पटनवार और कोलिय समुदाय का क्या है संबंध? जानिए महराजगंज के इतिहास की कहानी
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महराजगंज जिले का चौक क्षेत्र ऐतिहासिक और बौद्ध कालीन विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है. यहां स्थित रामग्राम क्षेत्र को लेकर मान्यता है कि यह वही स्थान है जहां भगवान गौतम बुद्ध के अस्थि अवशेषों का एक भाग स्थापित किया गया था. कोलिय समुदाय और प्राचीन इतिहास से जुड़ा यह इलाका आज भी रहस्य और आस्था का केंद्र बना हुआ है.
महराजगंज. उत्तर प्रदेश का महराजगंज जिला ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. जिले का चौक क्षेत्र अपने भीतर बौद्ध कालीन समृद्ध विरासत को समेटे हुए है. प्राचीन समय में इस क्षेत्र को रामग्राम के नाम से जाना जाता था, जो आज भी इतिहासकारों के लिए रहस्य और शोध का विषय बना हुआ है.
यहां के जंगलों में स्थित रामग्राम स्तूप को लेकर मान्यता है कि भगवान गौतम बुद्ध के महापरिनिर्वाण के बाद उनके अस्थि अवशेषों के आठ भागों में से एक भाग यहां लाकर स्थापित किया गया था.
बौद्ध कालीन विरासत का केंद्र रहा रामग्राम
रामग्राम स्तूप बौद्ध कालीन इतिहास का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है. स्थानीय मान्यताओं और लोककथाओं में इस क्षेत्र का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है. इतिहासकारों के अनुसार, यहां कोलिय समुदाय का बड़ा योगदान रहा है, जिन्होंने इस धरोहर को संरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाई.
कोलिय समुदाय और अशोक से जुड़ा इतिहास
सम्राट अशोक जब बौद्ध स्तूपों का उत्खनन करवा रहे थे, तब रामग्राम स्तूप को कोलिय समुदाय के लोगों ने संरक्षित रखा. इस कारण यह स्तूप आज भी अपने मूल स्वरूप में सुरक्षित माना जाता है और बौद्ध इतिहास का जीवंत प्रमाण है.
कोढ़ उपचार और काशी के राजा राम की कथा
लोककथाओं के अनुसार, काशी के राजा राम यहां कोढ़ के उपचार के लिए आए थे. उस समय इस क्षेत्र में कोल वृक्षों की अधिकता थी, जिनका उपयोग औषधीय उपचार में किया जाता था. उपचार के बाद उन्होंने इस क्षेत्र में कोल वृक्षों से राजधानी बसाई, जिसे बाद में रामग्राम नाम मिला.
कोलिय और पटनवार समुदाय का संबंध
डॉ. परशुराम गुप्त के अनुसार, वर्तमान पटनवार समुदाय कोलिय समुदाय से जुड़ा माना जाता है. उनकी परंपराएं और सामाजिक संरचना प्राचीन कोलिय समुदाय से मिलती-जुलती बताई जाती हैं.
आज भी रहस्य बना हुआ है रामग्राम स्तूप
आज भी रामग्राम स्तूप रहस्यों से घिरा हुआ है. मान्यता है कि यहां बुद्ध के अस्थि अवशेषों का एक भाग मौजूद है. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की टीम भी यहां कई बार उत्खनन कार्य कर चुकी है, लेकिन इतिहास का पूरा सच अभी भी रहस्य बना हुआ है.
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पिछले 4 साल से मीडिया इंडस्ट्री में काम कर रही हूं और फिलहाल News18 में कार्यरत हूं. इससे पहले एक MNC में भी काम कर चुकी हूं. यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश की बीट कवर करती हूं. खबरों के साथ-साथ मुझे…और पढ़ें