सरसों की इन उन्नत किस्म की करें बुवाई, जानें सही समय और तरीका; मिलेगा बेहतर उत्पादन

0
सरसों की इन उन्नत किस्म की करें बुवाई, जानें सही समय और तरीका; मिलेगा बेहतर उत्पादन


Last Updated:

Mustard Cultivation: शारदीय नवरात्रि के शुरू होने के साथ ही ठंडक का मौसम भी शुरू हो जाता है. साथ ही आपको बताते चले कि धान की अगेती किस्मों की कटाई भी शुरू हो जाती है. ऐसे में धान की फसल कटाई के बाद किसान सरसों की खेती कर सकते हैं. क्योंकि सरसों की खेती के लिए 15 से 25 सेल्सियस के तापमान की आवश्यकता होती है. हर तरह की मिट्टी में सरसों की खेती संभव है. 

सरसों की गिनती भारत की प्रमुख तिलहनी फसलों में होती है और इसकी खेती मुख्य रूप से रबी सीजन में की जाती है. बुवाई का सबसे उपयुक्त समय अक्टूबर से नवंबर तक माना जाता है, जब तापमान 20 से 25 डिग्री सेल्सियस के बीच होता है. किसान धान की कटाई के बाद अपने खेतों में सरसों की बुवाई करके अच्छी कमाई कर सकते हैं.क्योंकि यह फसल भी बेहद मुनाफे वाली फसल है.

LOCAL 18

सरसों के अच्छे उत्पादन के लिए दोमट या हल्की काली मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है, जिसमें नमी बनी रहती है. किसान अगर सही समय पर बुवाई करें तो पैदावार अच्छी मिलती है और फसल में रोगों का प्रकोप भी कम होता है .

LOCAL 18

सरसों की फसल से अच्छी पैदावार प्राप्त करने के लिए किसान खेत की अच्छी तरह से गहरी जुताई करें. जिससे मिट्टी की जल धारण क्षमता भी बढ़ जाएगी. इसीलिए जरूरी है कि एक बार कल्टीवेटर से जुताई करें. उसके बाद रोटावेटर से जुताई करें. खेत जुताई करते समय ध्यान दें की जुताई 15 से 20 सेंटीमीटर गहराई तक होनी चाहिए. या सामान्य हल से दो या तीन बार अच्छी तरह से जुताई दें .

LOCAL 18

सरसों की बुवाई के समय खेत की मिट्टी का पीएच मान 6.5 से 8 के बीच का होना चाहिए. बुवाई से पहले मिट्टी में उचित मात्रा में जैविक का खाद का मिश्रण कर दें. इसके अतिरिक्त 60 से 80 किलोग्राम नाइट्रोजन, 40 से 50 किलोग्राम फास्फोरस प्रति हेक्टेयर की दर से खेत में मिला दें. जिससे फसल की पैदावार अच्छी होगी. साथ ही खेत में जल निकासी की व्यवस्था अच्छी होनी चाहिए.

LOCAL 18

सरसों की कई उन्नत किस्में उपलब्ध हैं, जिनमें पीडीजेड-8, पूसा बोल्ड, पूसा टारक, वरुणा और कृषणा प्रमुख हैं. ये किस्में कम समय में तैयार होने वाली और ज्यादा उत्पादन देने वाली मानी जाती हैं.बुवाई के लिए बीज की मात्रा 4 से 5 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर पर्याप्त होती है.

LOCAL 18

बीज को फफूंदनाशी से उपचारित करना जरूरी है. ताकि फसल रोग मुक्त रह सके. फसल को शुरुआती अवस्था में 2-3 सिंचाई की आवश्यकता होती है, जबकि अधिक पानी से बचना चाहिए क्योंकि इससे जड़ गलन की समस्या हो सकती है. खेत में खरपतवार नियंत्रण के लिए समय-समय पर निराई-गुड़ाई करनी जरूरी है.

LOCAL 18

110 से 140 दिनों में पककर तैयार हो जाती है. कटाई तब करनी चाहिए जब फलियां पीली पड़ने लगें और बीज सख्त हो जाएं. समय पर कटाई से बीज झड़ने का नुकसान नहीं होता है.एक हेक्टेयर में किसान को औसतन 18 से 20 क्विंटल तक उत्पादन मिल सकता है.

LOCAL 18

रायबरेली जिले के राजकीय कृषि केंद्र शिवगढ़ के प्रभारी अधिकारी शिवशंकर वर्मा बताते हैं कि धान की अगेती फसल की कटाई के बाद किसान अपने खाली खेतों में उन्नत किस्म के सरसों की बुवाई करके अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. क्योंकि यह फसल न केवल खाद्य तेल की जरूरत को पूरा करती है.बल्कि किसानों की आय दोगुनी करने में भी अहम भूमिका निभाती है.

homeagriculture

सरसों की इन उन्नत किस्म की करें बुवाई, जानें सही समय और तरीका



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *