कौन थे नोएडा पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के पिता के हत्यारे, क्यों हुआ उनका मर्डर..
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IPS Laxmi Singh Father Indradev Singh Case Verdict : वरिष्ठ वकील इंद्रदेव सिंह की 2002 में हुई हत्या के मामले में 24 साल बाद तीन दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है. जमीन के चलते रंजिश के इस मामले में पीडि़त परिवार को इंसाफ मिला है. क्या आप जानते हैं कि इंद्रदेव सिंह की बेटी कौन हैं, जिनकी वजह से इस मामले की चर्चा हो रही है.
वरिष्ठ वकील इंद्रदेव सिंह की 2002 में हत्या हुई थी..
लखनऊ : करीब 24 साल पहले लखनऊ की सड़कों पर एक सीनियर लॉयर और तत्कालीन बार एसोसिएशन अध्यक्ष इंद्रदेव सिंह की दिनदहाड़े हत्या हुई. इस हत्याकांड ने पूरे यूपी को जैसे झकझोर सा दिया था. 7 जुलाई 2026 को इस हाई प्रोफाइल केस में आखिरकार इंसाफ हुआ. सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने इस केस के तीन दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई. फैसले के वक्त अदालत में मौजूद उनकी बेटी की तरफ सभी की निगाहें थीं. वो बेटी कोई और नहीं, बल्कि गौतमबुद्ध नगर की मौजूदा पुलिस कमिश्नर सीनियर आईपीएस लक्ष्मी सिंह थीं. लक्ष्मी सिंह के साथ उनकी मां नयनतारा सिंह भी कोर्ट में मौजूद थीं. जब फैसला सुनाया गया, तो उनकी आंखें इस लंबे संघर्ष के बाद मिले इंसाफ को बयां कर रही थीं.
दरअसल, 8 अगस्त 2002 को वरिष्ठ अधिवक्ता इंद्रदेव सिंह इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ से अपने घर लौट रहे थे. इसी दौरान कलेक्ट्रेट के पीछे एक गली में हमलावरों ने उन्हें घेर लिया और उन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दी थीं. उनकी मौके पर ही उनकी मौत हो गई थी. इस घटना ने राजधानी लखनऊ की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे, क्योंकि इंद्रदेव सिंह केवल एक वरिष्ठ वकील ही नहीं, बल्कि लखनऊ बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और बेहद प्रभावशाली कानूनी हस्ती भी थे.
कौन थे हत्यारे?
सीबीआई अदालत ने विक्रम यादव, पन्ना सिंह और बृजेश यादव को इस हत्या का दोषी माना और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई. इस मामले में कुल 6 लोगों पर मुकदमा चला था, लेकिन सुनवाई के दौरान तीन आरोपियों की मौत हो गई थी. बाकी तीन आरोपियों के खिलाफ सबूतों के आधार पर अदालत ने दोष सिद्ध माना.
सीबीआई तक कैसे पहुंचा मामला?
हत्या के बाद शुरुआती जांच को लेकर लगातार सवाल उठे थे. परिवार ने भी इस केस की जांच पर गहरा असंतोष जताया था और इस मामले की केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने की मांग की थी. इंद्रदेव सिंह की बेटी लक्ष्मी सिंह ने सालों तक इस केस को आगे बढ़ाया था. बाद में जांच सीबीआई को सौंप दी गई, जिसने सबूत जुटाकर अदालत में मजबूत पैरवी की. इसी आधार पर आखिरकार दोषियों को सजा मिली. फैसला सुनाए जाने के दौरान नोएडा पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह और उनकी मां अदालत में मौजूद थीं. करीब 24 वर्षों के इंतजार के बाद आए इस फैसले को परिवार ने अपने साथ न्याय बताया.
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I currently serve as a Senior Assistant Editor at News18 Hindi, leading State & Local18 operations across Uttar Pradesh, Uttarakhand, Delhi, Himachal Pradesh and Haryana. With over 17 years of experience in jou…और पढ़ें