अयोध्या में विराजे ‘गोरे राम’, सरयू तट का रहस्यमयी मंदिर,जहां जीवित है त्रेता युग की आस्था
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अयोध्या के सरयू तट पर स्थित गोरे राम मंदिर अपनी अनोखी मान्यता और इतिहास के लिए प्रसिद्ध है. कहा जाता है कि इसका संबंध त्रेता युग की स्मृतियों से जुड़ा है, जबकि वर्तमान स्वरूप 1867 में राजा जाटर द्वारा बनवाया गया. भगवान राम की गोरी मूर्ति के कारण इसे “गोरे राम मंदिर” कहा गया। यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करती है, जिससे यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र बना हुआ है.
अयोध्या. मंदिर, आस्था और सनातन परंपराओं की नगरी अयोध्या आज भी अपने भीतर इतिहास और त्रेता युग की अनगिनत धरोहरों को समेटे हुए है. सप्तपुरियों में प्रमुख स्थान रखने वाली यह पवित्र नगरी भगवान श्रीराम की जन्मभूमि होने के साथ-साथ सैकड़ों प्राचीन मंदिरों और मठों का केंद्र है. यहां के हर मंदिर में प्रभु श्रीराम और माता जानकी की भक्ति का विशेष महत्व है, जो इस नगरी को अद्वितीय बनाता है. ऐसे ही मठ मंदिर के बारे में आज हम आपको बताएंगे जो त्रेता युगीन है, हम बात कर रहे हैं सरयू तट पर स्थित गोरे राम मंदिर की जिसका निर्माण सैकड़ो वर्ष पुराना बताया जाता है .
अयोध्या में कई रंगों में है राम
इतना ही नहीं अयोध्या में अगर आप परिवार के साथ दर्शन पूजन करने आ रहे हैं, तो अयोध्या में कई रंगों में राम के दर्शन आपको होंगे. कहीं काले रंग में भगवान राम के दर्शन होंगे तो कहीं गोरे राम तो कहीं लाल साहब दरबार के रूप में राम तो कहीं बालक राम के रूप में अयोध्या के मठ मंदिरों में भगवान दर्शन देते हैं. हर मठ मंदिर की अपनी अलग परंपरा अलग मान्यता होती है. इसी में से एक मंदिर गोरे राम मंदिर भी है, जिसका रहस्य भी अद्भुत और अलौकिक है.
इस वजह से मंदिर का नाम पड़ा गोरे राम
सरयू तट के समीप स्थित गोरे राम मंदिर है यह मंदिर न केवल अपनी आस्था के लिए प्रसिद्ध है बल्कि इसके पीछे जुड़ा इतिहास भी बेहद रोचक और विशेष है. मान्यता है कि इस मंदिर का संबंध त्रेता युग की स्मृतियों से जुड़ा हुआ है, जो इसे और भी पवित्र बना देता है. गोरे राम मंदिर का वर्तमान स्वरूप वर्ष 1867 ईस्वी में तैयार किया गया था. इस मंदिर का निर्माण राजा जाटर द्वारा कराया गया था. मंदिर के नाम को लेकर एक खास कथा प्रचलित है, कहा जाता है कि जब राजा ने भगवान राम की मूर्ति के दर्शन किए, तो उनके मुख से सहज ही निकला हमारे राम बहुत ही गोरे हैं बस इसी भाव से प्रेरित होकर इस मंदिर का नाम “गोरे राम मंदिर” पड़ गया.
अद्भुत है मान्यता
सरयू नदी के शांत किनारे स्थित यह मंदिर भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है, यहां आने वाले श्रद्धालु न केवल पूजा-अर्चना करते हैं. बल्कि मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का भी अनुभव करते हैं. मंदिर के पुजारियों के अनुसार सच्चे मन से की गई प्रार्थना यहां अवश्य फल देती है. भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है. अयोध्या को सदियों से मोक्षदायिनी नगरी माना गया है, जहां आस्था और विश्वास का अद्भुत संगम देखने को मिलता है. गोरे राम मंदिर इसी आस्था का एक जीवंत उदाहरण है. जो आज भी श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है और उन्हें भगवान श्रीराम की भक्ति में लीन कर देता है.
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नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें