सिंचाई विभाग की कॉलोनी के लिए आए 15 लाख, कागजों में हुआ पूरा काम, पर हकीकत तो कुछ और ही, पढ़ें ग्राउंड रिपोर्ट
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Ground Report Of Ghazipur: उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से आए दिन ऐसी खबरें मिल रही थीं, जिन पर यकीन करना थोड़ा मुश्किल हो रहा था. योगी सरकार भ्रष्टाचार खत्म करने का दावा करती है. मगर, इस दावे की कुछ लोग बड़े ही आराम से धज्जियां उड़ा रहे हैं. दरअसल, यहां के सिंचाई विभाग के दफ्तरों में बैठे कुछ लोग पूरे सिस्टम को खोखला कर रहे हैं. 15 लाख रुपये जो कॉलोनी के मेंटेनेंस के लिए आए थे, उनका कोई हिसाब नहीं है. कागजों में तो कहा जा रहा है कि सारे काम कर दिए, लेकिन जब लोकल 18 की टीम ने जमीनी हकीकत जांची तो मसला ही कुछ और निकला. ग्राउंड रिपोर्ट में मेंटेनेंस के नाम पर बड़े घोटाले के संकेत मिले हैं.
गाजीपुर: सरकार भले ही भ्रष्टाचार खत्म करने के दावे करे. मगर, गाजीपुर के सिंचाई विभाग के दफ्तरों में बैठे कुछ लोग पूरे सिस्टम को खोखला कर रहे हैं. अंदरूनी सूत्रों से मिली जानकारी ने विभाग की उन काली करतूतों को सामने लाकर रख दिया, जहां इंसानी जान से ज्यादा कीमत फाइलों और कमीशन की नजर आती है.
15 लाख रुपये का हवा-हवाई काम
विभागीय सूत्रों के मुताबिक, सिंचाई विभाग की कॉलोनी को चमकाने और मरम्मत के लिए 15 लाख रुपये का मोटा बजट आया था. सरकारी कागजों में इस पैसे से टूटी छतें, खराब दरवाजे, कॉलोनी की नालिया, बिजली के खंभे और खिड़कियां ठीक होनी थीं. जबकी हकीकत सच से बिल्कुल उलट थी. यहां एक ईंट भी नहीं लगी.
लोकल 18 की टीम द्वारा ली गईं कुछ तस्वीरें यहां की अलग ही कहानी कहती हैं. टूटी दीवारें, उखड़ती छतें और वर्षों पुरानी जर्जर इमारतें. इन्हें देखकर ऐसा लगता है जैसे किसी मुगलकालीन जमाने के किले हो. अब सवाल बस यही बचता है कि आखिर जनता की मेहनत की कमाई का यह पैसा किसकी तिजोरी में चला गया.
कर्मचारियों का दर्द- मुंह खोला तो नौकरी जाएगी
पड़ताल के दौरान कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इन मकानों में रहना हर दिन जोखिम लेने जैसा है. छत किसी भी समय गिर सकती है, वॉशरूम जाम हैं और लकड़ी के दरवाजे दीमक से सड़ चुके हैं. कर्मचारियों का कहना है कि जो भी इस बदहाली पर सवाल उठाने की कोशिश करता है, उसे वेतन रोकने या ट्रांसफर धमकी देकर चुप करा दिया जाता है. ऐसे में डर और मजबूरी के बीच जीना उनकी रोजमर्रा की सच्चाई बन गई है. बेचारे कर्मचारी सिस्टम की यह गंदगी देख तो रहे हैं, लेकिन बच्चों का पेट पालने के लिए चुप रहने को मजबूर हैं.
सिर्फ कॉलोनी नहीं नहरों और ट्यूबवेल में भी खेल
यह लूट सिर्फ कॉलोनी की दीवारों तक ही नहीं रुकी है. सूत्रों ने और भी चौंकाने वाले दावे किए हैं. कागजों पर सफाई के दावे कुछ और ही हैं. बल्कि हकीकत में 10 किलोमीटर की नहर में से सिर्फ 1 किलोमीटर की सफाई की जाती है और पूरे पैसे निकाल लिए जाते हैं.
एक खंड में 400 में से सिर्फ 100 ट्यूबवेल चल रहे हैं. हालांकि, सरकारी रिकॉर्ड में पूरे 400 का बिजली बिल और मेंटेनेंस का पैसा निकाला जा रहा है वो भी पूरे महीने भर का. कुछ कर्मचारियों का कहना है कि वे पिछले पांच साल से यहां रह रहे हैं और इस दौरान न तो मरम्मत हुई, न ही हालात बदले. हर साल बजट आता है, हर साल खर्च दिखता है, लेकिन ज़मीन पर तस्वीर वही की वही रहती है.