किसान इस विधि से करें गन्ने की खेती, तीन गुना बढ़ जाएगी पैदावार, कमाएंगे मोटा मुनाफा, मौसम की भी नहीं पड़ेगी मार
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Sugarcane Farming Tips :गन्ने की फसल किसानों को अच्छी आमदनी देती है. उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद के वैज्ञानिकों के अनुसार रिंग पिट विधि से गन्ने की पैदावार दो से तीन गुना बढ़ाई जा सकती है.इस विधि से बोए हुए गन…और पढ़ें
गन्ना
हाइलाइट्स
- रिंग पिट विधि से गन्ने की पैदावार तीन गुना बढ़ सकती है.
- इस विधि से गन्ने की फसल तेज हवा में भी नहीं गिरती.
- रिंग पिट विधि से 900-1100 क्विंटल प्रति एकड़ उपज मिलती है.
सिमरनजीत सिंह/शाहजहांपुर: धान और गेहूं के मुकाबले गन्ने की फसल किसानों को अच्छी आमदनी देती है. गन्ने की फसल में मौसम की मार को झेलने की ज्यादा क्षमता होती है. भारत में गन्ने की 62 टन प्रति हेक्टेयर औसत उपज माना गया है. लेकिन गन्ने की नई-नई विधियों के बाद वैज्ञानिकों का दावा है कि गन्ने की पैदावार को दो से तीन गुना तक बढ़ाया जा सकता है. उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद के वैज्ञानिक का कहना है कि अगर किसान परंपरागत विधि को छोड़कर रिंग विधि का इस्तेमाल करें उत्पादन ज्यादा लिया जा सकता है.
उत्तर प्रदेश गन्ना शोध संस्थान के प्रसार अधिकारी डॉ संजीव पाठक ने बताया कि गन्ने की फसल किसानों की पसंदीदा फसलों में से एक है. ऐसे में अगर किसान गन्ने की परंपरागत विधि को छोड़कर रिंग पिट विधि से गन्ने की फसल लगाएं तो किसानों को अच्छा उत्पादन मिलेगा. रिंग पिट विधि से गन्ने की फसल उगाने से रिस्क कम हो जाता है. गन्ने की फसल मौसम की मार को मजबूती के साथ झेल जाती है. तेज हवा चलने के बावजूद भी गन्ने की फसल गिरती नहीं.
कैसे की जाएगी गन्ने की बुवाई
रिंग पिट से बुवाई करने के लिए किसानों को 90 सेंटीमीटर व्यास का रखकर गड्ढा खोदना होता है. गड्ढे की गहराई 30 से 45 सेंटीमीटर रहती है, जबकि गड्ढे से गड्ढे की दूरी केंद्र से करीब 120 सेंटीमीटर रखी जाती है. एक हेक्टेयर में करीब 6750 गड्ढे बनाए जाते हैं. हर गड्ढे में दो या तीन आंख वाले गन्ने रखे जाते हैं. एक गड्ढे में 35 से 40 आंखों की बुवाई की जाती है. इस विधि से गन्ने की बुवाई करने से निकलने वाले ज्यादातर कल्ले गन्ने में तब्दील हो जाते हैं. रिंग पिट विधि से उगाए हुए गन्ने चीनी परता ज्यादा मिलता है. इस विधि से 900 से 1100 क्विंटल प्रति एकड़ के हिसाब से किसान उपज ले सकते हैं.
कितना फायदेमंद है रिंग पिट विधि
रिंग पिट विधि सबसे ज्यादा उत्पादन देने वाली विधि है. लेकिन इस विधि से गन्ने की खेती करना थोड़ा सा महंगा है. क्योंकि अगर किसान के पास रिंग डिगर नहीं है, तो किसानों पर बुवाई के दौरान लेबर खर्च ज्यादा आता है. वहीं इस विधि से खेती करने के लिए परंपरागत विधि के मुकाबले ज्यादा बीज की जरूरत होती है. क्योंकि बीज तैयार करते समय मातृ पौधे ही लिए जाते है. इस विधि से गन्ना उगाकर सहफसली नहीं कर सकते. लेकिन यह विधि से बोई हुई गन्ने की फसल में मौसम की मार को झेलने की क्षमता ज्यादा हो जाती है. इस विधि से बोए हुए गन्ने की बंधाई अच्छे से हो जाती है और बारिश के दौरान तेज हवा चलने से गन्ना गिरता नहीं है.