काली छिपकली काट ले तो क्या होता है? मौत, बीमारी…या सिर्फ अफवाह?
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Chipkali Ke Katne Se Kya Hota Hai: काली छिपकली को लेकर लोगों में डर बना रहता है. क्या यह जहरीली होती है? क्या काटने पर जान का खतरा है? विष विज्ञान के एक्सपर्ट बताते हैं कि भारतीय घरों में मिलने वाली काली या पील…और पढ़ें
हाइलाइट्स
- घरों के आस-पास घूमने वाली काली छिपकली जहरीली नहीं होती है.
- लेकिन अगर आपको कभी छिपकली काट लें तो डॉक्टर को दिखाएं.
- अगर छिपकली काट ले या खाने-पीने की चीज में गिर जाए तो सावधानी जरूरी है.
मेरठ: अक्सर घर में दीवारों या छत पर घूमती छिपकलियां नजर आ जाती हैं. लेकिन जब बात काली छिपकली की आती है, तो लोगों के मन में डर और सवाल दोनों बढ़ जाते हैं. कई लोगों को लगता है कि काली छिपकली जहरीली होती है या अगर वो काट ले तो जान को खतरा हो सकता है. इसी डर और भ्रम को दूर करने के लिए लोकल18 की टीम ने मेरठ स्थित चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के विष विज्ञान विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. यशवेंद्र वर्मा से खास बातचीत की.
डॉ. यशवेंद्र वर्मा ने बताया कि छिपकलियों की कई प्रजातियां दुनियाभर में पाई जाती हैं. भारत में जो छिपकलियां आमतौर पर घरों में दिखती हैं, चाहे उनका रंग काला हो या पीला, वे न तो जहरीली होती हैं और न ही काटने की प्रवृत्ति रखती हैं. उन्होंने साफ कहा कि भारतीय छिपकलियों से जान का कोई खतरा नहीं है. ये सांपों की तरह विषैली नहीं होतीं.
हालांकि, उन्होंने यह भी चेताया कि अगर कोई छिपकली गलती से खाने-पीने की चीजों में गिर जाए तो वह घातक साबित हो सकती है. ऐसा होने पर फूड प्वाइजनिंग का खतरा रहता है. इसलिए हमेशा खाने-पीने का सामान ढककर रखें और कोई संदिग्ध स्थिति लगे तो उसे न खाएं.
डॉ. वर्मा ने बताया कि भारत में घरों के आसपास पाई जाने वाली छिपकलियां सुरक्षित हैं, लेकिन विदेशों में कुछ छिपकलियों की प्रजातियां जहरीली होती हैं. खासकर साउथ अमेरिका में पाई जाने वाली ‘गिला मॉन्स्टर’ और मैक्सिको की ‘मैक्सिकन बीडेड लिजार्ड’ काफी विषैली होती हैं. भारत में भी पहाड़ी या घने जंगलों वाले इलाकों में कुछ प्रजातियां घातक हो सकती हैं, लेकिन ये आम लोगों की पहुंच वाले इलाकों में नहीं पाई जातीं.
छिपकली काट ले तो क्या करें?
डॉ. वर्मा ने सलाह दी कि अगर गलती से कोई छिपकली काट ले तो घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से डॉक्टर को जरूर दिखाना चाहिए. उन्होंने बताया कि छिपकली की त्वचा पर फंगल संक्रमण होने की संभावना रहती है, जिससे त्वचा में इंफेक्शन हो सकता है.