महाराष्ट्र से आए फूलों के आगे इत्र नगरी कन्नौज ने डाले हथियार, फ्रांस से लेकर खाड़ी तक इनका दबदबा

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महाराष्ट्र से आए फूलों के आगे इत्र नगरी कन्नौज ने डाले हथियार, फ्रांस से लेकर खाड़ी तक इनका दबदबा


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Kannauj Perfume : कन्नौज इत्र नगरी है. यहां तमाम तरीके के फूलों को इत्र में बदला जाता रहा है. यहां के कारीगर सदियों से फूलों की खुशबू को कांच की शीशियों में कैद करते रहे हैं. इन दिनों नई खुश्बू की धूम है.

कन्नौज. यूपी के कन्नौज जिसे इत्र नगरी कहा जाता है, यहां तमाम तरीके के फूलों का इतर बनाया जाता है, जो पूरी तरह से नेचुरल होता है. यहां बनने वाला इत्र चंदन ऑयल सहित कई तरफ के ऑयल पर बसाया जाता है, जिससे उसकी ख़ुश्बू और अच्छी हो जाती है और लंबे समय तक चलती है. यहां के कारीगर सदियों से फूलों की खुशबू को कांच की शीशियों में कैद कर रहे हैं. इन्हीं में से एक है लिली के फूलों से बना इत्र, जिसकी मांग देश ही नहीं विदेशों तक है.

कैसे बनता है लिली का इत्र

कन्नौज में लिली का इत्र पारंपरिक तरीके से तैयार किया जाता है. इसके लिए सबसे पहले ताजे लिली के फूल तोड़े जाते हैं. फिर इन्हें तांबे के बड़े-बड़े बर्तनों डेग-भाप प्रक्रिया में पानी के साथ रखा जाता है. धीमी आंच पर गर्म करने से फूलों से प्राकृतिक खुशबू भाप के साथ उठती है. यह भाप लंबे बांस के पाइप से गुजरकर दूसरे बर्तन पर भाप रिसीवर– भाप-भापका में जाती है, जहां इसे चंदन के तेल या बेस ऑयल में उतारा जाता है. यही प्रक्रिया बार-बार दोहराई जाती है, जब तक कि तेल पूरी तरह लिली की खुशबू से महक न उठे.

खासियत और कीमत

लिली का इत्र हल्की, मीठी और ताजगी भरी खुशबू देता है. गर्मियों और खास मौकों के लिए बेहद लोकप्रिय. यह न सिर्फ परफ्यूम के तौर पर, बल्कि कॉस्मेटिक्स और अरोमा थैरेपी में भी इस्तेमाल होता है. इसकी खुशबू लंबे समय तक टिकती है, यही कारण है कि इसे फ्रेशनेस का इत्र कहा जाता है. कन्नौज में बनने वाला लिली का शुद्ध इत्र बेहद कीमती होता है. इसकी कीमत क्वालिटी और क्वांटिटी के हिसाब से तय होती है. आमतौर पर 10 मिलीलीटर से 12 मिलीलीटर की शीशी 1500 रुपये से 3000 रुपये तक में बिकती है, जबकि निर्यात होने वाले लिली इत्र की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत कई गुना ज्यादा होती है.

खींच लेगी अपनी ओर

इत्र व्यापारी निशीष तिवारी बताते हैं कि लिली का फूल साउथ और महाराष्ट्र में बड़े पैमाने पर होता है, लेकिन कन्नौज में ही लिली के तेल का उपयोग इत्र बनाने में होता है. साधारण भाषा में कहें तो लिली का तेल ही एसेंशियल ऑयल होता है. हम लोग इसे इत्र फॉम में तैयार कर लेते हैं. इसकी खुशबू बहुत लाजवाब रहती है, जो लोगों को अपनी तरफ खींचती है. लिली का इत्र फ्रांस, खाड़ी देशों और यूरोप में काफी पसंद किया जाता है. इसकी प्राकृतिक खुशबू और लंबे समय तक टिकने की क्षमता इसे अलग बनाती है.

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