सीरियस क्राइम के आरोपी को नियुक्ति नहीं दी जा सकती.. इलाहाबाद HC का बड़ा फैसला
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आरोपित और अभ्यर्थी शेखर की याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने मंगलवार को सुनवाई की. इस दौरान बेंच ने उसकी याचिका को खारिज करते हुए कहा कि गंभीर अपराधों में आरोपी व्यक्ति को पुलिस जैसी अनुशासित फोर्स में नियुक्ति नहीं दी जा सकती.
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच का बड़ा फैसला.
लखनऊः एक अभ्यर्थी की याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की. बेंच ने कहा कि गंभीर अपराधों में आरोपी व्यक्ति को पुलिस जैसी अनुशासित फोर्स में नियुक्ति नहीं दी जा सकती. पुलिस विभाग सिर्फ नौकरी नहीं बल्कि जनता के विश्वास और कानून व्यवस्था से जुड़ी संवेदनशील सेवा है, गंभीर आपराधिक आरोप वाला व्यक्ति पुलिस सेवा के लिए उपयुक्त नहीं है. इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने अभ्यर्थी की याचिका खारिज कर दी. शेखर नाम के एक अभ्यर्थी की याचिका को खारिज़ करते हुए हाईकोर्ट ने आदेश दिया.
‘अभी मेरा दोष सिद्ध नहीं हुआ है तो मुझे…’
याची शेखर के मुताबिक उसके खिलाफ दर्ज आपराधिक मुकदमा दुर्भावना से प्रेरित है. अभी तक उसकी दो दोष सिद्धि नहीं हुई है लिहाजा उसे नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता है. शेखर की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने कहा कि सिर्फ दोष सिद्ध न होना किसी अभ्यर्थी को नियुक्ति का अधिकार नहीं देता है. पुलिस जैसी अनुशासित सेवा में चयन के लिए अभ्यर्थी का निष्कलंक चरित्र जरूरी है.
किसी व्यक्ति के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामला लंबित हैं तो सक्षम प्राधिकारी उसके आचरण और पृष्ठभूमि का मूल्यांकन कर उसे नियुक्ति के लिए अनुपयुक्त मान सकता है.
‘यह राज्य सरकार को अधिकार है कि वह…’
हाईकोर्ट ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में राज्य को अधिकार है कि वह ऐसे लोगों को सेवा में आने से रोके, जिनकी पृष्ठभूमि से विभाग की साख और अनुशासन प्रभावित होने की संभावना है. गंभीर आरोपों का सामना कर रहा व्यक्ति पुलिस सेवा में नियुक्त हो जाए तो इससे जनता का विश्वास प्रभावित हो सकता है.
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Prashant Rai am currently working as Chief Sub Editor at News18 Hindi Digital, where he lead the creation of hyper-local news stories focusing on politics, crime, and viral developments that directly impact loc…और पढ़ें