इस एक्सप्रेसवे के शुरू होते ही बदलने लगी यूपी की तस्वीर, इन इलाकों में आया प्रॉपर्टी बूम
हाल ही में उत्तर प्रदेश को एक और विश्वस्तरीय सड़क परियोजना की सौगात मिली है.63 किलोमीटर लंबा लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे करीब 4,700 करोड़ रुपये की लागत से बनकर तैयार हुआ है. इस छह-लेन के एक्सप्रेसवे को भविष्य में आठ लेन तक बढ़ाया जा सकता है. हालांकि फिलहाल इसके शुरू होने से लखनऊ और कानपुर के बीच का सफर बेहद आसान हो गया है. अब यात्रियों को पहले की तरह ढाई से तीन घंटे का लंबा समय नहीं बिताना पड़ेगा, बल्कि वे सिर्फ 35 से 45 मिनट में अपनी यात्रा पूरी कर सकेंगे. लखनऊ के शहीद पथ को कानपुर के चकेरी से जोड़ने वाला यह एक्सप्रेसवे दोनों बड़े शहरों के बीच न सिर्फ समय बचाएगा, बल्कि बेहद तेज, सुरक्षित और सुगम सफर भी सुनिश्चित करेगा.
इस एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी और खास बात यह है कि इसे देश का पहला बैरियर-लेस एक्सप्रेसवे माना जा रहा है. इसका मतलब है कि यहां पारंपरिक टोल बैरियर नहीं होंगे, जिससे वाहनों को टोल टैक्स देने के लिए लाइनों में लगकर रुकना नहीं पड़ेगा. पूरे एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा और ट्रैफिक मैनेजमेंट को पुख्ता करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित कैमरे, इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS), स्पीड मॉनिटरिंग और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) जैसी अत्याधुनिक तकनीकें लगाई गई हैं, जो सड़क सुरक्षा को एक नए स्तर पर ले जाएंगी. इस सफर में लगने वाले कम समय, ईंधन (फ्यूल) की भारी बचत और शानदार ड्राइविंग अनुभव को देखते हुए यह आम यात्रियों और व्यावसायिक वाहनों दोनों के लिए बहुत फायदेमंद साबित होने वाला है.
आ गया इंफ्रास्ट्रक्चर बूम, बदला यूपी का नक्शा
यह लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे केवल दो शहरों के बीच की दूरी को कम करने वाला प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि यह बदलते उत्तर प्रदेश में तेजी से हो रहे चौतरफा इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की एक और बड़ी मिसाल है. राज्य में कनेक्टिविटी के इस जाल को गंगा एक्सप्रेसवे और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे जैसी विशाल परियोजनाओं से जबरदस्त मजबूती मिली है. दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे ने जहां पश्चिमी उत्तर प्रदेश को देश की राजधानी के बेहद करीब ला दिया है, वहीं निर्माणाधीन गंगा एक्सप्रेसवे राज्य के पूर्वी और पश्चिमी कोनों को आपस में जोड़कर विकास की एक नई इबारत लिख रहा है. पिछले कुछ वर्षों में राज्य के भीतर एक्सप्रेसवे, डिफेंस कॉरिडोर, नए एयरपोर्ट, मेट्रो और बड़ी औद्योगिक परियोजनाओं पर जिस रफ्तार से काम हुआ है, उसने उत्तर प्रदेश को देश-विदेश के बड़े निवेशकों की पहली पसंद बना दिया है.
गाजियाबाद, नोएडा, मेरठ रियल एस्टेट में तेजी से बदलाव
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इस शानदार कनेक्टिविटी का सीधा और बड़ा असर पूरे राज्य के रियल एस्टेट सेक्टर पर बहुत गहराई से देखने को मिल रहा है. विशेष रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख हब जैसे गाजियाबाद, नोएडा और मेरठ में आवासीय (रेजिडेंशियल) और कमर्शियल संपत्तियों की मांग में अभूतपूर्व उछाल आया है. दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के चलते मेरठ अब दिल्ली-एनसीआर का एक प्रमुख एक्सटेंशन बन चुका है, जिससे वहां प्रीमियम हाउसिंग और टाउनशिप की बाढ़ आ गई है. वहीं, गाजियाबाद और नोएडा अपने सुदृढ़ इंफ्रास्ट्रक्चर के दम पर मिड-सेगमेंट से लेकर अल्ट्रा-लग्जरी हाउसिंग के सबसे बड़े केंद्र बनकर उभरे हैं. केवल पश्चिमी यूपी ही नहीं, बल्कि पूर्वांचल और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के प्रभाव से अब उत्तर प्रदेश के हर छोटे-बड़े क्षेत्र में जमीनों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी (कैपिटल एप्रिसिएशन) देखी जा रही है और नए निवेश के ऐतिहासिक रास्ते खुल रहे हैं.
