जौनपुर में पैर पसार रहा ये दर्दनाक दानव, जैसे ही दिखे तुरंत करें ये उपाय
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Mouth cancer symptoms and precautions : ये एक गंभीर लेकिन इलाज योग्य बीमारी है. अगर डॉक्टर की सलाह मानकर लोग समय रहते सावधान हो जाएं तभी इसे हराया जा सकता है.
डा मोईन खान
हाइलाइट्स
- जौनपुर में माउथ कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं.
- तंबाकू, गुटखा और धूम्रपान से बचें.
- लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.
जौनपुर. उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में माउथ कैंसर (मुख कैंसर) के मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इसका मुख्य कारण तंबाकू, गुटखा, पान-मसाला और धूम्रपान का बढ़ता सेवन है. शहर के जाने-माने चिकित्सक डॉ. मोइन खान इस समस्या पर गंभीर चिंता जताते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है. डॉ. मोइन के अनुसार, माउथ कैंसर के शुरुआती लक्षणों को पहचानकर समय रहते इलाज संभव है. कुछ प्रमुख लक्षण इस प्रकार हैं, मुंह के अंदर या होंठों पर सफेद या लाल धब्बे. मुंह में लगातार छाले या जख्म जो लंबे समय तक ठीक न हों. चबाने या निगलने में कठिनाई. गले में लगातार खराश या आवाज में बदलाव. दांतों का कमजोर होकर गिरना. जबड़े या गर्दन में सूजन या गांठ का बनना.
ऐसे बढ़ जाती है बीमारी
डॉ. खान बताते हैं कि अगर कोई व्यक्ति इन लक्षणों को नजरअंदाज करता है, तो ये धीरे-धीरे गंभीर रूप ले सकता है और कैंसर शरीर के अन्य हिस्सों में भी फैल सकता है. जौनपुर में बड़ी संख्या में लोग गुटखा और पान-मसाले का सेवन करते हैं, जो कैंसर का सबसे बड़ा कारण है. अस्वस्थ खानपान और जीवनशैली, ताजे फल और हरी सब्जियों की कमी, मिलावटी खाद्य पदार्थों का सेवन और कम पानी पीना भी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करता है. देर से इलाज कराना, जागरूकता की कमी के कारण शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करने से ये बीमारी बढ़ जाती है.
इस आफत से ऐसे बचें
डॉ. मोइन खान ने माउथ कैंसर से बचाव के लिए कुछ सुझाव देते हैं. वे कहते हैं कि गुटखा, तंबाकू और सिगरेट से दूरी बनाएं. फलों और सब्जियों का अधिक सेवन करें. मुंह की सफाई का विशेष ध्यान रखें. नियमित रूप से दांतों और मुंह की जांच कराएं. अगर कोई भी लक्षण दिखे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. डॉ. मोइन सरकार से मांग करते हैं कि जौनपुर में तंबाकू उत्पादों पर सख्त प्रतिबंध लगाया जाए और लोगों को इसके दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया जाए. स्कूलों और कॉलेजों में अभियान चलाकर युवाओं को इसके खतरों के बारे में बताया जाना चाहिए.