बांधे गए हाथ-पैर, सिगरेट से दागा…कानपुर में दाखिले के 7वें दिन ही इतनी क्रूरता कैसे?
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Kanpur Divyansh Death : महाराजपुर क्षेत्र में 11 साल के छात्र दिव्यांश की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. परिजनों का आरोप है कि वैदिक शिक्षा के लिए गुरुकुल भेजे गए उनके बेटे के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया. पुलिस ने गुरुकुल संचालक और चालक के खिलाफ हत्या की धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. दिव्यांश का इसी 15 अप्रैल को रामानुज भागवत वेद विद्यापीठ गुरुकुल में वैदिक शिक्षा के लिए दाखिल कराया गया था.
दिव्यांश की मौत से परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है.
कानपुर. यूपी के कानपुर की ये वारदात किसी को भी हिला देगी. कानपुर के महाराजपुर क्षेत्र की इस दर्दनाक घटना से हर कोई स्तब्ध है. 11 साल के छात्र दिव्यांश की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. इस वारदात ने सिर्फ परिवार को तोड़ दिया, बल्कि गांव में भी भारी आक्रोश पैदा कर दिया है. परिजनों का आरोप है कि वैदिक शिक्षा के लिए गुरुकुल भेजे गए उनके बेटे के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया. बेरहमी से पीटकर उसकी हत्या कर दी गई. पुलिस ने गुरुकुल संचालक और चालक के खिलाफ हत्या की धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
बताया सीढ़ियों से गिरा
दिव्यांश का इसी 15 अप्रैल को रामानुज भागवत वेद विद्यापीठ गुरुकुल में वैदिक शिक्षा के लिए दाखिल कराया गया था. परिवार का कहना है कि उनसे रोज फोन पर बातचीत होती थी. सब कुछ सामान्य था. घटना से एक दिन पहले मंगलवार को भी परिवार की उससे बात हुई थी. बुधवार सुबह सूचना मिली कि दिव्यांश सीढ़ियों से गिर गया है. परिजनों का आरोप है कि गुरुकुल संचालक कन्हैया लाल मिश्रा कार से दिव्यांश का शव लेकर गांव पहुंचे. इसके बाद घर से कुछ दूरी पर शव छोड़कर भाग गए. परिवार का आरोप है कि यह कोई हादसा नहीं, बल्कि क्रूर हिंसा का मामला लग रहा था. दिव्यांश के शरीर पर 40 से 45 चोटों के निशान थे. आरोप यहां तक है कि मासूम के हाथ-पैर बांधकर डंडों से पीटा गया. सिगरेट से दागा भी गया.
क्या बोली पुलिस
दिव्यांश उर्फ दीपू के चाचा जितेंद्र कुमार द्विवेदी ने कहा कि बच्चे के शरीर पर कई चोटों के निशान थे, जिससे लगता है कि उसे प्रताड़ित किया गया. हाथ, पैर और पीठ पर काले निशान के दाग हैं, जिससे आशंका है कि दिव्यांश को सिगरेट से शरीर में दागा गया हो गया. उसके पिता नरेंद्र द्विवेदी एक निजी फैक्ट्री में काम करते हैं. वह अपने परिवार का इकलौता बेटा था. एडीसीपी पूर्वी अंजली विश्वकर्मा ने बताया है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए पोस्टमार्टम पैनल और वीडियोग्राफी के साथ कराया जाएगा. मामले की तफ्तीश के लिए विशेष टीम गठित कर दी गई है. घटना के बाद गांव में भारी आक्रोश है.
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प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें