‘रामलला पर अटूट आस्था, चढ़ावे के चोरों पर…’ बिहार से आई भक्त ने किया दान

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‘रामलला पर अटूट आस्था, चढ़ावे के चोरों पर…’ बिहार से आई भक्त ने किया दान


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Devotee on Ram Mandir Theft: बिहार से आए एक श्रद्धालु ने बताया कि वे अयोध्या दर्शन-पूजन के लिए पहुंचे थे और उन्होंने स्वयं प्रभु राम के चरणों में पांच हजार रुपये दान किए.उन्होंने कहा कि जब भक्त अपनी श्रद्धा और विश्वास के साथ दान करते हैं, तो उस धन की सुरक्षा और पारदर्शिता भी उतनी ही जरूरी है.

Devotee on Ram Mandir Theft: अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण करोड़ों रामभक्तों की आस्था वर्षों की तपस्या और करीब 500 वर्षों के लंबे इंतजार का परिणाम है. प्रभु श्रीराम का भव्य और दिव्य मंदिर बनकर तैयार हुआ तो देश ही नहीं, दुनिया भर के रामभक्तों के लिए यह गर्व और भावनाओं का क्षण बना. लेकिन अब इसी राम मंदिर से जुड़ा दान घोटाले का मामला सुर्खियों में है. जिसने श्रद्धालुओं और आम लोगों के बीच चिंता बढ़ा दी है. 7 जून को राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में प्रदेश की योगी सरकार ने विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया. एसआईटी ने लगभग पांच दिनों तक जांच के बाद लखनऊ वापस पहुंच चुकी है. लेकिन अब बात उठ रही है कि इस मामले का भक्तों पर क्या असर पड़ा? क्या उनका राम मंदिर और रामलला पर भरोसा रहा है? चलिए जानते हैं बिहार से आईं एक श्रद्धालु से.

इस पूरे विवाद के बीच भी रामनगरी अयोध्या में आस्था का सैलाब थमा नहीं है. हर दिन लाखों की संख्या में श्रद्धालु अयोध्या पहुंच रहे हैं. रामलला के दर्शन कर रहे हैं और दान-पुण्य भी कर रहे हैं. लेकिन जब इन श्रद्धालुओं से राम मंदिर में सामने आए कथित दान घोटाले को लेकर बात की गई तो उन्होंने साफ कहा कि मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों पर कार्रवाई हो.

हर जगह दान चोरी का चर्चा?

दरअसल, राम मंदिर निर्माण और रामलला के दरबार के लिए देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालुओं ने दिल खोलकर दान दे रहे हैं. किसी ने नकद राशि चढ़ाई, तो किसी ने सोना-चांदी और बहुमूल्य वस्तुएं अर्पित कीं ऐसे में जब दान पात्र से जुड़ी कथित गड़बड़ी और करोड़ों रुपये के घोटाले की बात सामने आई, तो स्वाभाविक रूप से यह मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया. गांव-शहर, चौक-चौराहों से लेकर सोशल मीडिया तक एक ही सवाल उठने लगा कि आखिर राम मंदिर जैसे उच्च सुरक्षा वाले परिसर में दान की राशि में कथित हेराफेरी कैसे हुई?

बिहार की श्रद्धालु ने क्या बताया?

इस मामले पर अयोध्या पहुंच रहे श्रद्धालुओं की प्रतिक्रिया साफ है. बिहार से आए एक श्रद्धालु ने बताया कि वे अयोध्या दर्शन-पूजन के लिए पहुंचे थे. उन्होंने स्वयं प्रभु राम के चरणों में पांच हजार रुपये दान किए. उन्होंने कहा कि जब भक्त अपनी श्रद्धा और विश्वास के साथ दान करते हैं, तो उस धन की सुरक्षा और पारदर्शिता भी उतनी ही जरूरी है. श्रद्धालु ने कहा कि राम मंदिर में जो मामला सामने आया है, उसकी गहराई से जांच होनी चाहिए, ‘दूध का दूध और पानी का पानी’ होना चाहिए. उन्होंने यहां तक कहा कि यदि जरूरत पड़े तो मामले की सीबीआई जांच भी कराई जानी चाहिए.

क्या है अन्य लोगों की राय?

अयोध्या पहुंचे अन्य श्रद्धालुओं की भी लगभग यही राय है. उनका कहना है कि राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है. ऐसे में यदि दान राशि में किसी तरह की अनियमितता या घोटाले की आशंका सामने आती है, तो उसकी निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी हो जाती है. श्रद्धालुओं का मानना है कि इस तरह के मामलों में पारदर्शिता बनी रहनी चाहिए, ताकि भक्तों का विश्वास और मजबूत हो, कमजोर नहीं.

रामभक्तों का कहना है कि मंदिर में आने वाला दान भगवान के प्रति श्रद्धा का प्रतीक है और इसका उपयोग मंदिर व्यवस्था, सेवा और विकास कार्यों में होना चाहिए. यदि इस पवित्र धन में किसी भी स्तर पर गड़बड़ी हुई है, तो दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाना चाहिए. अयोध्या में मौजूद श्रद्धालुओं ने साफ शब्दों में कहा कि जांच एजेंसियों को निष्पक्ष होकर काम करना चाहिए और रिपोर्ट सार्वजनिक होनी चाहिए, ताकि देशभर के रामभक्तों को सच्चाई का पता चल सके.

एसआईटी की रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा सच्चाई

फिलहाल, राम मंदिर दान घोटाले का सच SIT जांच के बाद ही पूरी तरह सामने आएगा. लेकिन इस पूरे मामले ने एक बात जरूर स्पष्ट कर दी है कि रामभक्तों की आस्था अटूट है, पर वे दान और मंदिर व्यवस्था में पारदर्शिता भी चाहते हैं. श्रद्धालुओं की मांग है कि जांच निष्पक्ष हो, दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो और राम मंदिर जैसी आस्था की धरोहर पर किसी भी तरह का दाग न लगने पाए.

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Deep Raj DeepakSub-Editor

Deep Raj Deepak working with News18 Hindi (hindi.news18.com/) Central Desk since 2022. He has strong command over national and international political news, current affairs and science and research-based news. …और पढ़ें



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