चित्रकूट की वो रहस्यमयी जगह, जहां राम के हाथों दैत्य का हुआ वध
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चित्रकूट के घने जंगलों में स्थित विराध कुंड रामायण काल की एक पौराणिक घटना से जुड़ा हुआ माना जाता है. मान्यता है कि वनवास के दौरान भगवान श्रीराम ने यहां विराध नामक राक्षस का वध कर उसे इसी कुंड में फेंका था. स्थानीय लोग इसे अत्यंत रहस्यमयी स्थान मानते हैं, जहां आज भी गहरे कुंड में अजगरों की मौजूदगी और अदृश्य तपस्वियों के तप करने जैसी मान्यताएं प्रचलित हैं. यह स्थान आज भी आस्था और रहस्य का केंद्र बना हुआ है.
चित्रकूट. धर्म नगरी चित्रकूट जिसे प्रभु श्रीराम की तपोस्थली के रूप में जाना जाता है, मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने अपने वनवास काल के लगभग साढ़े 11 वर्ष चित्रकूट में ही व्यतीत किए थे. इस दौरान उन्होंने कई राक्षसों का संहार कर ऋषि-मुनियों और साधु-संतों को उनके आतंक से मुक्ति दिलाई थी. चित्रकूट का पाठा क्षेत्र आज भी ऐसी कई रहस्यमयी और धार्मिक स्थलों को अपने भीतर समेटे हुए है, इन्हीं में से एक है विराध कुंड, जो स्थानीय लोगों के बीच आस्था और रहस्य का केंद्र बना हुआ है. आप को बता दें कि, यह विराध कुंड चित्रकूट के टिकरिया जमुनिहाई गांव से करीब 5 किलोमीटर अंदर घने जंगलों के बीच स्थित है. यहां तक पहुंचना आसान नहीं है, क्योंकि रास्ता पूरी तरह से जंगलों से होकर गुजरता है, प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा यह स्थान जितना आकर्षक है, उतना ही रहस्यमयी भी है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, वनवास काल के दौरान जब भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जंगलों में विचरण कर रहे थे, तब उनका सामना विराध नामक एक शक्तिशाली राक्षस से हुआ था,और श्री राम ने उसका वध कर के इसी कुंड में फेंक दिए थे.
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नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें