नर्सरी से हार्वेस्टिंग तक…हरी मिर्च को इस कीट से खतरा सबसे ज्यादा
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Green chili farming : हरी मिर्च दूसरी फसलों की तुलना में अधिक समय में तैयार होती है. इससे उसमें कीट और रोग लगने का खतरा ज्यादा रहता है. रायबरेली के कृषि एक्सपर्ट शिव शंकर वर्मा लोकल 18 से बताते हैं कि मिर्च की खेती करने वाले किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपनी फसल को कीट से बचाने की होती है. सबसे ज्यादा खतरा थ्रिप्स कीट से है. यह एक ऐसा कीट है, जो फसल की नर्सरी से लेकर मिर्च की तुड़ाई तक पौधे को नुकसान पहुंचाता रहता है. शिव शंकर वर्मा बताते हैं कि यह कीट को दिखने में काले, पीले, नारंगी या सफेद पीले रंग के होते हैं. बारिश के मौसम में खतरा और बढ़ जाता है.
रायबरेली. हर रसोई की जान हरी मिर्च स्वाद में जितनी तीखी होती है, उसे तैयार करने में उतनी ही मेहनत करनी पड़ती है, क्योंकि हरी मिर्च दूसरी फसलों की तुलना में अधिक समय में तैयार होती है. इससे उसमें कीट और रोग लगने का खतरा भी ज्यादा रहता है. कई कीट ऐसे भी होते हैं जो पूरी फसल को बर्बाद कर देते हैं. इनसे बचने के लिए किसान कई तरह के रासायनिक कीटनाशकों का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन फिर भी पूरी तरह से इनसे छुटकारा नहीं मिलता है. रायबरेली जिले के राजकीय कृषि केंद्र शिवगढ़ के प्रभारी अधिकारी शिव शंकर वर्मा (बीएससी एग्रीकल्चर डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय फैजाबाद) लोकल 18 से बताते हैं कि मिर्च की खेती करने वाले किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपनी फसल को कीट से बचाने की होती है. मिर्च में कीट लगने का खतरा ज्यादा बना रहता है. सबसे ज्यादा खतरा थ्रिप्स कीट का रहता है. यह एक ऐसा कीट है, जो फसल की नर्सरी से लेकर फसल कटाई (मिर्च की तुड़ाई) तक पौधे को नुकसान पहुंचाता रहता है.
ऐसे करें पहचान
शिव शंकर वर्मा बताते हैं कि यह कीट को दिखने में काले, पीले, नारंगी या सफेद पीले रंग के होते हैं. इनके पंख झिल्लीदार होते हैं. यह कीट आकार में हल्के लंबे और पतले होने के साथ छोटी उड़ान वाले होते हैं. यह लंबी दूरी का प्रवास हवा के माध्यम से पूरा करते हैं. इनकी लंबाई औसतन 1 से 2 एमएम होती है. वयस्क नर कीट से वयस्क मादा कीट आकार में बड़े होते हैं. ये कीट लगने पर पौधे की पत्तियां नाव के आकार की होकर ऊपर की ओर मुड़ जाती हैं. फूलों और फलों पर भी इसका असर तेजी से दिखाई देता है.
किसान करें क्या
शिवशंकर वर्मा के मुताबिक, इस कीट से बचाव के लिए इमिडाक्लोप्रिड 70.8 एस एल का पौधे पर छिड़काव करें. संक्रमण ज्यादा होने पर प्रभावित पौधों को खेत से निकलकर जमीन में दबा दें. स्पिनोसैड 45% एससी 75 मिली दवा को भी 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव कर सकते हैं.
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प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें