गाजीपुर का स्टीमर घाट, अफीम व्यापार और ब्रिटिश काल की अनसुनी कहानी
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गाजीपुर का स्टीमर घाट ब्रिटिश काल के उस ऐतिहासिक दौर की याद दिलाता है जब यह स्थान ईस्ट इंडिया कंपनी के अफीम व्यापार का प्रमुख केंद्र था. गंगा नदी के किनारे स्थित यह घाट न सिर्फ व्यापारिक गतिविधियों का हिस्सा रहा, बल्कि कोयले से चलने वाले स्टीमर जहाजों और कई ऐतिहासिक घटनाओं का साक्षी भी रहा है.
गाजीपुर: उत्तर प्रदेश का गाजीपुर जिला न सिर्फ राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों के लिए जाना जाता है, बल्कि इसका नाम वैश्विक व्यापार और औपनिवेशिक इतिहास में भी दर्ज है. गंगा नदी के किनारे स्थित स्टीमर घाट आज भी ब्रिटिश काल की उन कहानियों का साक्षी है, जब यह स्थान ईस्ट इंडिया कंपनी के अफीम व्यापार का प्रमुख केंद्र हुआ करता था.
1820 में बना अफीम व्यापार का बड़ा केंद्र
साल 1820 के आसपास ब्रिटिश शासन ने गाजीपुर में दुनिया की सबसे बड़ी अफीम फैक्ट्री स्थापित की थी. यहां तैयार अफीम को गंगा नदी के रास्ते बंगाल होते हुए चीन और यूरोप तक भेजा जाता था, जिससे यह स्थान अंतरराष्ट्रीय व्यापार का अहम हिस्सा बन गया था.
स्टीमर घाट का ऐतिहासिक जन्म
भारी माल की ढुलाई के लिए अंग्रेजों ने कोयले से चलने वाले पैडल स्टीमर्स का इस्तेमाल शुरू किया. इन जहाजों के रुकने और माल लादने का मुख्य केंद्र ही बाद में “स्टीमर घाट” कहलाया, जो ताड़ीघाट स्टेशन से भी जुड़ा हुआ था.
कोयले से चलने वाले विशाल जहाज
इन स्टीमर्स में बीच में बॉयलर होता था, जिसमें कोयला जलाकर भाप बनाई जाती थी. यह भाप दोनों ओर लगे लोहे के पहियों को चलाती थी, जिससे जहाज गंगा की लहरों को चीरते हुए आगे बढ़ते थे.
1970 का दर्दनाक जहाज हादसा
स्थानीय लोगों के अनुसार, 1970 में एक पुराना जहाज यात्रियों को लेकर जा रहा था, तभी तेज आंधी में वह गंगा में डूब गया. इस हादसे में 150 से अधिक लोगों की मौत हुई थी, जिसके बाद पुराने स्टीमर जहाजों का संचालन बंद कर दिया गया.
PWD नियंत्रण और नई व्यवस्था
ब्रिटिश शासन के बाद यह घाट PWD के नियंत्रण में आ गया और यहां जहाजों की नीलामी भी होने लगी. धीरे-धीरे सुरक्षा कारणों से पुराने स्टीमर्स को बंद कर आधुनिक नावों का संचालन शुरू किया गया.
सांस्कृतिक विरासत से भी जुड़ा घाट
स्टीमर घाट केवल व्यापार का केंद्र नहीं था, बल्कि यह गाजीपुर की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं का भी महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है. 1909 के ब्रिटिश दस्तावेजों में भी इस घाट का उल्लेख मिलता है, जिसमें रामलीला झांकियों के मार्ग से जुड़ी जानकारी दर्ज है.
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