गेहूं की फसल पर मंडरा रहा ‘गिल्ली डंडा’ का साया, छिड़क दें इन 4 में कोई 1 दवा, जानें विधि
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Wheat Farming Tips : रबी सीजन में गेहूं की फसल पर गिल्ली डंडा खरपतवार तेजी से फैल रहा है, जिससे उपज पर सीधा असर पड़ सकता है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार समय रहते नियंत्रण बेहद जरूरी है. किसान इन 4 में से किसी एक आधुनिक खरपतवारनाशक का सही विधि और समय पर छिड़काव कर गिल्ली डंडा पर प्रभावी नियंत्रण पा सकते हैं.
क्लोडिनाफॉप प्रोपार्गिल (Clodinafop-propargyl) गिल्ली डंडा को खत्म करने के लिए सबसे लोकप्रिय और प्रभावी रसायनों में से एक है. बाजार में यह 15% WP के रूप में मिलता है. इसकी 160 ग्राम मात्रा प्रति एकड़ के हिसाब से पर्याप्त होती है. यह खरपतवार के पत्तों के माध्यम से अवशोषित होकर उसकी जड़ों को सुखा देता है, जिससे पौधा दोबारा नहीं पनपता.

सल्फोसल्फ्यूरान (Sulfosulfuron) एक व्यापक स्पेक्ट्रम शाकनाशी है, जो गिल्ली डंडा के साथ-साथ चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों पर भी वार करता है. इसकी 13.5 ग्राम मात्रा को प्रति एकड़ 200 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव किया जाता है. ध्यान रहे कि इसका प्रयोग बुवाई के 25-30 दिन बाद, पहली सिंचाई के समय ही करना चाहिए.

पिनोक्साडेन (Pinoxaden) : यह नए जमाने का खरपतवार नाशक है जो प्रतिरोधी गिल्ली डंडा पर भी प्रभावी है. इसे बाजार में ‘एक्सियल’ जैसे ब्रांड नामों से जाना जाता है. इसकी 400 मिलीलीटर मात्रा प्रति एकड़ उपयोग की जाती है. यह फसल को बिना नुकसान पहुंचाए खरपतवार की ग्रोथ को तुरंत रोक देता है.
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मेट्रिब्यूजिन (Metribuzin) का उपयोग सावधानी से करना चाहिए, क्योंकि इसकी अधिक मात्रा गेहूं की फसल को पीला कर सकती है. यह गिल्ली डंडा को जड़ से मिटाने में बहुत शक्तिशाली है. भारी मिट्टी में इसकी 100-120 ग्राम मात्रा प्रति एकड़ इस्तेमाल की जाती है. इसे आमतौर पर अन्य रसायनों के साथ मिलाकर बेहतर परिणाम के लिए उपयोग किया जाता है.

मेट्रिब्यूजिन (Metribuzin) का उपयोग सावधानी से करना चाहिए, क्योंकि इसकी अधिक मात्रा गेहूं की फसल को पीला कर सकती है. यह गिल्ली डंडा को जड़ से मिटाने में बहुत शक्तिशाली है. भारी मिट्टी में इसकी 100-120 ग्राम मात्रा प्रति एकड़ इस्तेमाल की जाती है. इसे आमतौर पर अन्य रसायनों के साथ मिलाकर बेहतर परिणाम के लिए उपयोग किया जाता है.

लगातार एक ही रसायन का प्रयोग न करें, क्योंकि इससे खरपतवार में प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है. स्प्रे करते समय खेत में पर्याप्त नमी का होना अनिवार्य है. हमेशा साफ पानी का उपयोग करें और दवा की सही खुराक का ही इस्तेमाल करें ताकि गेहूं की मुख्य फसल के विकास पर कोई विपरीत प्रभाव न पड़े.