बोतल, थर्मस और वाटर कूलर नहीं! पहले के जमाने में लोग इस चीज में रखते थे पानी, घंटों रहता था ठंडा

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बोतल, थर्मस और वाटर कूलर नहीं! पहले के जमाने में लोग इस चीज में रखते थे पानी, घंटों रहता था ठंडा


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पुराने समय में लोग अपने साथ पानी रखने के लिए लौकी के बने बर्तन से लेकर कपड़े के थैले सहित तमाम तरह के चीजों को इस्तेमाल करते थे.

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मसक!

बहराइच: पहले जमाने में लोग गर्मियों में पानी को अपने साथ ले जाने के लिए मसक का इस्तेमाल किया करते थे. इसमें पानी ले जाने में आसानी होने के साथ-साथ पानी ठंड भी रहता था. कई दिन तक इसे सुरक्षित भी रखा जा सकता था. यह चमड़े से बना होता था. बदलते वक्त के साथ अब धीरे-धीरे इसका चलन भी विलुप्त हो गया है. मसक का इस्तेमाल पहले लोग कार्यक्रमों तथा दैनिक कार्यों के अवसर पर पानी ढ़ोने के लिए किया करते थे.

पानी भरने, ढोने और छिड़काव के लिए चमड़े के पात्र अथवा बड़ी थैली का प्रयोग किया जाता है. इसे देहात में मसक या फारसी में मशक कहते हैं. छोटे मसक के लिए फारसी में मश्कीज शब्द का भी प्रचलन है. लोकजीवन में मसक को मशक, चंगेली, चर्मघट, मश्क, खल्लड़ आदि नामों से पुकारा जाता है. मसक का प्रयोग मुख्य रूप से चिनाई करते समय और किसी उत्सव, संस्कार आदि में पानी के छिड़काव, पानी लाने आदि के लिए किया जाता रहा है. मसक को पानी भरकर पीठ के ऊपर लाद कर एक स्थान से दूसरे स्थान और लाया जाता है. हाथों से पकड़ कर उसके मुंह से पानी को निकाला जाता है और उससे छिडक़ाव भी किया जाता है. जहां से पानी निकलता है उसे मशक का मुंह कहा जाता है.

जानें कैसे किया जाता था मसक तैयार

मसक बनाने के लिए सबसे पहले बकरे और बकरी की खाल को खुरपियों के साथ उतारा जाता है. खाल खराब न हो उसके लिए उस पर नमक लगाया जाता है. नमक लगाने के बाद यह खाल चूने के पानी में डाली जाती है. चूने के पानी में डालने के बाद इसे दिन में कई बार पानी से धुला जाता है. जब यह खाल तैयार हो जाती है तो इसे चूने के खालों से निकालकर खुरपी से इसके बालों की सफाई की जाती है. उसके बाद कीकर की खसखस और नैसर्गिक रंगों से पानी डाल-डालकर इसे पकाया और रंगा जाता है. इसके बाद चमड़े को सुखाया जाता है.

सूखने के बाद बकरे की खाल की सींम्मण की जाती है तब कहीं जाकर मसक तैयार होती है. इसका इस्तेमाल आप पानी के साथ-साथ तेल आदि चीजों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर लाने के लिए कर सकते हैं. इसमें पानी आदि चीजों को लाने से कठिनाई नहीं होती है. इसे आप चाहे तो पीठ पर भी लाद कर बड़े आराम से ला सकते हैं जो एक बैग की तरह महसूस होता है. पहले जमाने में लोग सफर में पानी ले जाने के लिए इसका इस्तेमाल बड़े पैमाने पर किया करते थे. बहराइच जिले के मोहल्ला चांदपुरा के रहने वाले जीशान हैदर मसक के बारे में बताते हैं कि इसका इस्तेमाल लोग पहले नदियों से पानी लाने के लिए किया करते थे. जीशान हैदर साहब की देखरेख में आज भी बहराइच जिले में एक मसक मौजूद है.

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बोतल, थर्मस और वाटर कूलर नहीं! पहले लोग इस चीज में रखते थे पानी



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