतीय सरकार ने 21 मई 1954 को वक्फ एक्ट 1954 लागू किया गया जिसे जम्मू और कश्मीर बंगाल यूपी महाराष्ट्र और गुजरात के कुछ क्षेत्रों को छोड़कर पूरे भारत में लागू किया गया इसलिए सरकार द्वारा वक्फ एक्ट 1954 लागू किया गया यह मूलतः वक्फ के संबंध में अंग्रेजों द्वारा बनाई गई कानूनी प्राणी पर आधारित था यह मॉडल भी इसी पर आधारित थी वक्फ कमेटी वक्फ बोर्ड वक्फ फंड सभी मॉडल एक जैसे थे इनमें कई बार नियम बनाए गए थे इनमें बताया गया कि हर राज्य का अपना अपना वक्फ होगा गुजरात मे गुजरात वक्फ बोर्ड वैसे ही उत्तर प्रदेश में उत्तर प्रदेश का वक्फ बोर्ड बनाया जाएगा अलग-अलग क्षेत्र के अलग-अलग राज्य के अलग-अलग वक्फ बोर्ड होंगे । यही कुछ नियम 1954 में बनाए गए थे ।
वक्फ की ज्यादातर जमीन कहां है
देश में सबसे ज्यादा वक्फ की जमीन उत्तर प्रदेश में है वक्फ बोर्ड के पास सबसे ज्यादा संपत्ति उत्तर प्रदेश में है वहीं पश्चिम बंगाल में वक्फ की संपत्तियां दूसरे नंबर पर आती है
( वक्फ की जमीन कहां-कहां पर है सबसे अधिक )
1. उत्तर प्रदेश में पहले नंबर पर आता है
2.पश्चिम बंगाल दूसरे नंबर पर आता है
3.पंजाब तीसरे नंबर पर आता है
4.तमिलनाडु चौथे नंबर पर आता है
5.कर्नाटक पांचवें नंबर पर आता है
उत्तर प्रदेश में सुन्नी वक्फ और सिया वक्फ मिलाकर कुल
2, 32,000 से ज्यादा संपत्ति है
आखिर अंतिम में सन 2024 में सरकार ने क्या वक्फ पर निष्कर्ष निकाला
आखिर में 8 अगस्त 2024 को नया वक्फ बिल लाया है इसलिए सरकार द्वारा जो बिल लाया गया है उन्होंने इसमें कई चीज बदल दी है यही वजह है कि इन्हे लेकर काफी विवाद शुरू हो गया है । सबसे पहले जो व्यक्ति काम से कम पिछले 5 वर्षों से इस्लाम का पालन कर रहा है केवल वही अपने संपत्ति को वक्फ कर सकेगा वक्फ यूजर जो पहले बताया था उसे हटा दिया गया है अब सरकार ने जिला कलेक्टर की जगह सर्वे कमिश्नर जो सर्वे करते थे वही सर्वे करेंगे और वह रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजेंगे वक्फ बोर्ड और वक्फ संपत्ति के बजाय जिसका विवाद सरकार के बीच है और वक्फ बोर्ड जब तक इस पर कोई निर्णय नहीं हो जाता तब तक वह संपत्ति सरकार की रहेगी इस अधिनियम में या अभी कहा गया है कि किसी भी वक्फ संपत्ति को वंजीकृत करने के लिए राजस्व रिकॉर्ड में कलेक्टर की अनुमति दर्शी जाएगी इसके बाद इसके बिल में कहा गया है कि अब से वक्फ में काम से कम दो गैर मुस्लिम होने चाहिए और साथ में दो मुस्लिम महिलाएं ही अनिवार्य रूप से उपस्थिति होनी चाहिए और वक्फ बोर्ड में मुस्लिम कानून विशेषज्ञ मौजूद होने चाहिए
राज्य सरकार के बजाय अधिकारी मौजूद रहेंगे और वक्फ के बिल का सरकारी सीएजी द्वारा किया जाएगा और संपत्ति के मामले में सभी मुख्य निर्णय कलेक्टर द्वारा लिए जाएंगे। तो इसके कारण एक तरफ से वक्त न्यायाधिकरण का प्रभाव भी काम हो गया और पहले राज्य में दो वक्फ बोर्ड थे शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड अब इसमें आगाकनी और बोहर वक्फ बोर्ड भी जोड़े जाएंगे वक्फ अधिनियम की धारा 107 को हटा दिया गया है जिसके कारण वक्फ अब परिसीमा अधिनियम के अधीन आ गया है और अब केवल लिखित वक्फ ही माना जाएगा इससे पहले जो मौखिक वक्फ किया जाता था उसे नहीं माना जाएगा अब 2024 में ले जाने वाले वक्फ बिल का विरोध हो रहा है भारत में मुस्लिम समुदाय को वर्तमान सरकार के नए वक्फ अधिनियम पर भरोसा नहीं है दूसरा यदि आप वक्फ अधिनियम को देख देखें तो संपूर्ण वक्फ प्राणी सरकार के अधीन है मुस्लिम प्राधिकरण से अब इस संबंध में भविष्य में क्या होगा यह तो आने वाले महीने में पता चलेगा लेकिन सरकार के लिए या आसान नहीं होगा इतना बड़ा परिवर्तन लाने के लिए सरकार के लिए भी आसान नहीं होगा ।
( यही कुछ निष्कर्ष सरकार ने 2024 में निकला )