काशी की यात्रा को बनाना है सफल? इन प्रमुख मंदिरों के दर्शन करना न भूलें
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वाराणसी: धर्म अध्यात्म की नगरी काशी को मंदिरों का शहर कहा जाता है. इस शहर में नाथों के नाथ बाबा विश्वनाथ विराजमान है. जिनके दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालु काशी आते है. काशी विश्वनाथ के अलावा भी काशी में कई मंदिर है. जहां दर्शन नहीं किया तो आपकी काशी यात्रा अधूरी मानी जाती है. इन मंदिरों का भी अपना धार्मिक महत्व है. आइये जानते है इनके बारे में…
विश्व के नाथ बाबा विश्वनाथ है जबकि काल भैरव को काशी का कोतवाल कहा जाता है. धार्मिक मान्यता है काशी में बिना कालभैरव के आदेश के कुछ भी नहीं होता. काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन करने से पहले काल भैरव मंदिर में दर्शन करने का विधान है. धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, काशी में यम नहीं बल्कि भैरव यातना मिलती है. यानी काशी में मृत्यु के बाद यमराज नहीं बल्कि काल भैरव मनुष्य के कर्मों के हिसाब से उन्हें दंड देते हैं.

काल भैरव को दंडाधिकारी भी कहा जाता है. यही वजह है कि जब भी कोई अफसर काशी आता है तो वो बाबा विश्वनाथ से पहले बाबा काल भैरव के दरबार में हाजिरी लगाने जाता है. मान्यता ये भी है कि इनके दर्शन से शनि की साढ़ेसाती से भी मुक्ति मिल जाती है. बिना काल भैरव के दर्शन के काशी की यात्रा अधूरी मानी जाती है.

इसके अलावा काशी में माता अन्नपूर्णा का दरबार भी है. माता अन्नपूर्णा अन्न और धन की देवी है. माता अन्नपूर्णा के कृपा से ही काशी में कोई भी मनुष्य भूखा नहीं सोता है. काशी वासियों के लिए खुद भगवान भोले ने माता अन्नपूर्णा से भिक्षा मांगी थी. खुद माता अन्नपूर्णा के दरबार में सालों से सबसे बड़ा अन्नक्षेत्र भी चलता है. इस अन्नक्षेत्र से हर दिन हजारों लोग मुफ्त में भोजन करतें है.
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इसके अलावा काशी में मां दुर्गा यानी माता कुष्मांडा का प्राचीन मंदिर भी है. दुर्गाकुंड क्षेत्र में यह मंदिर स्थापित है. दैत्य शुम्भ निशुम्भ के वध के बाद थकी देवी ने यही विश्राम किया था. इस मंदिर में दर्शन करने से हर तरह के संकटों से मुक्ति मिल जाती है. देशभर से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं. काशी के प्रमुख मंदिरों में इसका नाम भी शामिल है.

वहीं यहां संकट मोचन हनुमान जी का प्राचीन मन्दिर भी ही. देश के नामी हनुमान मंदिरों में इसका नाम भी शामिल है. गोस्वामी तुलसीदास जी को यही हनुमान जी के दर्शन हुए थे. इस हनुमान मंदिर की स्थापना खुद गोस्वामी तुलसीदास ने किया था. यह मंदिर काफी चमत्कारिक है.

इसके अलावा वाराणसी में तुलसी मानस मन्दिर भी है. सफेद संगमरमर से बना यह मंदिर काफी खूबसूरत है. इस मंदिर के दीवारों पर रामचरितमानस की चौपाइयां लिखी हुई है. देश का यह पहला मंदिर है जहां पूरा रामचरितमानस दीवारों पर अंकित है. इस मंदिर में प्रभु श्री राम, माता जानकी, लक्ष्मण और हनुमान जी विराजमान है.

काशी के कौड़ी माता का मंदिर भी है. यह जगह शक्तिपीठों में से एक है. कौड़ी देवी को बाबा विश्वनाथ की बहन कहा जाता है. कौड़ी देवी के दर्शन से मनुष्य को आर्थिक समस्याओं से मुक्ति मिल जाती है. धार्मिक मान्यता है कि माता कौड़ी को जो भी भक्त कौड़ी चढ़ाता है उसे धन की कमी नहीं होती है. इस मंदिर में भक्त माला फूल के बजाय कौड़ी लेकर पहुंचतें है.

इसके अलावा वाराणसी में एक दूसरा काशी विश्वनाथ का मंदिर भी है. बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी में यह मंदिर स्थापित है. यह मंदिर दुनिया का सबसे ऊंचे शिखर वाला मंदिर है. इस मंदिर के शिखर की ऊंचाई 252 फीट है. इस मंदिर को सफेद संगमरमर के पत्थरों से बनाया गया है.इसे बिरला टेम्पल के नाम से भी जाना जाता है.