यूट्यूब से सीखा, खाली पेट गाया गाना…और रामपुर के अथर्व ने जीत लिया इंडियाज टैलेंट फाइट सीजन-5 का खिताब, जानें कहानी
रामपुर: कभी स्कूल से लौटकर शाम को कमरे में बंद होकर गाने की प्रैक्टिस करना, तो कभी रात-रात भर कैफे और शादियों में लाइव परफॉर्मेंस देना और कई बार खाली पेट घर लौट आना-रामपुर के 21 वर्षीय अथर्व वर्मा की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है. मेहनत, भरोसे और जुनून के दम पर अथर्व ने India’s Talent Fight Season 5 का खिताब अपने नाम किया है.
यूट्यूब से सीखा गाना, परिवार का मिला साथ
अथर्व कहते हैं, ‘मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे इतने बड़े मंच पर जाने का मौका मिलेगा. स्कूल टाइम से ही गाने का शौक था, लेकिन किसी से तालीम नहीं ली. जो भी सीखा, घर पर यूट्यूब देखकर सीखा.’ वे बताते हैं कि इस सफर में उनके परिवार मम्मी, पापा, भइया, दादा और घर के बड़ों का पूरा साथ रहा. अगर परिवार का भरोसा न होता, तो शायद मैं यहां तक नहीं पहुंच पाता.
कैफे से लेकर नेशनल स्टेज तक गाया गाना
पिछले दो साल से अथर्व लगातार लाइव परफॉर्मेंस दे रहे हैं. कैफे, शादी-पार्टियां…जहां भी मौका मिला, उन्होंने गाया. इसके साथ ही एक साल तक लगातार ऑडिशन देते रहे. कई बार रिजेक्शन मिला, हौसला टूटा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. आखिरकार 20 दिसंबर को सेमीफाइनल में उनका चयन हुआ और फिर फाइनल में जीत उनके नाम रही.
अथर्व का कहना है कि पढ़ाई से ज्यादा उनका ध्यान संगीत में रहा. मुझे खुद पर भरोसा था कि मैं कुछ कर सकता हूं. कॉलेज जाता था, लेकिन शाम को गाने की प्रैक्टिस जरूर करता था। कई बार क्लास छोड़कर शो करने चला जाता था. आज वही अथर्व दिल्ली, मुंबई, रुड़की, हरिद्वार और रामनगर जैसे शहरों में ऑल इंडिया लेवल पर शो कर रहे हैं.
भूखे रहकर किए शो
इस चमक के पीछे संघर्ष की लंबी रातें हैं. अथर्व कहते हैं, ‘मेरा कोई गॉडफादर नहीं था, न कोई बड़ा बैकग्राउंड. शुरुआत में लाइव शो के पैसे बहुत कम मिलते थे. कई बार टैक्सी या ऑटो का किराया तक नहीं होता था. भूखे रहकर भी शो किए हैं.’ वे बताते हैं कि जब देर रात घर लौटते थे, तो मम्मी हमेशा जागती मिलती थीं, ‘वही मेरी सबसे बड़ी ताकत हैं.’
सिर्फ संगीत ही नहीं, अथर्व ने एक और अनोखे सफर से भी अपनी पहचान बनाई है. रामपुर (यूपी) के रहने वाले अथर्व वर्मा, जिन्हें लोग ‘जुगाड़ू बैकपैकर’ के नाम से भी जानते हैं, ने अपने दोस्त युसूफ के साथ इंदौर (मध्यप्रदेश) से लेकर किभीतु (आंध्र प्रदेश) पूर्वी भारत के आखिरी छोर तक करीब 4210 किलोमीटर की यात्रा पूरी की.
स्ट्रीट शो किए, कमाए पैसे
अथर्व बताते हैं, ‘हमने कार, ट्रक, बाइक और ट्रैक्टर से लिफ्ट लेकर यात्रा की. खाने के लिए अगर किसी ने खिला दिया तो ठीक, नहीं तो भूखे रहकर आगे बढ़ते रहे.’ वे कहते हैं कि इस सफर में गुरुद्वारों से उन्हें सबसे ज्यादा मदद मिली, जहां लंगर में भोजन और रहने की व्यवस्था मिली. इस दौरान उन्होंने स्ट्रीट शो भी किए और कुछ पैसे भी कमाए.