खर्राटे कर रहे परेशान? ये सिर्फ आदत नहीं, नाक के जरिये बिगड़ती सेहत की चेतावनी, जानें जड़ से खत्म करने की ट्रिक

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खर्राटे कर रहे परेशान? ये सिर्फ आदत नहीं, नाक के जरिये बिगड़ती सेहत की चेतावनी, जानें जड़ से खत्म करने की ट्रिक


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kharaton ka ilaj : कई बार ये समस्या इतनी बढ़ जाती है कि नींद पूरी नहीं हो पाती. इस वजह से थकान, सिरदर्द, चिड़चिड़ापन और उच्च रक्तचाप जैसी दिक्कतें होने लगती हैं. तेज खर्राटों की सबसे बड़ी वजह नाक के भीतर मटर जैसे मांस का बढ़ जाना है. इसे आम बोलचाल में नाक का पॉलिप कहा जाता है. सही दवा के सेवन से 60 से 90 दिनों में अच्छे नतीजे देखने को मिल सकते हैं. ज्यादातर मरीजों को राहत मिल जाती है, लेकिन कुछ को थोड़ा अधिक समय लग सकता है.

बलिया. रात को सोते वक्त तेज खर्राटे लेना भले ही एक आम समस्या लगे, लेकिन यह धीरे-धीरे गंभीर परेशानी का बड़ा कारण बन सकती है. न केवल खर्राटे लेने वाला ही, बल्कि उसके साथ आसपास सोने वाले लोगों की भी नींद उड़ जाती है. विशेषज्ञों के मुताबिक, तेज खर्राटों की सबसे बड़ी वजह नाक के भीतर मटर जैसे मांस का बढ़ जाना होता है, जिसे आम बोलचाल में नाक का पॉलिप (Nasal Polyps) कहा जाता है. इसके अलावा, नाक की हड्डी का टेढ़ा होना, एलर्जी, बार-बार सर्दी-जुकाम, मोटापा और गलत सोने की मुद्रा भी इस समस्या को बढ़ा देती है.

बलिया में होम्योपैथिक दवा मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष और फेमस होम्योपैथिक फिजिशियन डॉ. फिरोज फारुकी बताते हैं कि लगभग 80% मामलों में नाक की नसों में मांस जैसे उभार बन जाने से सांस का रास्ता संकरा (पतला) हो जाता है. इस स्थिति में जब व्यक्ति सोता है, तो सांस नाक के रास्ते सही ढंग से नहीं निकल पाती और तेज आवाज के रूप में खर्राटे आने लगते हैं. कई बार यह समस्या इतनी बढ़ जाती है कि व्यक्ति की नींद पूरी नहीं हो पाती, जिससे थकान, सिरदर्द, चिड़चिड़ापन और उच्च रक्तचाप जैसी दिक्कतें होने लगती हैं.

होम्योपैथिक चिकित्सा में खर्राटों की समस्या को जड़ से ठीक करने पर जोर दिया जाता है. कुछ होम्योपैथिक दवाएं नाक के भीतर बढ़े मांस, एलर्जी और सूजन पर असर डालती हैं, जिससे सांस लेने में सुधार हो सकता है. इस रोग का रामबाण दवा लेम्ना माइनर (Lemna minor) और REPL 73 नाम से आती हैं, जो बहुत असरदार है. सही दवा और नियमित सेवन से 60 से 90 दिनों में अच्छे परिणाम देखने को मिल सकते हैं. ज्यादातर मरीजों को राहत मिल जाती है, जबकि कुछ को थोड़ा अधिक समय लग सकता है. आराम न मिलने की दशा में नजदीकी होम्योपैथी चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए.

एक-दूसरे की पूरक

डॉ. फिरोज के मुताबिक, उनकी तीसरी पीढ़ी इस पद्धति से इलाज कर रही है और अब तक इसके साइड इफेक्ट की शिकायत सामने नहीं आई है. हालांकि, वे साफ तौर पर चेतावनी भी दिए कि होम्योपैथिक दवाएं एक-दूसरे की पूरक हो सकती हैं, इसलिए बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा का सेवन नहीं करना चाहिए. अगर नाक में मांस बढ़ने के साथ बार-बार छींक, सर्दी-जुकाम और नाक बंद रहने की शिकायत हो, तो समय पर जांच और इलाज बेहद जरूरी है. सही मार्गदर्शन और चिकित्सक की देखरेख में इस समस्या को ठीक किया जा सकता है.

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Priyanshu Gupta

Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें

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