काली पड़ जाएंगी पत्तियां, सूख जाएगी नमी…गन्ना किसानों के लिए जून क्यों इतना घातक?

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काली पड़ जाएंगी पत्तियां, सूख जाएगी नमी…गन्ना किसानों के लिए जून क्यों इतना घातक?


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काली पड़ जाएंगी पत्तियां, सूख जाएगी नमी…गन्ने के लिए जून क्यों इतना घातक?

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Sugarcane Farming Tips : जून का महीना गन्ना किसानों के लिए बेहद अहम माना जाता है. इस समय तापमान अधिक होने के साथ-साथ मानसून की शुरुआत भी हो जाती है, इसलिए गन्ने को विशेष देखभाल की जरूरत होती है. खेत में उगने वाले खरपतवार गन्ने के पौधों से पोषक तत्व छीन लेते हैं. लोकल 18 से लखीमपुर खीरी के जिला कृषि अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह बताते हैं कि जून के महीने में खेत में खरपतवार तेजी से बढ़ते हैं, जो गन्ने की फसल के पोषक तत्व और नमी को नुकसान पहुंचाते हैं. जून में ही प्रारंभिक तना छेदक, पाइरिला, दीमक और टॉप बोरर जैसे कीटों का प्रकोप देखने को मिलता है. पाइरिला के प्रकोप से पत्तियों पर चिपचिपा पदार्थ जमा हो जाता है, जिस पर काली फफूंदी विकसित होने लगती है.

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में किसान गन्ने की खेती बड़े पैमाने पर करते हैं. इसीलिए खीरी जिले को चीनी का कटोरा कहा जाता है. जून का महीना गन्ने की फसल के लिए अहम माना जाता है. थोड़ी सी लापरवाही गन्ने के उत्पादन को कम कर सकती है. इस मौसम में कीटों का प्रकोप तेजी से बढ़ने लगता हैं. जून महीने में सिंचाई, गुड़ाई, खरपतवार नियंत्रण और कीट प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना जरूरी है.

जून के महीने में खेत में खरपतवार तेजी से बढ़ते हैं, जो गन्ने की फसल के पोषक तत्व और नमी को नुकसान पहुंचाते हैं. ऐसे में किसान समय-समय पर गुड़ाई करें और जरूरत पड़ने पर बैलों या कल्टीवेटर की मदद से गन्ने की कतारों के बीच की मिट्टी चढ़ाएं. इससे खरपतवार नियंत्रित होंगा और गन्ने की पौधों की बढ़वार भी बेहतर होगी.

गन्ने की फसल में जून के दौरान प्रारंभिक तना छेदक (Early Shoot Borer), पाइरिला, दीमक और टॉप बोरर जैसे कीटों का प्रकोप देखने को मिलता है. ऐसे में किसानों को नियमित रूप से खेत की निगरानी करनी चाहिए. यदि गन्ने के पौधों की पत्तियां सूखती दिखाई दें या बीच का हिस्सा सूखकर निकल जाए तो तुरंत कृषि विशेषज्ञों से संपर्क करें.

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जून के महीने में भीषण गर्मी का सितम भी देखा जाता है. ऐसे में नमी की समस्या भी हो जाती है, जिस कारण गन्ने का पौधा सूखने लगता है. ऐसे में रोगों का प्रकोप भी बढ़ जाता है. इससे निपटने के लिए गन्ने की फसल में नियमित रूप से सिंचाई करना चाहिए ताकि नमी बनी रहे. जलभराव की स्थिति भी न बनने दें, क्योंकि इससे जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है.

जून के महीने में गन्ने की अच्छी बढ़वार के लिए नाइट्रोजन युक्त उर्वरकों का संतुलित मात्रा में प्रयोग करें. खेत में पर्याप्त नमी होने पर ही उर्वरक डालें ताकि पौधों को अधिक लाभ मिल सके. कई बार देखा जाता है कि किसान खेतों में नमी नहीं होती है और रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल कर देते हैं, जिस कारण गन्ने की पत्तियां पीली पड़ने लगते हैं. एक एकड़ गन्ने में करीब 30 किलो यूरिया का छिड़काव करें.

जून महीने में गन्ने की फसल पर दीमक का प्रकोप बढ़ सकता है. दीमक पौधों की जड़ों और तनों को नुकसान पहुंचाकर फसल की बढ़वार प्रभावित करती है. इससे बचने के लिए खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखें और नियमित निगरानी करें. दीमक दिखाई देने पर फिप्रोनिल 5% एससी लगभग 1 लीटर प्रति हेक्टेयर कीटनाशक दवा का छिड़काव करें. ध्यान रखें कि दवा का छिड़काव सुबह करना चाहिए. दवा का प्रयोग करते समय खेत में उचित नमी होना जरूरी है.

जून माह में गन्ने की फसल में पाइरिला (Pyrilla perpusilla) कीट का प्रकोप बढ़ने की संभावना रहती है. यह कीट गन्ने की पत्तियों का रस चूसकर फसल को कमजोर कर देता है, जिससे पौधों की बढ़वार प्रभावित होती है और उत्पादन में कमी आ सकती है. पाइरिला के प्रकोप से पत्तियों पर चिपचिपा पदार्थ जमा हो जाता है, जिस पर काली फफूंदी विकसित होने लगती है. उपाय के तौर पर इमिडाक्लोप्रिड 17.8% एसएल की 100–125 मिली मात्रा प्रति एकड़ या थायमेथोक्साम 25% डब्ल्यूजी की अनुशंसित मात्रा का छिड़काव किया जा सकता है. दवा का छिड़काव सुबह या शाम के समय करें.

जिला कृषि अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह के मुताबिक, जून का महीना गन्ने की फसल के लिए अभिशाप भी है और वरदान भी. अगर इस महीने में किसान सही तरीके से देखरेख कर लें तो उत्पादन अधिक हो जाता है. लेकिन थोड़ी सी चूक फसल को चौपट भी कर सकती है.



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