गाय-भैंस में हो गया है थनैला रोग? न हों परेशान, अपनाएं ये असरदार घरेलू नुस्खे
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बरसात के मौसम में थोड़ी सी लापरवाही भारी पड़ सकती है. दुधारू जानवरों में थनैला रोग का प्रकोप देखने को मिलता है, जो पशुओं में दूध की मात्रा को काफी घटा देता है और इलाज में देरी होने पर दूध उत्पादन भी कम हो जाता है. इस स्थिति में किसानों को होने वाले आर्थिक नुकसान का अंदाजा लगाया जा सकता है. थनैला रोग के घरेलू इलाज में अरंडी के तेल से थनों की मालिश करना, या नीम के पत्तों को उबालकर ठंडा पानी से धोना या सेंकाई करना फायदेमंद हो सकता है.
यूपी के लखीमपुर खीरी जिले में किसान भैंस पालन करते हैं, परंतु बरसात के मौसम में थोड़ी सी लापरवाही के कारण काफी नुकसान हो जाता है. ऐसे में अगर आप भी भैंस व गाय पालन करते हैं, तो बरसात के मौसम में सावधानियां बरतनी चाहिए.

बरसात के मौसम में थनैला रोग का प्रकोप बढ़ जाता है, जो पशुओं में दूध की मात्रा को काफी घटा देता है और इलाज में देरी होने पर दूध उत्पादन और भी कम हो जाता है.

थनैला रोग कई कारणों से हो सकता है, जैसे पशुओं की चिमक्कन, साफ-सफाई की कमी और बथान की खराब स्थिति. इस रोग की पहचान पशु के थन का आकार बढ़ने, थनों में सूजन और गांठें बनने, थन से दूध में खून या पस निकलने से की जा सकती है.

डॉ. एन. के. त्रिपाठी ने जानकारी देते हुए बताया कि थनैला रोग के घरेलू इलाज में अरंडी के तेल से थनों की मालिश करना, या नीम के पत्तों को उबालकर ठंडा पानी से धोना या सेंकाई करना फायदेमंद हो सकता है.

रोगी पशु को कुछ दिनों तक आधा किलो गुड़ और आधा किलो दही मिलाकर देने से भी लाभ होता है. यह उपचार दो से तीन दिनों तक जारी रखा जा सकता है.

दुधारू पशुओं में खाने-पीने का विशेष ध्यान रखें क्योंकि हरे चारे में खनिज पदार्थ और विटामिन की कमी पशुओं को थनैला रोग के लिए अधिक संवेदनशील बना सकती है.

इस रोग से बचने के लिए पशुओं के आसपास मच्छर-मक्खियों को न आने दें, पशुओं के आवास को साफ और स्वच्छ रखें, फिनाइल से सफाई करें. पशुओं को अजवाइन और सेंधा नमक को गुनगुने पानी में मिलाकर पिलाना चाहिए.