पत्नी थी सोई हुई, झट से पहुंचना था घर, द्वार पर था ‘काल’… खुन्नस ने उजाड़ दी बड़े भाई की जिंदगी

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पत्नी थी सोई हुई, झट से पहुंचना था घर, द्वार पर था ‘काल’… खुन्नस ने उजाड़ दी बड़े भाई की जिंदगी


बलिया: कहते हैं जो किसी से नहीं हारा वो अपनों से हार गया… घर परिवार में अक्सर छोटे मोटे झगड़े विवाद हुआ करते हैं, जो बाद में फिर से प्रेम में बदल जाते हैं. लेकिन किन्हीं परिस्थितियों में लोग इतने आग बबूला हो जाते हैं कि आक्रोश में जीवनभर का कलंक ही अपने ऊपर ले बैठते है. आज हम आपको जिस शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं उसका तो अपना खुद का सगा भाई ही दुश्मन बन गया. बात तीन साल पुरानी है. आगे पढ़िए…

बहादुरपुर निवासी राजबली ने कहा कि कोई गैर नहीं बल्कि, अपना सगा भाई ही दुश्मन बन है. उसके तीन छोटे – छोटे बच्चे हैं, जो पढ़ाई करते हैं. मैं पूरे शहर में भोजन बनाने का काम करता था. मगर, बाबा बालेश्वर नाथ का दर्शन कर जब घर पहुंचा तो भाई द्वार पर बैठा था और पत्नी सोई हुई थी, अचानक बोतल उठाई और आंखों में…

छोटी सी बात पर बढ़ता गया खुन्नस…
बताया कि वह तीन भाइयों में सबसे बड़े हैं. आपस में बातचीत के दौरान कभी-कभी नोंकझोक भी भाइयों के बीच हो जाती थी. मगर, एक दिन राजबली के सबसे छोटे और बीच वाले भाई में किन्हीं बातों को लेकर बहस हुआ. चुकी छोटा भाई राजबली के साथ रहता था. अब वह छोटे भाई को अपने साथ क्यों रखते हैं इस बात की जलन भी बीच वाले भाई को थी. पहले राजबली के पशुओं को हानि पहुंचाना शुरू किया. इसके बाद इन दो भाइयों के चपेट में बड़े भाई राजबली की जिंदगी पूरी तरह से खराब हो गई.

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सगा भाई बना खुद के बड़े भाई के लिए काल…
एक दिन की बात है जब बड़ा भाई राजबली अपने बाहरी कामकाज से घर लौटा. द्वार पर काल बनकर बैठे बीच वाले भाई ने अचानक बोतल उठाई और अपने बड़े भाई के आंखों पर फेंक दी. इस बोतल में तेजाब था, जिसके पड़ते ही राजबली बेचैन सा हो गया. इसके बाद उसके ऊपर ईंट पत्थर से वार किया गया. अंत में चिल्लाने की आवाज सुन आसपास के लोग दौड़े आए तो जान बची. लोग राजबली को तुरंत जिला अस्पताल ले गए. चोट और दर्द तो धीरे-धीरे खत्म हो गया, लेकिन आंखों की रोशनी चली गई. अब राजबली संसार को नहीं देख सकते है.

अब कैसे चलता है राजबली के परिवार का भरण-पोषण…
फिलहाल, राजबली अपने छोटे बच्चे का सहारा लेकर प्रतिदिन शाम को डीएम कार्यालय परिसर बलिया में स्थित चंद्रशेखर उद्यान के गंभारी बाबा मंदिर पर जरूर आते है. कहा कि वह शुरू से ही भगवान पर विश्वास करते हैं, लेकिन ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था. फिर भी राजबली का भगवान के प्रति आस्था है. कहा कि वह अब कुछ नहीं कर पाते हैं, उनका छोटा भाई ही मेहनत मजदूरी कर पूरा परिवार का भरण पोषण कर रहा है, इसे भी वह भगवान की कृपा समझते हैं.

राजबली कहते हैं कि कहीं न कहीं बीच वाला भाई भी सुखी नहीं है. उसको भी पछतावा होता होगा. कभी भी आक्रोश में आकर कोई ऐसा कदम नहीं उठाना चाहिए, जिससे किसी की जिंदगी खराब हो जाए. यह बहुत बड़ा उदाहरण है. घर परिवार में बहस या छोटे-मोटे झगड़े विवाद हो जाते हैं, लेकिन इसमें कभी भी भयावह कदम नहीं उठाना चाहिए. यह जिंदगी भर के लिए एक नासिर बन जाता है.



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