रोहित किशोर, सीईओ, हीरो रियल्टी कहते है, “लखनऊ–कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन क्षेत्र के विकास और कनेक्टिविटी को नई गति देने वाला महत्वपूर्ण कदम है. बेहतर बुनियादी ढांचा हमेशा से शहरों के विकास का प्रमुख आधार रहा है, और मजबूत कनेक्टिविटी वाले क्षेत्र भविष्य के आधुनिक आवासीय समुदायों के लिए सबसे पसंदीदा विकल्प बनकर उभरते हैं. एयरपोर्ट के निकट स्थित होने और कानपुर तक बेहतर पहुंच मिलने के कारण बंथरा रेसिडेंशियल विकास के लिए एक उभरता हुआ और संभावनाओं से भरपूर क्षेत्र बन रहा है. हमारा मानना है कि लखनऊ अब विकास के एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है, जहां विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे और गुणवत्तापूर्ण शहरी नियोजन के साथ संतुलित एवं टिकाऊ शहरी विकास को नई दिशा मिलेगी.”
वहीं कार्यन ग्रुप के निदेशक अमित अग्रवाल का कहना है कि दो प्रमुख शहरी और औद्योगिक केंद्रों के बीच यात्रा समय को लगभग एक घंटे तक सीमित करने वाला यह एक्सप्रेसवे लोगों, व्यवसायों और वस्तुओं की आवाजाही को अधिक तेज और सुगम बनाते हुए एक सशक्त आर्थिक कॉरिडोर का निर्माण करेगा. रियल एस्टेट के दृष्टिकोण से बेहतर कनेक्टिविटी हमेशा से प्रॉपर्टी की मांग और मूल्यवृद्धि का सबसे बड़ा आधार रही है. हमें उम्मीद है कि लखनऊ-कानपुर कॉरिडोर के साथ उभरते क्षेत्र, विशेष रूप से उन्नाव और अन्य परिधीय विकास क्षेत्र, रेसिडेंशियल ,कमर्शियल, वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स परियोजनाओं के लिए डेवलपर्स की बढ़ती रुचि का केंद्र बनेंगे. बुनियादी ढांचा हमेशा से शहरी विकास का प्रमुख आधार रहा है और यह कॉरिडोर उत्तर प्रदेश में दीर्घकालिक आर्थिक प्रगति तथा स्थायी मूल्य सृजन का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा.”
यह एक्सप्रेसवे ही नहीं बल्कि इस पूरे बदलाव में सबसे बड़ा गेम-चेंजर नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट साबित हो रहा है. इसके परिचालन के बेहद करीब पहुंचने के साथ ही पूरे क्षेत्र की आर्थिक गतिशीलता पूरी तरह बदल गई है. जेवर एयरपोर्ट के कारण केवल रियल एस्टेट ही नहीं, बल्कि कमर्शियल सेक्टर, आधुनिक वेयरहाउसिंग (लॉजिस्टिक्स पार्क) और आईटी (सूचना प्रौद्योगिकी) सेक्टर में एक बहुत बड़ा संरचनात्मक बदलाव आ रहा है. दुनिया की बड़ी-बड़ी टेक और आईटी कंपनियां अब नोएडा और ग्रेटर नोएडा के साथ-साथ जेवर के आस-पास अपने ग्लोबल डेटा सेंटर और ऑफिस स्पेस स्थापित कर रही हैं.
इसके साथ ही, वैश्विक स्तर के लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन नेटवर्क को सपोर्ट करने के लिए इस पूरे बेल्ट में विशाल वेयरहाउसिंग हब विकसित हो रहे हैं. आसान और तेज आवागमन से न सिर्फ व्यापार का दायरा बढ़ा है, बल्कि स्थानीय स्तर पर लाखों नए रोजगार और औद्योगिक गतिविधियों को भी एक नई व असीमित रफ्तार मिली है.