सितंबर में धान की फसल की करें खास देखभाल, बाली पर रहता है कीटों का खतरा, जान लें बचाव के उपाय

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सितंबर में धान की फसल की करें खास देखभाल, बाली पर रहता है कीटों का खतरा, जान लें बचाव के उपाय


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Threat of pests on paddy ear: विनय कुमार वर्मा बताते हैं कि यदि फसल में मक्खी का प्रकोप है, तो कृषि विशेषज्ञ की सलाह पर कीटनाशक का छिड़काव करें. इसमें प्रमुख रूप से क्यूराक्रोन दवा बेहद कारगर है. दो मिली दवा प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें, जिससे फसल इस रोग से बच सके.

Care of paddy crop: धान की रोपाई किए हुए दो माह से अधिक का समय बीत चुका है. इस बार मानसून भी बेहतर स्थिति में रहा है, जिससे किसानों को धान की फसल से अधिक पैदावार की उम्मीद है. सितंबर माह में धान की फसल में बाली आने का समय माना जाता है, इस दौरान धान के पौधे में बाली बनने लगती है. लेकिन, बाली बनने के दौरान फसल पर कई तरह के रोग एवं कीट लगने का खतरा भी बढ़ जाता है. इसलिए जरूरी है कि धान की खेती करने वाले किसान इस दौरान अपनी फसल की नियमित देखभाल करें ताकि वे किसी भी प्रकार के नुकसान से बच सकें और अच्छी पैदावार प्राप्त कर सकें.

रायबरेली जिले की कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक विनय कुमार वर्मा ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि सितंबर माह में धान की फसल में बाली आने का समय होता है. जब फसल में बाली बनने की शुरुआत होती है, तो सबसे पहले उसमें दूध भरता है, जो बाद में दाने में परिवर्तित हो जाता है. लेकिन इस दौरान धान की फसल पर मक्खियों का प्रकोप बढ़ जाता है, जिससे ये मक्खियां धान की बाली को चूस कर खोखला बना देती है. इसलिए किसान अपनी फसल की सही तरीके से देखभाल करें ताकि फसल को खराब होने से बचाया जा सके.

फसल का रस चूस लेते है कीट
आगे जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि धान की फसल में बाली आने के दौरान तना छेदक के साथ फ्लाई कीट यानी मक्खी का प्रकोप अधिक होता है. यदि आपकी धान की फसल में बाली सूख रही है और खींचने पर आसानी से निकल जाए, तो यह तना छेदक रोग है. अगर बाली नहीं निकल रही है, तो यह फ्लाई कीट यानी मक्खी का प्रकोप है. इससे बचाव के लिए कृषि विशेषज्ञ की सलाह पर उचित कीटनाशक का छिड़काव करें क्योंकि ये मक्खी बाली में दूध भरने की अवस्था में पौधों पर बैठकर रस चूस लेती है, जिससे बाली सूख जाती है.

बचाव के उपाय
विनय कुमार वर्मा बताते हैं कि यदि फसल में मक्खी का प्रकोप है, तो कृषि विशेषज्ञ की सलाह पर कीटनाशक का छिड़काव करें. इसमें प्रमुख रूप से क्यूराक्रोन दवा बेहद कारगर है. दो मिली दवा प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें, जिससे फसल इस रोग से बच सके.

Manish Rai

काशी के बगल चंदौली से ताल्लुक रखते है. बिजेनस, सेहत, स्पोर्टस, राजनीति, लाइफस्टाइल और ट्रैवल से जुड़ी खबरें पढ़ना पसंद है. मीडिया में करियर की शुरुआत ईटीवी भारत हैदराबाद से हुई. डिजिटल में 7 साल से ज्यादा का अन…और पढ़ें

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धान की फसल में तना छेदक और फ्लाई कीट का खतरा, बाली आने के समय रखें ये सावधानी



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