धान की रोपाई के 20 दिन बाद खेत में डाल दें ये चीज, कल्ले गिनते रह जाएंगे पड़ोसी

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धान की रोपाई के 20 दिन बाद खेत में डाल दें ये चीज, कल्ले गिनते रह जाएंगे पड़ोसी


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धान की रोपाई के 20 दिन बाद डाल दें ये चीज, कल्ले गिनते रह जाएंगे पड़ोसी

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Paddy Farming Tips : यूपी के लखीमपुर खीरी जिले में किसान धान की खेती बड़े पैमाने पर करते हैं. अक्सर रोपाई के 20 दिन बाद किसान रासायनिक उर्वरक डालने लगते हैं, लेकिन आप इस बार ऐसा न करें. आज हम आपको एक ऐसा जैविक तरीका बताएंगे जिससे आपकी फसल देखने वाले देखते रह जाएंगे. लखीमपुर खीरी कृषि एक्सपर्ट प्रदीप बिसेन लोकल 18 से बताते हैं कि इसके प्रयोग से धान की पत्तियां अधिक हरी, चमकदार और रोगमुक्त बनी रहती हैं.‌ यह मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाने में भी सहायक है. इसके नियमित उपयोग से मिट्टी भुरभुरी बनती है, जिससे जड़ों का फैलाव बेहतर होता है और मिट्टी में पानी रोकने की क्षमता बढ़ती है.

मानसून की दस्तक के साथ धान की रोपाई शुरू हो गई है. धान की खेती किसानों के लिए हमेशा से फायदे का सौदा रही है. अक्सर किसान धान की रोपाई के 20 दिन बाद खेत में रासायनिक उर्वरक डालने लगते हैं. लखीमपुर खीरी कृषि एक्सपर्ट प्रदीप बिसेन लोकल 18 से बताते हैं कि इस बार आप इसकी जगह सरसों की खली का इस्तेमाल करें. धान के पौध के लिए ये रामबाण मानी जाती है. सरसों की खली में प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटैशियम के साथ कई सूक्ष्म पोषक तत्व होते हैं.

कृषि एक्सपर्ट प्रदीप बिसेन बताते हैं कि ये तत्व न केवल धान के पौधे को मजबूत बनाते हैं, बल्कि उसकी जड़ों को गहराई तक पोषण देते हैं. खली के प्रयोग से धान की पत्तियां अधिक हरी, चमकदार और रोगमुक्त बनी रहती हैं.‌ यह मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाने में भी सहायक है, जिससे खेत की गुणवत्ता वर्षों तक बनी रहती है.

धान की रोपाई के बाद किसान यूरिया और डीएपी जैसे रासायनिक खादों का उपयोग करते हैं. इससे फसल तो तेजी से बढ़ती है, लेकिन मिट्टी की ताकत हर साल घटती जाती है. इससे धीरे-धीरे फसल का उत्पादन कम होता जा रहा है. इससे निपटने के लिए कुछ किसानों ने सरसों की खली का उपयोग करना शुरू कर दिया है. इससे फसल की गुणवत्ता भी बेहतर हुई है और उत्पादन में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है.

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सरसों की खली एक बेहतरीन जैविक खाद है, जो मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों की मात्रा बढ़ाकर उसकी उर्वरता में सुधार करती है. इसके नियमित उपयोग से मिट्टी भुरभुरी बनती है, जिससे जड़ों का फैलाव बेहतर होता है और मिट्टी में पानी रोकने की क्षमता बढ़ती है. लाभकारी सूक्ष्मजीव सक्रिय होकर पौधों को पोषक तत्व उपलब्ध कराने में मदद करते हैं. पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं, बढ़वार अच्छी होती है और फसल स्वस्थ रहती है. यही कारण है कि कृषि विशेषज्ञ संतुलित मात्रा में सरसों की खली के उपयोग को टिकाऊ और लाभकारी खेती के लिए महत्वपूर्ण मानते हैं.

धान की रोपाई के शुरुआती दिनों में पौधे नई जगह पर अपनी जड़ें फैलाते हैं. लगभग 20 दिन बाद पौधों की वृद्धि तेज होने लगती है और उन्हें अधिक पोषण की आवश्यकता होती है. इस समय सरसों की खली डालने से पौधों को धीरे-धीरे पोषक तत्व मिलते रहते हैं, जिससे कल्ले (टिलर) अधिक निकलते हैं और फसल का विकास बेहतर होता है.

किसान प्रति एकड़ लगभग 80 से 100 किलोग्राम सरसों की खली का उपयोग कर सकते हैं. खली को खेत में समान रूप से बिखेरें और हल्की सिंचाई या खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखें ताकि यह धीरे-धीरे गलकर मिट्टी में मिल जाए. कई किसान इसे पहले 24 से 48 घंटे पानी में भिगोकर घोल बनाकर भी उपयोग करते हैं. सरसों की खली का प्रयोग बेहद सरल है. खेत की जुताई के समय या रोपाई के तुरंत बाद भी इसे मिट्टी में अच्छी तरह मिला सकते हैं. पानी देने के बाद खली धीरे-धीरे घुलकर पौधों को पोषण देती रहती है. इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता और मिट्टी में जैविक क्रियाओं को भी प्रोत्साहन मिलता है.

कृषि एक्सपर्ट प्रदीप बिसेन बताते हैं कि धान के खेत में सरसों की खली डालते समय कुछ बातों का ध्यान रखें. ताजी खली की जगह अच्छी तरह सूखी या सड़ी-गली खली का प्रयोग करें. अधिक मात्रा में एक साथ प्रयोग न करें. खेत में पर्याप्त नमी बनी रहनी चाहिए. यदि पहले से अधिक नाइट्रोजन दी जा चुकी है, तो कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार मात्रा तय करें.



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