संतान सुख से लेकर सुखी गृहस्थी तक, इस माता के मंदिर की है अनोखी मान्यता, जानें

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संतान सुख से लेकर सुखी गृहस्थी तक, इस माता के मंदिर की है अनोखी मान्यता, जानें


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उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में स्थित है एक ऐसा आस्था स्थल, जहां भक्तों की भीड़ हर दिन उमड़ती है. मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर पश्चिम शरीरा कस्बे में स्थित है माता झारखंडी का प्राचीन मंदिर. कहा जाता है कि यह स्थान राजा उदयन के निशांतन सेनापति द्वारा स्थापित कराया गया था, जो झारखंड से देवी की प्रतिमा को यहां लाए थे. तभी से यह धाम ‘झारखंडी’ नाम से प्रसिद्ध हो गया और आज भी यहां श्रद्धा और विश्वास की लौ जलती है.

उत्तर प्रदेश जनपद कौशांबी के मुख्यालय से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर पश्चिम शरीरा कस्बा में माता झारखंडी का मंदिर स्थापित है. बताया जाता है कि राजा उदयन के निशांतन सेनापति ने झारखंड से देवी की प्रतिमा लाकर स्थापित कराया था. तभी से यह स्थान झारखंडी के नाम से विख्यात हो गया है. माता झारखंडी के दरबार में प्रतिदिन हजारों की संख्या में भक्तों की लाइन लगी रहती है. ग्रामीणों की मानें तो कहा जाता है कि जो भी भक्ति भाव से माता के दरबार में अपनी मनोकामना मानता है, उसकी मनोकामना पूर्ण अवश्य होती है क्योंकि इन्हें संतान देने वाली देवी भी कहा जाता है.

महराजा उदयन के सेनापति ने संतान प्राप्ति के लिए स्थापित की थी प्रतिमा, मंदिर के गर्भ गृह मे है स्थापित

महाराजा उदयन के सेनापति यौगन्धरायण ने संतान प्राप्ति की कामना से माता झारखंडी की प्रतिमा स्थापित की थी, जो कौशांबी जनपद के पश्चिम शरीरा कस्बे में स्थित है. यह मंदिर “झारखंडी धाम” के नाम से प्रसिद्ध है.

महराजा उदयन के सेनापति ने संतान प्राप्ति के लिए स्थापित की थी प्रतिमा, मंदिर के गर्भ गृह मे है स्थापित

मान्यता है कि यह मंदिर संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है. नवरात्रों में यहां विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. मंदिर परिसर में दूर-दूर से श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं.

महराजा उदयन के सेनापति ने संतान प्राप्ति के लिए स्थापित की थी प्रतिमा, मंदिर के गर्भ गृह मे है स्थापित

झारखंडी माता का मंदिर जिस स्थान पर स्थित है, कहा जाता है कि वह क्षेत्र पहले घना जंगल और खरहर हुआ करता था. माता झारखंडी की प्रतिमा स्थापित होने के बाद इस क्षेत्र में न सिर्फ धार्मिक महत्व बढ़ा, बल्कि धीरे-धीरे यहां विकास भी होने लगा. आज कौशांबी जिले के पश्चिम शरीरा और पूर्व शरीरा दोनों को प्रमुख बाजारों में गिना जाता है.

महराजा उदयन के सेनापति ने संतान प्राप्ति के लिए स्थापित की थी प्रतिमा, मंदिर के गर्भ गृह मे है स्थापित

ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में जब भी किसी व्यक्ति का विवाह होता है, तो वह सबसे पहले अपनी जीवन संगिनी के साथ माता झारखंडी के दरबार में आशीर्वाद लेने पहुंचता है. मान्यता है कि देवी का आशीर्वाद लिए बिना गृहस्थ जीवन की शुरुआत अधूरी मानी जाती है. इसलिए शादी के तुरंत बाद नवविवाहित जोड़ा यहां दर्शन करने आता है और सुखद वैवाहिक जीवन की कामना करता है.

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