नोट गिनने की मशीन से नहीं, यूं होती थी चंदे की चोरी, रडार पर SBI का Ex मैनेजर
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अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी मामले की जांच में बड़ा खुलासा सामने आया है. सूत्रों के मुताबिक नोट गिनने वाली मशीन में नहीं, बल्कि नोटों को सीधा कर गड्डियां तैयार करने के दौरान चोरी की गई है. अब इस मामले में एसबीआई के पूर्व मैनेजर गोविंद मिश्र पुलिस के रडार पर हैं, जबकि ट्रस्ट के अनिल मिश्रा के भी जल्द बयान दर्ज हो सकते हैं.
राम मंदिर चंदा चोरी केस में रोजाना नए खुलासे हो रहे हैं.
Ram Mandir Chanda Chori Case: अयोध्या के राम मंदिर चंदा चोरी मामले में रोजना नए-नए खुलासे हो रहे हैं. सामने आए नए खुलासों में दावा किया जा रहा है कि चंदे में आए नोटों की चोरी मशीन से नोट गिनने के दौरान नहीं, बल्कि उससे पहले नोटों को सलीके से लगाने के समय की जाती थी. इसी एंगल पर पुलिस अब जांच को आगे बढ़ा रही है.
सूत्रों के अनुसार, मंदिर में चढ़ावे के रूप में आने वाले नोट पहले मंदिर के अलग-अलग कर्मचारियों के पास पहुंचते थे. इन कर्मचारियों का काम श्रद्धालुओं द्वारा मोड़कर डाले गए नोटों को सीधा करना और उन्हें सलीके से एक जगह लगाना होना था. इसके बाद ही नोट एसबीआई के कर्मचारियों को दिए जाते थे, जहां मशीनों के जरिए उनकी प्रोसेसिंग होती थी. बताया जा रहा है कि मशीन में नोट अपने आप 10, 20, 50, 100, 200 और 500 रुपये की अलग-अलग गड्डियों में तैयार हो जाते थे.
कब और कैसे हुई होगी चोरी
इसके बाद उन्हीं मशीनों से नोटों की गिनती होती थी. ऐसे में, शुरुआती जांच में यह संभावना जताई जा रही है कि अगर चोरी हुई है तो वह नोटों को व्यवस्थित करने के दौरान हुई होगी, न कि मशीन से गिनती के समय की गई होगी. सूत्रों के अनुसार, अब तक अयोध्या पुलिस ने एसबीआई के उन कर्मचारियों के बयान दर्ज नहीं किए हैं, जो काउंटिंग प्रक्रिया में शामिल थे. हालांकि, उनसे जल्द पूछताछ की बात कही जा रही है.
जांच के दायरे में एसबीआई के पूर्व मैनेजर
जांच के दायरे में एसबीआई के पूर्व मैनेजर गोविंद मिश्र का नाम भी सामने आया है. फिलहाल उनकी तैनाती लखनऊ में बताई जा रही है. सूत्रों का कहना है कि पुलिस उनसे भी पूछताछ कर सकती है ताकि पूरी प्रक्रिया को समझा जा सके. जांच में यह भी सामने आया है कि गिरफ्तार किए गए सभी आरोपी सीधे ट्रस्ट या एसबीआई के कर्मचारी नहीं थे. वे एक प्राइवेट कंपनी के जरिए आउटसोर्स पर रखे गए थे. इसी कंपनी की जिम्मेदारी कर्मचारियों की भर्ती, इंटरव्यू और ड्रेस कोड तय करने की थी. एसबीआई ने इस कंपनी को आउटसोर्सिंग का काम दिया हुआ था.
आउटसोर्स करने वाली एजेंसी की भूमिका भी संदेह में
सूत्रों के मुताबिक, काउंटिंग के दौरान निगरानी करने वाला सुभाष श्रीवास्तव भी एक पूर्व बैंकर था और वह भी इसी आउटसोर्स व्यवस्था के तहत काम कर रहा था. उधर, राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से बैंक के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर करने वाले अनिल मिश्रा के भी इस सप्ताह बयान दर्ज किए जा सकते हैं. पुलिस फिलहाल पूरे सिस्टम, आउटसोर्स कर्मचारियों की भूमिका और बैंक से जुड़े अधिकारियों की जिम्मेदारियों की जांच कर रही है. हालांकि, मामले में आधिकारिक तौर पर पुलिस ने अभी तक इन नए दावों की पुष्टि नहीं की है.
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Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international security affairs…और पढ़ें