क्या है सरकार की ‘पहले आओ, पहले पाओ’ योजना? बदल दी 5 किसानों की तकदीर

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क्या है सरकार की ‘पहले आओ, पहले पाओ’ योजना? बदल दी 5 किसानों की तकदीर


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किसानों की आय बढ़ाने के लिए लगातार नए प्रयास किए जा रहे हैं. इन्हीं प्रयासों के तहत जिले में मधुमक्खी पालन को बड़े स्तर पर बढ़ावा दिया जा रहा है. आइए जानते हैं कि इस उद्योग से किसानों की आय कैसे बढ़ेगी और उन्हें कैसे मुनाफा मिलेगा. इस योजना से जुड़कर 5 किसानों ने अपनी तकदीर बदली है.

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में किसानों की आय बढ़ाने के लिए लगातार नए प्रयास किए जा रहे हैं. परंपरागत खेती के साथ-साथ किसानों को ऐसे व्यवसाय अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, जिनसे कम लागत में अधिक लाभ प्राप्त किया जा सके. इन्हीं प्रयासों के तहत जिले में मधुमक्खी पालन को बड़े स्तर पर बढ़ावा दिया जा रहा है. उद्यान विभाग की ओर से किसानों को मधुमक्खी पालन शुरू करने के लिए 40 से 50 प्रतिशत तक अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है. इसके चलते जिले के कई किसान खेती के साथ मधुमक्खी पालन कर शहद उत्पादन से अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं.

मधुमक्खी पालन आज केवल शहद उत्पादन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह किसानों के लिए रोजगार और अतिरिक्त आय का एक मजबूत साधन बन चुका है. कम भूमि, कम लागत और कम समय में शुरू होने वाला यह व्यवसाय ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. खास बात यह है कि मधुमक्खियां फसलों में परागण का कार्य भी करती हैं, जिससे कृषि उत्पादन में भी वृद्धि होती है.

मधुमक्खी पालन ऐसा व्यवसाय है, जिसे छोटे और सीमांत किसान भी आसानी से शुरू कर सकते हैं. एक किसान कुछ बक्सों के साथ इसकी शुरुआत कर सकता है और धीरे-धीरे अपने व्यवसाय का विस्तार कर सकता है. उद्यान विभाग की ओर से दिए जाने वाले अनुदान के कारण किसानों पर आर्थिक बोझ भी कम पड़ता है. एक मधुमक्खी बॉक्स से सालभर में कई किलोग्राम शहद प्राप्त किया जा सकता है. बाजार में शुद्ध शहद की मांग लगातार बढ़ रही है, जिसके कारण किसानों को अच्छा लाभ मिल रहा है. इसके अलावा मधुमक्खियों से मोम, रॉयल जेली, परागकण और अन्य उत्पाद भी प्राप्त होते हैं, जिनकी बाजार में अच्छी कीमत मिलती है.

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खीरी जिले की रहने वाली रीता देवी इस समय मधुमक्खी पालन कर रही हैं. उन्होंने बातचीत करते हुए बताया कि उद्यान विभाग की ओर से उन्हें 20 बाक्स मिले हैं. मधुमक्खी पालन करने से उन्हें अच्छा खासा मुनाफा हो रहा है. बाजारों में बढ़ रही शुद्ध शहद की डिमांड के कारण आसानी से हजारों रुपए कमाए जा सकते हैं. वहीं अगर बात की जाए तो एक बॉक्स में करीब 30 से 35 किलो शहद आसानी से प्राप्त किया जा सकता है. वहीं इस समय लीची का फल बाजारों में मिल रहा है, जिस कारण मधुमक्खियां लीची के पेड़ों पर बैठकर शहद एकत्र कर रही है.

खीरी जनपद के रहने वाले युवा कपिल वर्मा पिछले करीब 3 वर्षों से मधुमक्खी पालन कर रहे हैं. कपिल अपनी पढ़ाई जारी रखने के साथ-साथ मधुमक्खी पालन का काम भी बखूबी संभाल रहे हैं. वर्तमान में उनके पास मधुमक्खी पालन के करीब 100 बॉक्स हैं. कपिल बताते हैं कि इस काम के लिए बहुत ज्यादा जगह की जरूरत नहीं होती है. इन बॉक्स को आसानी से खेत के किसी भी किनारे रखा जा सकता है. एक बॉक्स से औसतन 30 से 35 किलो तक शुद्ध शहद प्राप्त हो जाता है, जिसकी बाजार में हमेशा भारी डिमांड रहती है.

खीरी जनपद के कल्हौरी गांव के रहने वाले धरमू इस समय मधुमक्खी पालन कर रहे हैं. उद्यान विभाग की ओर से इन्हीं योजना का लाभ मिला है. इस समय उनके पास करीब 20 बॉक्स हैं. मधुमक्खी पालन करने से पहले उद्यान विभाग की ओर से प्रशिक्षण दिया जाता है, जिसे आसानी से मधुमक्खी पालन किया जा सके और किसान आसानी से अपनी आय को दोगुनी कर सके.

गोला तहसील क्षेत्र के परसादपुर गांव के रहने वाले युवा शिवम पिछले करीब 6 वर्षों से मधुमक्खी पालन कर रहे हैं. मधुमक्खी पालन करने से अच्छा खासा मुनाफा हो रहा है. स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण शहद की मांग लगातार बढ़ रही है. लोग चीनी की जगह प्राकृतिक शहद का उपयोग करना पसंद कर रहे हैं. आयुर्वेद और घरेलू उपचारों में भी शहद का विशेष महत्व माना जाता है. यही कारण है कि बाजार में शुद्ध शहद अच्छे दामों पर बिक रहा है. शिवम ने बताया कि उनके पास करीब 100 बॉक्स हैं. बरसात के मौसम में थोड़ी दिक्कत होती है.

जिला उद्यान प्रभारी लखीमपुर मृत्युंजय सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए किसानों को लगातार जागरूक किया जा रहा है. वहीं किसानों को 40 से 50% अनुदान दिया जा रहा है, जिससे किसान आसानी से मधुमक्खी पालन कर सकें और अच्छा खासा मुनाफा कमा सकें. इसके लिए ऑनलाइन आवेदन किए जाते हैं. ‘पहले आओ पहले पाओ’ के आधार पर किसानों का चयन किया जाता है. किसानों को प्रशिक्षण भी दिया जाता है.

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