यूपी में दलितों को किसने सबसे ज्यादा सताया? पढ़ लें पुलिस की ये रिपोर्ट
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Police Report News: उत्तर प्रदेश में अक्सर एससी-एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज सामने आते रहते हैं. दलितों पर अत्याचार की खबरों से सियासी हलचल भी मची रहती है. अब पुलिस ने एक रिपोर्ट जारी कर बताया है कि आखिर यूपी में दलितों पर सबसे ज्यादा कौन अत्याचार कर रहा है. आइए जानते हैं पूरी लिस्ट.
दलितों को लेकर पुलिस ने रिपोर्ट जारी की.
लखनऊ: यूपी हो उत्तराखंड दलित उत्पीड़न की शिकायतें सामने आती रहती हैं. मगर, अब उत्तर प्रदेश पुलिस ने ताजा आंकड़े जारी किए है, जिसने पीडीए (पिछड़ा दलित अल्पसंख्यक) का नारा देने वालों को बनकाब कर दिया है. विभाग द्वारा जारी जनवरी-26 से अप्रैल-26 तक के आंकड़ों के अनुसार, इस दौरान एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज किए गए मामलों में सबसे अधिक आरोपी यादव और मुस्लिम समुदाय से मिले हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश में एससी-एसटी एक्ट से जुड़े कुल 4,741 मामले दर्ज किए गए. इनमें 14,672 व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है. चौंकाने वाली बात यह है कि इन आरोपियों में सबसे अधिक 2,160 यादव समाज से और उसके बाद 1,983 मुस्लिम समुदाय से हैं. दलित उत्पीड़न के जोनवार आंकड़ों पर नजर डालें तो आरोपियों में वाराणसी जोन में सबसे अधिक 650 यादव समाज और 428 मुस्लिम समुदाय से हैं. दूसरे नंबर पर लखनऊ जोन में 410 आरोपी यादव समाज और 428 आरोपी मुसलिम समुदाय के हैं. इसी तरह तीसरे नंबर पर गोरखपुर जोन में 297 यादव और 344 मुस्लिम समुदाय के आरोपी हैं. मेरठ जोन में दलित उत्पीड़न में 319 मुस्लिम समुदाय के आरोपी हैं.
इतना ही नहीं, कमिश्नरेट स्तर पर भी कई चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं. लखनऊ कमिश्नरेट में 77 आरोपी यादव समाज और 82 आरोपी मुस्लिम समुदाय से हैं. प्रयागराज कमिश्नरेट में दर्ज दलित उत्पीड़न के मामलों में 91 अभियुक्त यादव समाज के हैं. पुलिस रिपोर्ट यह भी बताती है कि दलित उत्पीड़न के अभियुक्तों में सबसे कम संख्या 1,601 ब्राह्मण समाज की है, जबकि क्षत्रिय समाज के 1,698 व्यक्तियों को दलित उत्पीड़न का आरोपी बनाया गया है.
गौरतलब है, इन्हीं आंकड़ों को लेकर कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर जमकर हमला बोला है. उन्होंने कहा कि थोड़ी तो शर्म करिए अखिलेश जी. कभी तो मुंह खोल दिया करो आप… क्या यहां भी ‘पहिला दावा अहिर’ ही करोगे आप…?? ‘ट्विटर, एसी और पीसी’ से ‘झूठ की दुकान’ चलाने वाले अखिलेश जी कम से कम संवेदना ही जाहिर कर देते? या यही लिख देते कि हत्यारा कोई भी हो, कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए. लिख लो, आप कभी नहीं कह पाओगे. आपको शर्म से गड़ जाना चाहिए कि आपका PDA यानी ‘पीट देगा अहीर’, ‘पीट देगा अल्पसंख्यक’ (सपाई) अब KDA बन गया है, यानी ‘काट देगा अहीर’!
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Kavya Mishra is working with News18 Hindi as a Senior Sub Editor in the regional section (Uttar Pradesh, Uttarakhand, Haryana and Himachal Pradesh). Active in Journalism for more than 7 years. She started her j…और पढ़ें