न बोल पाता है, न ही सुन पाता…फिर भी लाइव लोकेशन से पहुंचता है घर-घर, रोजाना करता है बंपर कमाई

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न बोल पाता है, न ही सुन पाता…फिर भी लाइव लोकेशन से पहुंचता है घर-घर, रोजाना करता है बंपर कमाई


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Ghazipur News: गाजीपुर के साकिब सुन और बोल नहीं सकते, लेकिन 25 साल से किचन मैकेनिक्स का काम कर रहे हैं. व्हाट्सऐप और वीडियो कॉल से ग्राहकों तक पहुंचते हैं. मेहनत से बहनों की परवरिश की और शादी कराई.

हाइलाइट्स

  • साकिब सुन और बोल नहीं सकते, फिर भी किचन मैकेनिक्स में माहिर हैं.
  • व्हाट्सऐप और वीडियो कॉल से ग्राहकों तक पहुंचते हैं साकिब.
  • साकिब रोजाना दो से तीन हजार रुपये कमाते हैं.
गाजीपुर: कहते हैं कि इंसान की हिम्मत और हुनर उसकी सबसे बड़ी ताकत होती है और गाजीपुर के साकिब इसका जीता-जागता उदाहरण हैं. 1989 में जन्मे साकिब सुन भी नहीं सकते और बोल भी नहीं सकते, लेकिन उनकी कला ने उन्हें शहरभर में मशहूर कर दिया है. करीब 25 साल से वह किचन की दुनिया के ‘शिल्पकार’ हैं. गैस स्टोव बनाना, मरम्मत करना और हर एक छोटे-बड़े किचन मैकेनिक्स का काम करना उनकी कला है.

साकिब की कहानी जितनी मार्मिक है, उतनी ही प्रेरणादायक भी. उनके पिता के चार बच्चे थे, तीन बेटियां और एक बेटा. पिता ने दूसरी शादी कर ली और बच्चों को छोड़ दिया. तब छोटे साकिब ने ठान लिया कि वह अपनी मेहनत से बहनों की परवरिश करेंगे और उनकी शादी कराएंगे. यही हुआ. उन्होंने अपनी कला से की और बहनों के हाथ पीले किए.

वीडियो कॉल और लाइव लोकेशन से पहुंचते हैं ग्राहक तक

साकिब की सबसे बड़ी ताकत उनकी इंद्रियां हैं. वह सुन और बोल नहीं सकते, लेकिन देखने और समझने की उनकी क्षमता अद्भुत है. ग्राहक उन्हें व्हाट्सऐप पर लाइव लोकेशन भेज देते हैं या फिर वीडियो कॉल करते हैं. वीडियो कॉल पर वह आसपास का इलाका देखकर तुरंत पहचान जाते हैं कि ग्राहक कहां है. फिर अपनी साइकिल उठाते हैं, सारे टूल्स के साथ निकल जाते हैं. उनकी साइकिल भी अनोखी है. उस पर एक बैनर लगा है, जिसमें उनका मोबाइल और व्हाट्सऐप नंबर है, साथ ही गूगल मैप का लाइव लोकेशन लोगो बना है. ताकि लोग समझ जाएं—लोकेशन भेजिए और साकिब पहुंच जाएंगे.

25 साल का अनुभव और ग्राहकों का भरोसा

साकिब ने यह हुनर शहर के लाल दरवाजा इलाके के एक अख़बार नामक मैकेनिक से सीखा था. 1997 में गैस चूल्हे बनाना शुरू किया और आज 25 साल का अनुभव रखते हैं. रोजाना दो से तीन हज़ार रुपये कमा लेते हैं. बरसात में बस काम थोड़ा रुक जाता है, वरना साकिब की साइकिल हर गली-मोहल्ले में दौड़ती है. ग्राहक भी उन पर पूरा भरोसा करते हैं. एक महिला ग्राहक बताती हैं कि हम 8 साल से इनसे ही काम कराते हैं. बस व्हाट्सऐप पर वीडियो कॉल करते हैं और ये पहचान जाते हैं. ये सिर्फ मैकेनिक नहीं, ये हमें बहन मानते हैं.  साकिब हर छोटे काम के लिए ₹50 और बड़े काम के लिए ₹150 से ₹200 तक चार्ज लेते हैं. उनका कहना है कि मेहनत ही उनका सहारा है. वह बाकी मैकेनिक्स से ₹50 कम चार्ज लेते हैं.

अजब-गजब लेकिन प्रेरक कहानी

आज जब टेक्नोलॉजी हर जगह है, साकिब ने उसे अपने हुनर से जोड़ लिया. अपनी कमी को कमजोरी नहीं, बल्कि कला और मेहनत से ताकत में बदल दिया. गाजीपुर की गलियों में जब उनकी साइकिल और टूल्स की झंकार सुनाई देती है, तो लोग समझ जाते हैं साकिब आ गए हैं, अब किचन की कोई टेंशन नहीं.

Lalit Bhatt

मीडिया फील्ड में एक दशक से अधिक से सक्रिय. साल 2023 में News18 हिंदी से जुड़े. 2010 से नई दुनिया अखबार से पत्रकारिता की शुरुआत की.फिर हिंदुस्तान, ईटीवी भारत, वेबदुनिया समेत कई जगहों पर रिपोर्टिंग और डेस्क में …और पढ़ें

मीडिया फील्ड में एक दशक से अधिक से सक्रिय. साल 2023 में News18 हिंदी से जुड़े. 2010 से नई दुनिया अखबार से पत्रकारिता की शुरुआत की.फिर हिंदुस्तान, ईटीवी भारत, वेबदुनिया समेत कई जगहों पर रिपोर्टिंग और डेस्क में … और पढ़ें

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कमाल का हुनर…. लाइव लोकेशन से पहुंचता है घर-घर, रोजाना करता है बंपर कमाई



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