अब फिल्मों तक सीमित रह गई शादी की यह परंपरा, इसके बिना ससुराल नहीं जाती दुल्हन

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अब फिल्मों तक सीमित रह गई शादी की यह परंपरा, इसके बिना ससुराल नहीं जाती दुल्हन


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Moradabad News: पहले मायके से विदा होकर ससुराल की ओर बढ़ती दुल्हन के साथ खुशियों और आंसुओं का अनोखा संगम देखने को मिलता था और दुल्हन डोली में विदा होती थी, लेकिन आज के बदलते दौर में डोली की जगह लग्जरी गाड़ियों ने ले ली है. डोली के मालिकों ने अपना दर्द बयां किया है.

मुरादाबाद: पहले शादी में दुल्हन की विदाई डोली में होती थी और यह पल परिवार के लिए बेहद खास माना जाता था. मायके से विदा होकर ससुराल की ओर बढ़ती दुल्हन के साथ खुशियों और आंसुओं का अनोखा संगम देखने को मिलता था. आज के बदलते दौर में डोली की जगह लग्जरी गाड़ियों ने ले ली है. मुरादाबाद के कहारों वाले मोहल्ले में डोलियां जमीन पर रखी धूल फांक रही हैं. पहले शादी के मौके पर डोली का आना पूरे परिवार और गांव के लिए खास होता था, लेकिन अब यह दृश्य सिर्फ फिल्म और पुरानी यादों का एक हिस्सा बनकर रह गया है. डोली के कारोबारियों का कहना है कि अब लग्जरी गाड़ी और बदलती जीवन शैली ने हमारे कारोबार को ठप कर दिया है.

42 साल से कर रहे काम
डोली का काम करने वाले नाजिम ने बताया कि हम यह डोली का काम अपने दादा-परदादा के जमाने से करते चले आ रहे हैं. यह काम हमें विरासत में मिला है और हमारा पुश्तैनी काम है. वर्तमान में मुझे 42 साल इस काम को करते हुए हो गए हैं. उन्होंने कहा कि 42 साल पहले जब मैंने यह काम शुरू किया था, तब घरों में जो शादियां होती थी, उनमें डोलियों की अहम भूमिका रहती थी और सभी इन डोलियों की बुकिंग करते थे. पहले महीने में 40 से 50 बुकिंग मिल जाती थी, लेकिन अब मुश्किल से महीने में 3 से 4 बुकिंग मिलती है. डोली के कारोबार में बहुत मद्दा आ गया है. उन्होंने कहा कि हम अपनी डोली सभी धर्म के लोगों में लेकर जाते थे, जिसमें सभी जातियां शामिल थी. अब उसकी जगह लग्जरी और बड़ी-बड़ी गाड़ियों ने ले ली है. लोग अब डोली नहीं, बल्कि बड़ी-बड़ी गाड़ियां बुक कर उसमें बहू लाना पसंद कर रहे हैं.

वेंकट हॉल और लग्जरी गाड़ियों ने छीना कारोबार
कारोबारी रियासत ने बताया कि जब से यह शादी हॉल बने हैं और शादी में बड़ी-बड़ी लग्जरी गाड़ियां ले जाने की परंपरा चली है, तब से डोली की परंपरा को लोग पीछे छोड़ते जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि जब शादी हॉल नहीं थे और बड़ी से बड़ी लग्जरी गाड़ियों की बुकिंग कम होती थी, तब इनकी महीने में 40 से 50 महीने की बुकिंग हो जाती थी और हम लोगों को बहुत फायदा होता था. उन्होंने कहा कि पूरी डोली चांदी की मेट से सजा रखी है. डोली देखने में किसी दुल्हन से कम नहीं लगती है, लेकिन अब मजबूरन यही दुल्हन धूल फांक रही है. यह लोग अपने घर के बाहर बेरोजगारों की तरह बैठे रहते हैं, लेकिन कोई बुकिंग नहीं मिलती. महीने में दो से तीन बुकिंग मिलती है, बाकी इनका कारोबार धीरे-धीरे ठप होता जा रहा है और इनकी डोलियां धूल फांकती नजर आ रही हैं.

About the Author

आर्यन सेठ

आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.



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